
नई दिल्ली। Lalit Modi Passport: भारत से भगोड़ा घोषित ललित मोदी को बड़ा झटका लगा है। वानूआतु के प्रधानमंत्री जोथम नापत ने तत्काल प्रभाव से उसका पासपोर्ट रद्द करने का आदेश दिया है। पीएम जोथम नापत ने कहा है कि, मैंने नागरिकता आयोग को निर्देश दिया है कि वह ललित मोदी का वानूआतु का पासपोर्ट तुरंत रद्द करें। दरअसल, ललित मोदी ने बीते सात मार्च को लन्दन स्थित भारतीय दूतावास में अपना इंडियन पासपोर्ट जमा करने का आवेदन किया था।
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वानूआतू के पीएम ने लिया फैसला

बताया जा रहा यह कि, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व संस्थापक और भारत के भगोड़े ललित मोदी ने प्रशांत महासागर के स्थित एक द्वीपीय देश वानूआतु का गोल्डन पासपोर्ट प्राप्त कर लिया है यानी कि उसने वहां कि नागरिकता हासिल कर ली है। हालांकि, अब खबर आ रही है कि वानूआतू के प्रधानमंत्री जोथम नापत ने नागरिकता आयोग को ललित मोदी के पासपोर्ट को रद्द करने का निर्देश दिया है। आइए जानते वह घटनाक्रम जिसकी वजह इस भारतीय भगोड़े का वानूआतु का पासपोर्ट हासिल किया और अब रद्द किया जा रहा है।
विदेश मंत्री के इशारे पर हुआ खेल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ललित मोदी का वानूआतु का पासपोर्ट रद्द कराने में न्यूजीलैंड में भारत की उच्चायुक्त नीता भूषण ने कुछ अन्य द्वीपीय देशों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इन दिनों लंदन की यात्रा पर है। ऐसे में ये भी हो सकता है कि ये सब उनके इशारे पर किया गया हो क्योंकि, भारत सरकर ये बिलकुल भी नहीं चाहेगी कि, अरबों के घोटाले के इस आरोपी को किसी ऐसे देश की नागिरकता मिल जाये, जहां से उसे लाना असंभव हो जाये।
जोथम नापत ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि, ललित मोदी का पासपोर्ट करने का आदेश देने से पहले वानूआतू के प्रधानमंत्री जोथम नापत ने एक हाई लेवल मीटिंग की, जिसके बाद उसका पासपोर्ट रद्द किये जाने का फैसला हुआ। वनुआतू सरकार का कहना है कि, उन्हें ललित मोदी के कारनामों की जानकारी नहीं थी, इसलिए उसे नागरिकता दी गई, लेकिन अब उन्हें उसके कारनामों का पता चल चुका है, इसलिए उसका पासपोर्ट रद्द किया जा रहा है। जोथम सरकार के इस आदेश के बाद ललित मोदी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ये भी कहा जा रहा है कि, वानूआतू के गोल्डन पासपोर्ट कार्यक्रम पर ललित मोदी की वजह से बुरा असर पड़ने की आशंका थी। यूरोप जैसे देश वानूआतू के खिलाफ एक्शन ले सकते थे।
इन वजहों से ली थी वानूआतु की नागरिकता

यहां सवाल ये है कि, ललित मोदी ने नागरिकता के लिए आखिर वानूआतु को ही क्यों चुना, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। पहला, भारतीय कानून एजेंसियां उसे वहां से नहीं ला सकती हैं। दूसरा, वहां का गोल्डन पासपोर्ट कार्यक्रम, जो बेहद पॉपुलर है, ये पासपोर्ट पैसा देकर ख़रीदा जा सकता है। तीसरा, वानूआतू में स्थानीय नागरिकों को कोई व्यक्तिगत कर नहीं देना पड़ता है यानी आप जो भी आय कमाते हैं, चाहे वह स्थानीय स्तर हो या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह टैक्सेशन से पूरी तरह मुक्त है। वानूआतु ने न तो विरासत कर है और न ही कॉर्पोरेट कर। यानी कि अगर किसी व्यक्ति का कारोबार वानूआतू में रजिस्टर्ड है, लेकिन अगर वह देश के बाहर से आय अर्जित कर रहा है, तो उसे उस आय पर भी कर नहीं देना होता।
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एक करोड़ में मिलती है नागरिकता

बता दें कि, वानूआतू एक इन्वेस्टमेंट कार्यक्रम के अंतर्गत अपनी नागरिकता सेल करता है। लगभग 1 करोड़ रुपए खर्च करके इस देश की नागरिकता आसानी से प्राप्त की जा सकती है। इस कार्यक्रम के तहत पैसा जमा करने के 1 हफ्ते के अंदर आप वहां के नागरिक बन सकते हैं। इसके अलावा यहां दोहरी नागरिकता का भी प्रावधान है। इसके साथ ही वानूआतू के पासपोर्ट की एक खासियत ये भी है कि उसके पासपोर्ट पर 55 देश वीजा फ्री एक्सेस देते हैं जबकि 34 देश वीजा ऑन अराइवल की सुविधा प्रदान करते हैं। टैक्स हेवन देश होने की वजह से पिछले कुछ समय से यहां की नागरिकता लेने का चलन भी बढ़ा है। वानूआतू का नागरिक बनने के लिए इस देश में रहना भी जरूरी नहीं है, आप कहीं भी रह कर यहां की नागरिकता खरीद सकते हैं।
खुशहाल देशों में होती है गिनती

दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित वानूआतु 82 द्वीपों से बना एक द्वीपसमूह है, यहां की केवल 65% क्षेत्र पर ही आबादी है। इसकी राजधानी पोर्ट विला है, जो यहां का सबसे बड़ा शहर भी है और ये इफेट द्वीप पर स्थित है। वानुआतु ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और न्यूजीलैंड के उत्तर में या ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच में स्थित है। इसकी गिनती छोटे, लेकिन खुशहाल देशों में होती है। इस द्वीपीय देश का मुख्य कारोबार खेती बाड़ी और पर्यटन है। यहां की अधिकांश आबादी खेती-किसानी करती है। वहीं जरूरी विदेशी मुद्रा पर्यटन से आती है। वानूआतू को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र की प्रवाल भित्तियों की खोज करने के इच्छुक गोताखोरों के लिए छुटियां बिताने वाले प्रमुख डेस्टिनेशन में से एक माना जाता है।
4, 000 साल पहले बसनी शुरू हुई थी आबादी

कहा जाता है कि, वानूआतू पर 4, 000 साल पहले आबादी बसनी शुरू हुई थी। यहां सबसे पहले मेलानेशियाई लोग आकर बसे थे। 1880 के दशक में फ्रांस और इंग्लैंड ने देश के कुछ हिस्सों पर अपना दावा किया। इसके बाद साल 1906 में वे एक ब्रिटिश-फ्रांसीसी सहस्वामित्व के जरिये न्यू हेब्रिड्स के रूप में इस द्वीपसमूह के संयुक्त प्रबंधन के एक ढांचे पर सहमत हुए। साल 1970 के दशक में हुए स्वतंत्रता आंदोलन के बाद 1980 में इसे गणराज्य का दर्जा दिया गया।
विदेश मंत्रालय का बयान
ललित मोदी के पासपोर्ट मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है कि, ‘ ललित मोदी ने लंदन स्थित भारतीय दूतावास में अपना पासपोर्ट जमा करने के लिए आवेदन किया है, जिसकी जांच मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं के तहत की जाएगी। हमें ये भी पता चला है कि उसने वानूआतू की नागरिकता प्राप्त कर ली है। हालांकि, हम कानून के तहत उसके खिलाफ मामला आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।’ ललित मोदी साल 2010 में भारत से भागा और तब से वह लंदन में रह रहा है।
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