
लखनऊ। Investigation- Maha Kumbh Stampede: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में बीते 29 जनवरी को यानी मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई थी। वहीं, कई लोग घायल भी हो गये थे। इस घटना की चर्चा देश ही नहीं दुनिया भर में हुई थी, क्योंकि इस धार्मिक आयोजन में लाखों विदेशी भी शामिल हुए थे। इस घटना ने प्रदेश की योगी सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बताया था कि, इस हादसे में 37 लोगों की मौत हुई है, लेकिन अब बीबीसी की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आ रही है।
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मुआवजा तक नहीं मिला

जी हां बीबीसी ने इस मामले की गहन पड़ताल की, तो हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ। पड़ताल में पता चला है कि, इस भगदड़ में 37 नहीं बल्कि 82 लोगों की मौत हुई थी। इस खुलासे के बाद अब सरकारी दावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं। साथ ही महाकुंभ में हुई इस घटना की मौके पर कवरेज करने वाली मीडिया की ईमानदारी भी सवालों के घेरे में आ गई है। सवाल ये भी है कि, सरकार ने 37 लोगों की मौत की बात कही है, तो बाकी के मृतकों के परिवारों को मुआवजा तक नहीं मिला होगा।
25-25 लाख रुपए दिए
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि, प्रदेश की योगी सरकार ने इस त्रासदी को कैसे छिपाने की कोशिश की। बीबीसी की पड़ताल में ये भी सामने आया है कि, भगदड़ में जिन 37 लोगों की मौत की बात सरकार ने स्वीकारी, उनके परिजनों की 25-25 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी गई। वहीं 26 ऐसे में परिवारों की भी पता चला जिन्हें 5-5- लाख रुपए दिए गये, लेकिन मृतकों की सूची में इनका नाम नहीं शामिल किया गया।
सरकार ने अस्वीकारा

भगदड़ की घटना की पड़ताल करने निकली बीबीसी की टीम देश के 11 राज्यों में 50 जिलों तक पहुंची और सौ से अधिक परिवारों से मिली, जिनमें से अधिकतर लोगों ने बताया कि, इस भगदड़ में उन्होंने अपनों को खोया है। बीबीसी की मानें, तो उसके पास इस बात का पूरा सबूत है कि, महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में कम से कम 82 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। वहीं, जो परिवार अपनी बात को साबित करने के लिए पुख्ता सबूत नहीं दे पाए, बीबीसी ने उन्हें 82 लोगों की लिस्ट में शामिल भी नहीं किया है।
4 स्थानों पर हुई थी भगदड़
टीम ने ये भी पाया कि, मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में चार अलग-अलग स्थानों पर भगदड़ की घटना घटी थी, जिसमें कुल 82 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। ये आंकड़े केवल उन मामलों पर आधारित हैं, जिसके पुख़्ता सबूत हैं। हालांकि, कुछ स्थानीय लोग मरने वालों की संख्या 100 से ज्यादा बता रहे थे, लेकिन यूपी सरकार ने इस संख्या को कभी स्वीकार नहीं किया।
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विधानसभा में बोले सीएम

हादसे के बाद 19 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि, 29 जनवरी की रात 1:10 से 1:30 बजे के बीच महाकुंभ में संगम नोज़ के पास हुई भगदड़ की चपेट में 66 लोग आये थे, जिनमें से 30 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा अन्य स्थानों पर हुई घटनाओं में 7 और लोगों की जान गई थी। कुल मिलाकर सरकार ने इस हादसे में 37 मौतों की बात स्वीकार की थी और मृतकों के परिजनों को बतौर आर्थिक सहायता 25-25 लाख रुपए मुआवज़ा देने का ऐलान किया था।
अपर्याप्त थी भीड़ प्रबन्धन की व्यवस्था

इस दौरान सीएम ने महाकुंभ में किसी भी तरह की अव्यवस्था की बात को मानने से इनकार कर दिया था, जबकि सच ये है कि, स्नान करने के लिए संगम तट की तरफ बढ़ रही भीड़ ने नदी किनारे सो रहे श्रद्धालुओं को कुचला था, जिससे भगदड़ मच गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों का भी कहना था कि, पुलिस और आयोजकों ने भीड़ प्रबंधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की थी, जिससे ये दर्दनाक हादसा हो गया।
10 करोड़ श्रद्धालु मौजूद थे संगम तट पर
आपको बता दें कि, महाकुंभ मेला सनातन धर्म का सबसे बड़ा आयोजन है। ये हर 12 में प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में लगता है। इसमें देश भर से ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं। इस साल ये उत्तर प्रदेश प्रयागराज में संगम पर 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक लगा था। इस मेले में 40 करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने का अनुमान लगाया था, लेकिन सरकार ने बताया कि, इस मेले में 66 करोड़ से अधिक लोग पहुंचे। मौनी अमावस्या का दिन इस मेले का सबसे अहम दिन माना जाता है, जो 29 जनवरी को पड़ी थी। दावा है कि, इस दिन करीब 10 करोड श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने के लिए संगम तट पर पहुंचे थे।
भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकी पुलिस

रिपोर्ट में ये भी पता चला है कि, संगम तट पर पहुंची इस 10 करोड़ की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आयोजकों और प्रशासन द्वारा किये गये इंतजाम नाकाफी थे। कई श्रद्धालुओं के आरोप लगाया कि, संगम तट पर पर्याप्त जगह नहीं थी। बावजूद इसके पुलिस ने भीड़ को कंट्रोल में करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि, बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश कर रहे श्रद्धालुओं को भी पुलिस रोकने में विफल रही, जो इस भगदड़ की मुख्य वजह बनी।
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