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China-US Tariff War: ट्रंप ने चूर किया जिनपिंग का सपना, महाशक्ति बनने की राह में डाल रहे ये रोड़ा

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वॉशिंगटन। China-US Tariff War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वार के जरिये चीन को पूरी तरह से घेर लिया है। ट्रंप ने जहां चीन के खिलाफ 145 प्रतिशत टैरिफ लगा कर शी जिनपिंग को मुश्किल में डाल दिया है। वहीं, दुनिया के खिलाफ लगाए जाने वाले टैरिफ को 90 दिनों के लिए रोक दिया है। इसका मतलब यह है कि, एक बार फिर अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध भू-राजनीति और वैश्विक अर्थशास्त्र के केंद्र में आ गया है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है, क्योंकि अब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के व्हाइट हाउस में हैं और उनके एजेंडे का मुख्य फोकस है, “चीन को झुकाओ और अमेरिका को फिर से महान बनाओ” है।
ट्रंप के निशाने पर चीन

China-US Tariff War:

इस बार का युद्ध सिर्फ टैरिफ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव है, जिसका एकमात्र लक्ष्य चीन को तकनीकी महाशक्ति बनने से रोकना है। भारत और अमेरिका दोनों ही इस भू-राजनीतिक स्थिति को समझ रहे हैं और इसके गंभीर परिणाम का भी उन्हें अंदाजा है। यही कारण है कि, मुख्य खलनायक के रूप में उभर रहा कम्युनिस्ट चीन अब ट्रंप के निशाने पर है। शीत युद्ध 2.0 के कई युद्धक्षेत्र शीत युद्ध 1.0 के समान ही हैं, जिनमें से कई एशिया, अफ्रीका और साउथ अमेरिका में हैं।
वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे चीन-अमेरिका

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 इधर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुपचाप कई देशों के साथ संबंध बनाए हैं और उन्हें मजबूत भी कर रहे हैं जो नई स्थिति के अंतिम परिणाम के लिए महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भी यही किया है, लेकिन काफी धूमधाम से। बता दें कि, राष्ट्रपति हू जिंताओ के दूसरे कार्यकाल से ही कम्युनिस्ट शासन के तहत चीन अमेरिका के साथ वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन इस बार दांव पर चीन है। इस बार का युद्ध चीन के अस्तित्व को मुश्किल में डालने वाला है।
चीन के खिलाफ कड़े फैसले ले रहे ट्रंप 
  • चीन वर्षों से अमेरिका के व्यापार घाटे को बढ़ा रहा है, बौद्धिक संपदा की चोरी कर रहा है और अब वह डॉलर की जगह युआन को वैश्विक मुद्रा बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। यही वजह है कि, ट्रंप चीन के खिलाफ एक के बाद एक कड़े फैसले ले रहे हैं।
  • ट्रंप ने चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील और ऑटोमोबाइल पर भारी टैरिफ लगा दिया है।
  • अमेरिकी कंपनियों को चीन से अपना उत्पादन भारत, वियतनाम या अमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
  • ट्रंप के बयानों को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने “आर्थिक ब्लैकमेल” करार दिया है और कहा है कि “अगर अमेरिका व्यापार युद्ध चाहता है, तो हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन समस्या यह है कि चीन अब 2018-19 स्थिति में नहीं है।
  • उसकी रियल एस्टेट अर्थव्यवस्था डूब रही है (एवरग्रांडे, कंट्री गार्डन का पतन हो रहा है)
  • चीन में बेरोजगारी का प्रतिशत 21% से ऊपर चला गया है।
  • अमेरिकी कंपनियों के हटने से चाइना का मैन्युफैक्चरिंग हब कमजोर होगा।
  • युआन की स्थिति कमजोर हो रही है, जिसका असर वैश्विक लेन-देन पर पड़ रहा है। फिलहाल, ट्रंप दुनिया को ये संदेश देने में सफल रहे हैं कि चीन विश्वसनीय गंतव्य नहीं हो सकता।
  • ASML, TSMC, NVIDIA जैसी कंपनियों पर चीन के साथ तकनीकी साझेदारी तोड़ने का दबाव है।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग और AI डोमेन में चीन को पीछे रखने के लिए रिसर्च फंडिंग में बढ़ोतरी की गई है।
जिनपिंग को झुकाना चाहते हैं ट्रंप 

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ट्रंप ये अच्छी तरह से जानते हैं कि, यह आर्थिक युद्ध ही है, जो अमेरिका की महाशक्ति की स्थिति को बनाए रखेगा या नष्ट कर देगा। यही कारण है कि उन्होंने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध शुरू किया है। उनका मकसद चीन की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है। इसके साथ ही अगर शी जिनपिंग अमेरिकी चालों के आगे झुकते हैं, तो उनकी मजबूत नेता वाली छवि पर असर पड़ेगा और हो सकता है कि वे अपना तीसरा कार्यकाल गंवा बैठें। हालांकि, चीन ने अब तक अमेरिकी टैरिफ का जवाब टैरिफ से दिया है, लेकिन कहा जा रहा है कि, चीन को ट्रंप के आगे झुकना ही पड़ेगा।

भारत की तरफ रुख कर रहीं अमेरिकी कंपनियां

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हालांकि, ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ कई चीन समर्थित वैश्विक मीडिया हाउस में नकारात्मक प्रचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी संसद में ट्रंप को कमजोर करना है, लेकिन दुनिया भर के कई न्यूज चैनलों ने उनके टैरिफ ब्रेक को उनके विपरीत रास्ते के रूप में पेश किया है। लेकिन सच ये है कि, ट्रंप का टैरिफ युद्ध एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। साथ ही ये भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ उठाए गये कदम का ही नतीजा है कि एप्पल, सैमसंग, डेल और एचपी जैसी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। भारत-अमेरिका तकनीकी व्यापार समझौते के तहत अनुसंधान और विकास को साझा किया जा रहा है। भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण में विशेष प्रोत्साहन मिल रहा है।

भारत पर लगाया 26 फीसदी टैरिफ 

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गौरतलब है कि, ट्रंप बार-बार भारत को टैरिफ किंग कहते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे भारत के खिलाफ महज 26 फीसदी टैरिफ लगाते हैं। इसके अलावा व्यापार को लेकर भारत और अमेरिकी प्रशासन के बीच बातचीत भी चल रही है। उम्मीद है कि, दोनों देश किसी ऐसे नतीजे पर पहुंचेंगे, जो दोनों के लिए फायदेमंद होगा। भारत पहले ही ट्रंप प्रशासन को भरोसा दिला चुका है कि, वह 2030 तक अमेरिका के साथ 500 अरब डॉलर का कारोबार करेगा। इससे अमेरिका को जरूर फायदा होगा।
आसान नहीं है लड़ाई

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अगर डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ के जरिए चीनी व्यवस्था को कमजोर करने के मिशन में कामयाब हो जाते हैं, तो उनका नाम इतिहास के पन्नों में अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रपतियों में से एक के तौर पर दर्ज हो जाएगा और उनकी छवि माउंट रशमोर की चट्टान पर अंकित हो जाएगी। यह दो महाशक्तियों के बीच आर्थिक युद्ध है, जिसमें बहुत कुछ दांव पर लगा है, यह लड़ाई आसान नहीं है, लेकिन इतना तय है कि इसका नतीजा वैश्विक व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल देगा।

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