
लखनऊ। Saurabh Rajput Murder Case: कहते हैं न जैसा करोगे, वैसा भरोगे, मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड तो हर किसी को याद होगा, जहां एक पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या कर दी और लाश को कई टुकड़ों में करके नीले ड्रम में डालकर उसमें सीमेंट भर दिया। ये हत्याकांड इतना वीभत्स था कि जिसने भी सुना शाक्ड रह गया। खैर जिस मुस्कान और साहिल ने जन्मों-जन्म तक साथ रहने के मकसद से इस काण्ड को अंजाम दिया था, उन्हें उनके कर्मों की सजा मिल गई है। कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा का हुक्म दे दिया है, लेकिन सवाल ये है कि, इसके बाद मुस्कान की जेल में पैदा हुई बेटी मन्नत उर्फ़ राधा का भविष्य क्या होगा। कौन पालेगा उसे।
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परिवार ने जिम्मेदारी उठाने से किया इंकार

दरअसल, मुस्कान और साहिल के परिवार वालों ने राधा की जिम्मेदारी उठाने से इंकार कर दिया है। साथ ही ये भी कहा है कि, उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि, वह मुस्कान की फांसी की सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकें। ऐसे में मुस्कान और साहिल को फांसी होना लगभग तय है!
अब इस मासूम बच्ची की जिम्मेदारी उठाने के लिए मुंबई के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी आगे आये हैं। उन्होंने इसके लिए मेरठ की अदालत में जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे से मुलाकात की और अपनी मंशा स्पष्ट की। इसके लिए उन्होंने कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, प्रक्रिया आसान नहीं है। इसके लिए फैजान को तमाम जांच से गुजरना पड़ेगा। जैसे उनकी आर्थिक स्थिति, उनकी पृष्ठभूमि, बच्ची के लिए उपयुक्त वातावरण और मां मुस्कान की मंजूरी। बच्ची के हित को देखते हुए अदालत, जेल प्रशासन,बाल कल्याण समिति और अन्य संबंधित अधिकारियों को सब कुछ सोच समझकर फैसला लेना होगा।
कैसे जिम्मेदारी उठाएंगे फैजान
शासकीय अधिवक्ता से अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए फैजान ने कहा, वे बच्ची की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं। वे बच्ची की रोजमर्रा की जरूरत से लेकर उसकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च, इलाज, कपड़े आदि। यहां तक कि, बड़े होने पर उसकी शादी का भी खर्च उठाएंगे। जिला जज की अदालत में दिए गये आवेदन में फैजान से स्पष्ट किया कि, उनका मकसद बच्ची को सिर्फ के सुरक्षित भविष्य देने का है। आवेदन में उन्होंने ये भी लिखा कि, वे अपनी आर्थिक क्षमता की भी जांच करवाने को तैयार हैं।
फैजान का तर्क
फैजान का तर्क है कि, वे नहीं चाहते कि माता-पिता द्वारा किए गए अपराध की सजा बच्ची भुगते। बच्ची का इन सब में क्या दोष है, वह तो निर्दोष है, उसे भी सामान्य जीवन जीने का अधिकार है। फैजान ने ये भी कहा कि, मुस्कान को हुई फांसी की सजा का असर बच्ची के जीवन पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका मकसद सिर्फ बच्ची के सुरक्षित भविष्य देना है।
फैजान ने शासकीय अधिवक्ता के के चौबे से मुलाकात कर बच्ची से जुड़ी सारी योजना विस्तार से बता दी है। इस दौरान उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि, उनकी ये पहल पूरी तरह मानवीय। समाज में जब कोई बच्चा अपराध की छाया पलता है, तो उसका पूरा जीवन प्रभावित हो जाता है। वे इस बच्ची को सिर्फ इस छाया से दूर रखना चाहते हैं।
ये सवाल हैं
यहां सवाल ये है कि, वे बच्ची को अपने परिवार के साथ अपने घर पर रखना चाहते हैं या सिर्फ आर्थिक मदद देकर उसकी जिम्मेदारी उठाना चाहते हैं, इस पर उनका कहना है कि, यह अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा। उनके खुद के दो बच्चे हैं एक बेटा और एक बेटी। फैजान ने कहा, वे अपनी क्षमता के अनुसार ही इस जिम्मेदारी को निभाएंगे। उन्होंने अदालत को अपनी आर्थिक स्थिति से भी अवगत करा दिया है।
अभी कहां है बच्ची

इस बीच, बच्ची जेल में अपनी मां के साथ रह रही है। जेल में जन्मे बच्चे को छह साल की उम्र तक अपनी मां के साथ रहने का अधिकार होता है। इसके बाद बच्चे को किसी संस्था के हवाले कर दिया जाता है। मुस्कान को फांसी और बच्ची से जुड़े मामले पर जेल प्रशासन का कहना है कि, मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद तुरंत कोई परिवर्तन नहीं होता, क्योंकि अभी अपील का रास्ता खुला है।
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मुस्कान और साहिल सजा के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील कर सकते हैं या फिर राष्ट्रपति/ राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दायर कर सकते हैं। ऐसे में जब तक सब कुछ फाइनल नहीं हो जाता बच्ची अपनी मां के साथ रह सकती है, लेकिन उसके लिए कहीं न कहीं स्थायी व्यवस्था तो करनी हो होगी।
कौन हैं फैजान अंसारी
मुंबई के रहने वाले फैजान अंसारी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, इनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 10 लाख फलोअर्स हैं। इससे पहले वे अभिनेता सैफ अली पर हुए हमले के दौरान घायल हुए ऑटो चालक की मदद भी कर चुके हैं। हाल ही में टाइगर श्राफ पर हुए हमले में घायल एक पीड़ित की भी उन्होंने सहायता की है और अब वे मुस्कान की बेटी की जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आये हैं।
सामाजिक व्यवस्था पर सवाल
खैर फैजान की इस पहल ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। साथ ही सामजिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल ये है कि, जो माता-पिता अपराध करते हैं और उस अपराध के लिए उन्हें कोर्ट से सजा मिलती है, तो इसका खामियाजा उनके बच्चों को भुगतना पड़ता है। ऐसे बच्चों का पूरा भविष्य अन्धकार में चला जाता है। समाज में भी उन्हें हेय की दृष्टि से देखा जाता है।
बच्चों को एक ऐसे अपराध की सजा मिलती है, जो उन्होंने कभी की ही नहीं होती, या यूं कहे कि उन्हें उस अपराध का मतलब तक नहीं पता होता। फ़िलहाल, अब सबकी निगाहें अदालत के उस फैसले पर टिकी है, जो मुस्कान की बेटी का भविष्य तय करेगा। सवाल ये है कि, क्या अदालत फैजान की पेशकश को स्वीकार करेगी? बच्ची जेल से बाहर अन्य बच्चों की तरह सामान्य जीवन जी पायेगी?
सवाल ये भी है कि अगर अदालत फैजान की पेशकश को स्वीकार कर लेती है तो क्या वे इस जिम्मेदारी को लंबे समय तक निभा पाएंगे? सवाल इसके इतर और भी कई है जैसे- मुस्कान इस पर क्या फैसला लेंगी?, बच्ची फैजान के साथ कैसे रहेगी?, फैजान के घरवाले बच्ची को किस हद तक अपना पाएंगे?, लेकिन सभी के जवाब समय आने पर ही पता चलेंगे। हां इतना जरूर है कि, जो भी हुआ है उसमें बच्ची का कोई दोष नहीं है, तो उसे इसकी सजा भी नहीं मिलनी चाहिए। कुछ लोग फैजान की इस पहल की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे महज ध्यान आकर्षित करने का तरीका मान रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि, यही सच्ची संवेदना है।
ये है पूरा मामला
अब आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्या था वह अपराध जिसके लिए मुस्कान-साहिल को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। मार्च 2025 में तीन और चार मार्च की दरमियानी रात को मेरठ निवासी सौरभ राजपूत की बेहद ही निर्दयता से हत्या कर दी जाती है। उसके शरीर के तीन से चार टुकड़े किये जाते हैं और सीमेंट भरे ड्रम में डाल दिया जाता है। मर्चेंट नेवी के काम करने वाले सौरभ की हत्या का आरोप उनकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल पर लगा। इतना ही नहीं इस हत्याकांड के बाद दोनों शिमला घूमने चले गये। कई दिन बीत जाने के बाद जब ये राज खुला तो मेरठ में ही नहीं देश भर में सनसनी फ़ैल गई।
जेल में पैदा हुई थी बच्ची
जब मुस्कान को गिरफ्तार किया गया था, तब वह गर्भवती थी। 24 नवंबर 2025 को उसने जेल में ही एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम मन्नत उर्फ़ राधा रखा गया। अभी ये बेटी अपनी मां मुस्कान के साथ मेरठ की जेल में ही पल बढ़ रही है। मुस्कान की इससे पहले भी एक बेटी है पीहू, जो अभी सात साल की है, वह अपने नाना-नानी प्रमोद रस्तोगी और कविता रस्तोगी (मुस्कान के माता-पिता) के साथ रह रही है।

पीहू की कस्टडी को लेकर सौरभ राजपूत और मुस्कान के परिवार के बीच विवाद चल रहा है, लेकिन छोटी बेटी (जेल में पैदा हुई बेटी) राधा को अपनाने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामान्य जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि, अब फैजान अंसारी ने इस जिम्मेदारी को उठाने की पेशकश की है।
सामान्य जीवन जीने का अधिकार
फ़िलहाल, बच्ची का भविष्य अभी अंधकार में ही है। इस मामले पर अदालत क्या फैसला लेगी ये तो आने वाला समय ही बतायेगा, लेकिन समाज को इस पूरे मामले पर संवेदन शीलता से विचार करना चाहिए। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता किसी भी अपराध में जेल की सजा काट रहे हों या फांसी की सजा मिल चुकी हो, उन्हें भी सामान्य जीवन जीने का अधिकार होता है।
समाज को उन्हें उसी तरह से अपना चाहिए जैसे कि, सामान्य घर के बच्चे को अपनाया जाता है। समाज और सरकार को मिलकर ऐसे बच्चों को सुरक्षित भविष्य देना चाहिए। इसके लिए सरकारी योजनाएं, बाल कल्याण संगठन और व्यक्तिगत पहल सबको मिलकर काम करना होगा, जिस तरह से फैजान अंसारी ने इस मामले में पहल की है वह सराहनीय है, समाज के और भी लोगों को आगे आना चाहिए और माता-पिता के अपराध की सजा भुगत रहे बच्चों को अपनाना चाहिए और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहिए।
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