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Sai College: रूढ़ियों पर तीखा प्रहार करता है प्रेमचंद का कथा साहित्य

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  • जातिगत भेद और अन्याय को उजागर करती हैं प्रेमचंद की कहानियां
  • साई कॉलेज में गोस्वामी तुलसीदास के काव्य और उपन्यास सम्राट के साहित्य पर हुआ विमर्श

अम्बिकापुर। Sai College: प्रेमचंद की साहित्य साधना समाज को हमेशा बल देती है। उनकी कहानियां में सामाजिक रूढ़ियों पर तीखा प्रहार होता है, तो तीसरी दुनिया का निर्माण भी है। यह बातें श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरूवार को प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष्य पर प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही। उन्होंने कहा, प्रेमचंद की कहानियां एक ओर जहां समाधान देती हैं तो दूसरी ओर जातिगत भेद, अन्याय को उजागर करती हैं। उनकी कहानियां, उपन्यास आज भी प्रासंगिक हैं जो रिश्तों में देखे जा सकते हैं।

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इससे पहले अतिथियों ने कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिला कमांडेंट नगर सेना एस.के. कठोतिया ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियां में जीवन की जिजीविषा है। इसमें लोक जीवन के साथ लोकमंगल है।

गोस्वामी तुलसीदास का किया स्मरण

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कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कला एवं समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. आर.एन. शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद उस दौर के लेखक हैं जिस दौर में सच और यथार्थ लिखना कठिन था। उन्होंने विरोध, प्रतिबंध के बावजूद निर्मला, गोदान, गबन जैसी कालजयी उपन्यासों को लिखा। डॉ. शर्मा ने कहा कि साहित्य को जानना, समझना है तो प्रेमचंद को पढ़ना होगा। उन्होंने धर्म और आध्यात्म की नींव रखने वाले गोस्वामी तुलसीदास का स्मरण किया और उनके काव्य से अवगत कराया।

प्रेमचंद के संस्मरण सुनाएं 

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कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार तिवारी ने कहा कि यथार्थ, आदर्शोन्मुख यथार्थ और नग्न यथार्थ तीनो प्रेमचंद के कथा साहित्य में देखा जा सकता है। उन्होंने मानसरोवर की 300 कहानियां में जीवन और समाज की सचाइयों को फलक पर लाया है। इस दौरान काशी के अक्खड़, फक्कड़, घुमक्कड़ में पले प्रेमचंद के संस्मरण भी सुनाये गए।

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कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक देवेंद दास सोनवानी तथा आभार कृष्णाराम चौहान ने प्रकट किया। इस दौरान कम्प्यूटर एवं आईटी के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, वाणिज्य एवं प्रबंध विभाग के अध्यक्ष राकेश कुमार सेन तथा सभी प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

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