
इस्लामाबाद। Kulbhushan Jadhav: क्या शाहबाज सरकार पाकिस्तान की इस्लामाबाद जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को फांसी देने की योजना बना रही है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि हैं क्योंकि सरकार ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि, कुलभूषण जाधव को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार नहीं दिया गया है जबकि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने पाकिस्तान सरकार को आदेश दिया था कि, वह कुलभूषण जाधव को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार दे।
ICJ के फैसले को नहीं मान रही पाक सरकार

दरअसल, पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने विरोध प्रदर्शन करने पर इमरान खान के कई समर्थकों को सजा सुनाई है, जिसके बाद इमरान खान के समर्थक ऊपरी अदालत पहुंच गए और उनके वकील ने दलील दी कि, अगर कुलभूषण जाधव सैन्य अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं, तो कोई पाकिस्तानी नागरिक क्यों नहीं? इसके बाद शाहबाज सरकार ने बताया है कि, कुलभूषण जाधव को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की भी इजाजत नहीं दी गई है। इसका मतलब साफ़ है कि, सरकार ICJ के फैसलों का उल्लंघन कर रही है।
पाकिस्तान की सरकार ने अदालत को बताया कि, कुलभूषण जाधव को सिर्फ काउंसलर एक्सेस दिया गया है, लेकिन ऐसा करके पाकिस्तान ने वियना कन्वेंशन का भी उल्लंघन किया है क्योंकि कुलभूषण जाधव के संबंध में अपने फैसले में आईसीजे ने कहा है कि, उनकी सजा पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और सजा के संबंध में समीक्षा की जानी चाहिए।
सेना प्रमुख को भेजी गई है दया याचिका

दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके अब्दुल बासित ने कहा है कि ”पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव मामले को बार-बार गलत तरीके से हैंडल किया है।” उन्होंने कहा, ”हम आईसीजे में कुलभूषण जाधव का केस हार गए हैं, लेकिन मेरा सवाल यह है कि, हमें आईसीजे जाने की क्या जरूरत थी?”
उन्होंने कहा, ”जब पाकिस्तान ने पहले ही तय कर लिया था कि, आईसीजे के फैसले हम पर लागू नहीं हो सकते, तो कुलभूषण जाधव के मामले को लेकर आईसीजे जाने की जरूरत ही नहीं थी और दूसरी बात यह कि आईसीजे में केस लड़ने वाले भी अक्षम थे। वे केस नहीं लड़ पाए और हार गए।” उन्होंने कहा, ”कुलभूषण जाधव के बारे में ताजा अपडेट यह है कि, उन्होंने सेना प्रमुख को दया याचिका भेजी है। ऐसे में जब तक सेना प्रमुख कोई फैसला नहीं लेते हैं, हमें नहीं पता कि क्या होने वाला है।”
खुद का वकील रखा चाहता है भारत

अब्दुल बासित का कहना है कि “कुलभूषण जाधव ने पाकिस्तान में बहुत उत्पात मचाया है। उन्होंने बलूचिस्तान और फाटा क्षेत्र में बहुत उत्पात मचाया है, इसलिए सेना प्रमुख को चाहिए कि वे उनकी दया याचिका को खारिज कर दें। अब्दुल बासित ने कहा कि “पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव के मामले की सुनवाई इस्लामाबाद हाई कोर्ट में करवाने की कोशिश की, लेकिन भारत ऐसा नहीं चाहता, भारत चाहता है कि, अगर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई होती है, तो जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए भारत से कोई वकील आए, वो पाकिस्तानी वकील के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि पाकिस्तान का कानून इसके खिलाफ है।
वहीं, भारत के कानून में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं हैं, लेकिन भारत अड़ा हुआ है। ऐसा करके भारत इस मामले में देरी करना चाहता है। अब्दुल बासित का कहना है कि “पाकिस्तान के लिए मामले में देरी करना जरूरी नहीं है, लेकिन चूंकि पाकिस्तान एक बार पहले ही सहमत हो चुका है, इसलिए भारत मामले में देरी कर रहा है।’
2016 में गिरफ्तार हुआ थे जाधव

बता दें कि, पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान का दावा है कि, उन्हें जासूसी और आतंकवाद के आरोप में 2016 में बलूचिस्तान से पकड़ा गया था। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि, कुलभूषण जाधव चाबहार पोर्ट पर काम कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI)के इशारे पर उनका अपहरण कर लिया गया था।
दरअसल, कुलभूषण जाधव पूर्व नौसेना अधिकारी हैं। भारत ने पाकिस्तान द्वारा उन्हें दी गई मौत की सजा के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में अपील की थी। ICJ ने अपने फैसले में कहा था कि, पाकिस्तान दोषसिद्धि और सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार किया बिना जाधव को फांसी न दें। साल 2020 में भारत ने आरोप लगाया था कि, पाकिस्तान ने वियना कन्वेंशन का उल्लंघन करते हुए ICJ के फैसले को “शब्दशः” लागू करने से मना कर दिया है।









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