
प्रयागराज। Saffron Flag At Dargah: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में रविवार को रामनवमी के जुलूस के दौरान उस समय बवाल मच गया, जब कुछ लोगों ने सालार मसूद गाजी की दरगाह की छत पर भगवा झंडा लहराया और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। यह घटना शहर से कुछ दूर स्थित बहादुरगंज इलाके में हुई। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को कंट्रोल में लाने के लिए तत्काल कार्रवाई की।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक संवेदनशीलता, सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था के सवालों को सामने ला दिया है। प्रयागराज में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि कई लोग भगवा झंडे लेकर दरगाह की मजार की छत पर चढ़े हुए हैं और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए झंडा लहरा रहे हैं। वीडियो में दरगाह के पास भारी भीड़ भी मौजूद है।
यूपी के प्रयागराज का दृश्य देखिए
खलिहर लौंडे दरगाह पर भगवा लहरा रहे हैंन्यू इंडिया में युवाओं के पास एक ही काम है – मस्जिद और दरगाह पर चढ़कर नाचना।
अब यही भारत का भविष्य है। pic.twitter.com/D5fiLHxKj2
— Krishna Kant (@kkjourno) April 6, 2025
दरगाह हटाने की मांग
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘महाराज सुहेल देव सम्मान सुरक्षा मंच के कार्यकर्ता बहरिया थाना क्षेत्र के सिकंदरा स्थित गाजी मियां की दरगाह पर चढ़ गए। हाथों में भगवा झंडे लिए कई कार्यकर्ता दरगाह के ऊपर खड़े हो गए और उन्हें लहराते हुए जय श्री राम के नारे लगाने लगे। उन्होंने गाजी मियां की दरगाह को हटाने की मांग की।’
मचा बवाल

एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि, रविवार शाम करीब 4 बजे मनेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में 20 से ज्यादा लोग दरगाह पर पहुंचे। ये लोग दरगाह की छत पर चढ़ गए और भगवा झंडे लहराते हुए ‘जय श्री राम’ के साथ अन्य नारे लगाए। कुछ लोगों ने दावा किया कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से दरगाह नहीं है, बल्कि एक मंदिर का हिस्सा है। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद बवाल शुरू हो गया।
हिन्दू संगठन दे रहे विवादित बयान
सालार मसूद गाजी की दरगाह 11वीं सदी के सूफी संत और योद्धा सालार मसूद से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था का केंद्र है, लेकिन कुछ हिंदू संगठन इसे लेकर विवादित दावे करते रहे हैं। वहीं, अब महाराज सुहेल देव सम्मान सुरक्षा मंच के कार्यकर्ताओं ने भगवा झंडा लहरा दिया और उसका नाम महाराजा सुहेल देव के नाम पर रखा गया है, जो एक ऐतिहासिक शासक थे और जिनका संबंध सालार मसूद के खिलाफ लड़ाई से रहा है। माना जाता है कि, यह घटना इसी ऐतिहासिक कहानी से प्रेरित है, जिसे कुछ संगठन अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल करते हैं।
सामने आया पत्र

रिपोर्ट में बताया गया है कि, महाराजा सुहेल देव सम्मान सुरक्षा मंच का एक पत्र भी सामने आया है, जिसे जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को सौंपा गया है। इस पत्र में साफ़ लिखा गया है कि, सिकंदरा में स्थित गाजी मियां की मजार अवैध है। गाजी कभी सिकंदरा आये ही नहीं थे। वक्फ बोर्ड ने जमीन पर कब्जे की नीयत से मजार बनवाई है। पत्र में ये भी दावा किया गया है कि, पहले यहां शिवकंदरा वाले महादेव, सती बड़े पुरुख का मंदिर था। एक अंत रिपोर्ट में कहा गया है कि, गाजी मियां की दरगाह के अध्यक्ष सफदर जावेद के मुताबिक, दरगाह करीब तीन सौ साल पुरानी है। यह महमूद गजनवी के भतीजे सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह है। उनकी मजार भी बहराइच में है। यहां, बैशाख मास की पूर्णिमा और ज्येष्ठ मास के पहले रविवार को बड़ा मेला लगता है, जो तीन तक चलता है।
प्रशासन ने दरगाह की गेट पर लगाया ताला
एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘प्रयागराज प्रशासन ने 24 मार्च को इस दरगाह के गेट पर ताला लगा दिया था। इसके साथ ही मई में आयोजित होने वाले सालाना मेले को भी रोक दिया गया था। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने कहा कि, उन्होंने कोई ताला नहीं लगाया था। अंदर काम चलने के कारण सुबह ताला लगाया गया था।’ हालांकि, यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब देश में ईद और रामनवमी जैसे त्यौहार एक साथ मनाए गए। ऐसी घटनाओं से धार्मिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है और सामाजिक तनाव को बढ़ावा मिल सकता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है शहर
प्रयागराज धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है। यहां कुंभ मेले जैसे आयोजन भी होते हैं, जो विभिन्न समुदायों के बीच एकता का प्रतीक हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं इस छवि को धूमिल कर सकती हैं। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन सवाल यह उठता है कि, क्या प्रशासन को ऐसी घटना का पहले से अनुमान नहीं था? रामनवमी जैसे संवेदनशील मौके पर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाना प्रशासन की जिम्मेदारी थी। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि, क्या जिले की कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त है। अगर ऐसा है तो को लोग दरगाह की छत पर कैसे चढ़ गये।
प्रशासन को संवाद बढ़ाने की जरूरत

इस घटना के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती जिले के सामुदायिक सौहार्द बनाए रखना है। धार्मिक स्थलों पर इस तरह की हरकतें न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज में विभाजन की रेखा को भी गहरा करती हैं। यह भी देखना होगा कि यह घटना सुनियोजित थी या भावनाओं के आवेश में अचानक उठाया गया कदम। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त निगरानी, खुफिया जानकारी और समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत है।
एकता को कमजोर करने की कोशिश
प्रयागराज में हुई यह घटना इस बात की चेतावनी है कि, धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कितना खतरनाक हो सकता है। भक्ति और आस्था के प्रतीक नारे ‘जय श्री राम’ का नफरत या उन्माद के लिए इस्तेमाल करना न सिर्फ भगवान राम के संदेश के खिलाफ है, बल्कि देश की एकता को भी कमजोर करता है।
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