
नई दिल्ली। Modi-Trump Friendship: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। जब भी भारत-अमेरिका के संबंधों की बात होती है तो मोदी-ट्रंप की दोस्ती की बात होती है। मोदी ने बताया कि, कैसे उनकी पहली मुलाकात के दौरान ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया था और “हाउडी मोदी” कार्यक्रम में बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान दिए भीड़ के साथ चल पड़े थे। पीएम मोदी ने ये बातें लेक्स फ्रीडमैन के पॉडकास्ट में बताई। आइए जानते हैं अमेरिकी यूट्यूबर लेक्स फ्रीडमैन के पॉडकास्ट में मोदी ने किन-किन अहम बातों का खुलासा किया।
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प्रोटोकॉल तोड़कर मिले थे

प्रधानमंत्री ने पॉडकास्ट में बताया कि, “जब मैं पहली बार व्हाइट हाउस गया, उस समय राष्ट्रपति ट्रंप के बारे में मीडिया में बहुत कुछ लिखा जा रहा था, वे तब नए थे और दुनिया उन्हें एक अलग नजरिए से देख रही थी। मुझे भी उनके बारे में कई तरह की जानकारी दी गई थी, लेकिन जब मैं व्हाइट हाउस पहुंचा, तो पहले ही मिनट में उन्होंने सभी प्रोटोकॉल की दीवारें तोड़ दी और भीड़ के साथ ही मुझसे मिलने आ गये।
सच्चे देशभक्त हैं हम दोनों
प्रधानमंत्री ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी गहरी मित्रता की सबसे बड़ी वजह यह है कि हम दोनों सच्चे देशभक्त हैं। मोदी ने बताया कि, जब वह ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस गए, तब उन्हें यह समझ में आया कि ट्रंप के मन में अमेरिका और उसके संस्थानों के प्रति कितना सम्मान है। उन्होंने कहा, जब मैं ट्रंप व्हाइट हाउस में टहल रहा था, तो मैंने देखा कि उनके हाथ में कोई कागज या नोट्स नहीं थ और न ही उनके साथ कोई सहायक ही था।
देश के प्रति है सम्मान की भावना

वे व्हाइट हाउस में मुझे बता रहे थे कि, अब्राहम लिंकन यहां रहते थे, यह कोर्ट इतना लंबा क्यों है और इस टेबल पर किस राष्ट्रपति ने सिग्नेचर किया था। मोदी ने कहा, ट्रंप ये सभी जानकारी मुझे तारीखों के साथ दे रहे थे। यह मेरे लिए बहुत प्रभावशाली था कि वे संस्थानों को कितना सम्मान देते हैं। अमेरिका के इतिहास के प्रति उनका कितना लगाव और सम्मान है, उस वक्त मैं यही अनुभव कर रहा था। व्हाइट हाउस में वे मेरे साथ खुलकर बातचीत कर रहे थे। ये मेरी पहली मुलाकात का अनुभव था।’
हमेशा याद करते थे ट्रंप
मोदी ने बताया कि, जब डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के बाद चुनाव हार गए, तब भी वे उन्हें याद करते रहे। उन्होंने कहा, ‘मैंने देखा कि जब बाइडन ने चुनाव जीता, तो यह चार साल का समय था। हम दोनों को जानने वाला कोई व्यक्ति ट्रंप से मिलता था। इन तीन-चार सालों में, उन्होंने शायद 500 बार कहा होगा, ‘मोदी इज माय फ्रेंड। कॉनवे माय रिगार्ड्स’ (मोदी मेरे मित्र हैं। आप उन्हें मेरा नमस्कार दें)।”
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नीचे बैठकर सुना भाषण

प्रधानमंत्री मोदी ने ह्यूस्टन में हुए “हाउडी मोदी” कार्यक्रम का भी जिक्र किया और बताया कि, उनकी ट्रंप के साथ कैसी दोस्ती है। उन्होंने फ्रीडमैन से कहा, ‘मैं एक वाकया बताता हूं, जिससे आप समझ सकते हैं कि मैं किस बात की तरफ इशारा कर रहा हूं। हमारा ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम था, जहां पूरा स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था। इतने लोगों को एक जगह पर इकट्ठा करना अमेरिका में बड़ा काम है। खेल के मैदान में तो ठीक है, लेकिन राजनीतिक रैली में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का होना महत्वपूर्ण है। भारतीय समुदाय के लोग वहां आए थे और हम दोनों ने उन्हें संबोधित किया। तब भी ट्रंप नीचे बैठकर सुन रहे थे, जो उनकी महानता को दर्शाता है। अमेरिका का राष्ट्रपति स्टेडियम में बैठकर मेरी बात सुन रहा था, जबकि मैं मंच पर भाषण दे रहा था, यह उनकी बड़प्पन की निशानी है।
मेरे साथ लगाया स्टेडियम का चक्कर
पीएम ने बताया कि, उन्होंने इस बात के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का शुक्रिया भी किया। उन्होंने कहा, ‘मैं अपना संबोधन खत्म करके नीचे गया। हमें तो पता है कि अमेरिका की सिक्यॉरिटी की कितनी बड़ी और कितनी सख्त है, कितने प्रकार की स्क्रूटीन होती है। बावजूद इसके, राष्ट्रपति ट्रंप वहां रुके, इसके लिए उनका धन्यवाद करने गया। वहां, मैंने उनसे ऐसे ही कहा- अगर आपको दिक्कत न हो तो आइए हम दोनों जरा पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाकर आते हैं। इतने लोग जमा हैं, तो हाथ ऊपर करके सबको नमस्कार करके आएंगे।’ इस पर, राष्ट्रपति ट्रंप बिना कुछ सोचे मेरे साथ चल पड़े।
परेशान हो गया था सुरक्षा तंत्र

मोदी ने कहा, ‘अमेरिका में ये लगभग असंभव है कि हजारों की भीड़ के बीच अमेरिकन राष्ट्रपति चल रहे हैं। हालांकि उनके इस कदम से अमेरिका का जो सुरक्षा तंत्र था, एकदम से परेशान हो गया था, लेकिन उनका ये कदम मेरे दिल को यह छू गया कि इस व्यक्ति में कितनी हिम्मत है। ये डिसीजन खुद लेते हैं और दूसरा ये कि मोदी पर उनको भरोसा है- मोदी ले जा रहा है तो चलिए चलते हैं।’
हजारों की भीड़ में मेरे साथ टहले
पीएम मोदी ने ट्रंप के इस रुख को भी आपसी विश्वास का प्रतीक बताया, जिसमें वह दोनों अपने-अपने देश के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए आतुर रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘यह आपसी विश्वास का भाव, हमारे बीच रिश्ते में ऐसी मजबूती मैंने उसी दिन देखी। मैंने उस दिन देखा कि कैसे बिना सिक्यॉरिटी वालों को पूछे वे मेरे साथ हजारों लोगों के बीच चल पड़े थे और उनके चेहरे पर कोई भी तनाव नहीं था।
वे अमेरिका में और मैं भारत में फर्स्ट

उन्होंने, आप उनका वह वीडियो देखेंगे तो आपको आश्चर्य होगा और इस चुनाव कैंपेन में जब उन पर गोली चली थी, तो मुझे वही राष्ट्रपति ट्रंप नजर आए। उस स्टेडियम में मेरा हाथ पकड़कर चलने वाले ट्रंप। गोली लगने के बाद भी अमेरिका के लिए जीना, अमेरिका के लिए ही जिंदगी यह जो उनका रिफ्लेक्शन था वह हैरान करने वाला था क्योंकि मैं नेशन फर्स्ट वाला हूं। वो अमेरिका फर्स्ट वाले हैं, मैं भारत फर्स्ट वाला हूं, तो हमारी जोड़ी बराबर जम जाती है। हम एक-दूसरे के विचारों का सम्मान भी करते हैं।
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