
ट्रंप के निशाने पर चीन

वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे चीन-अमेरिका

चीन के खिलाफ कड़े फैसले ले रहे ट्रंप
- चीन वर्षों से अमेरिका के व्यापार घाटे को बढ़ा रहा है, बौद्धिक संपदा की चोरी कर रहा है और अब वह डॉलर की जगह युआन को वैश्विक मुद्रा बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। यही वजह है कि, ट्रंप चीन के खिलाफ एक के बाद एक कड़े फैसले ले रहे हैं।
- ट्रंप ने चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील और ऑटोमोबाइल पर भारी टैरिफ लगा दिया है।
- अमेरिकी कंपनियों को चीन से अपना उत्पादन भारत, वियतनाम या अमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- ट्रंप के बयानों को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने “आर्थिक ब्लैकमेल” करार दिया है और कहा है कि “अगर अमेरिका व्यापार युद्ध चाहता है, तो हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन समस्या यह है कि चीन अब 2018-19 स्थिति में नहीं है।
- उसकी रियल एस्टेट अर्थव्यवस्था डूब रही है (एवरग्रांडे, कंट्री गार्डन का पतन हो रहा है)
- चीन में बेरोजगारी का प्रतिशत 21% से ऊपर चला गया है।
- अमेरिकी कंपनियों के हटने से चाइना का मैन्युफैक्चरिंग हब कमजोर होगा।
- युआन की स्थिति कमजोर हो रही है, जिसका असर वैश्विक लेन-देन पर पड़ रहा है। फिलहाल, ट्रंप दुनिया को ये संदेश देने में सफल रहे हैं कि चीन विश्वसनीय गंतव्य नहीं हो सकता।
- ASML, TSMC, NVIDIA जैसी कंपनियों पर चीन के साथ तकनीकी साझेदारी तोड़ने का दबाव है।
- क्वांटम कंप्यूटिंग और AI डोमेन में चीन को पीछे रखने के लिए रिसर्च फंडिंग में बढ़ोतरी की गई है।
जिनपिंग को झुकाना चाहते हैं ट्रंप

ट्रंप ये अच्छी तरह से जानते हैं कि, यह आर्थिक युद्ध ही है, जो अमेरिका की महाशक्ति की स्थिति को बनाए रखेगा या नष्ट कर देगा। यही कारण है कि उन्होंने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध शुरू किया है। उनका मकसद चीन की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है। इसके साथ ही अगर शी जिनपिंग अमेरिकी चालों के आगे झुकते हैं, तो उनकी मजबूत नेता वाली छवि पर असर पड़ेगा और हो सकता है कि वे अपना तीसरा कार्यकाल गंवा बैठें। हालांकि, चीन ने अब तक अमेरिकी टैरिफ का जवाब टैरिफ से दिया है, लेकिन कहा जा रहा है कि, चीन को ट्रंप के आगे झुकना ही पड़ेगा।
भारत की तरफ रुख कर रहीं अमेरिकी कंपनियां

हालांकि, ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ कई चीन समर्थित वैश्विक मीडिया हाउस में नकारात्मक प्रचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी संसद में ट्रंप को कमजोर करना है, लेकिन दुनिया भर के कई न्यूज चैनलों ने उनके टैरिफ ब्रेक को उनके विपरीत रास्ते के रूप में पेश किया है। लेकिन सच ये है कि, ट्रंप का टैरिफ युद्ध एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। साथ ही ये भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ उठाए गये कदम का ही नतीजा है कि एप्पल, सैमसंग, डेल और एचपी जैसी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। भारत-अमेरिका तकनीकी व्यापार समझौते के तहत अनुसंधान और विकास को साझा किया जा रहा है। भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण में विशेष प्रोत्साहन मिल रहा है।
भारत पर लगाया 26 फीसदी टैरिफ

आसान नहीं है लड़ाई










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