
अमेरिका। US Intelligence Report: वैसे तो भारत के संबंध दुनिया के तमाम देशों से काफी अच्छे हैं, लेकिन पड़ोसी मुल्कों से उसके संबंध बिल्कुल भी ठीक हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन हमेशा भारत को नुकसान पहुंचाने की फ़िराक रहते हैं। पाकिस्तान जहां सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देकर भारत को अस्थिर करने में लगा रहता है। वहीं चीन, भारत की जमीनों को हथियाने की कोशिश में रहता है।
इसे भी पढ़ें- US-China Tariff Dispute: अमेरिका-चीन ने घटाए टैरिफ, आपसी टकराव पर लगा ब्रेक
सामरिक चुनौती पर चिंता

अब अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में कुछ ऐसी जानकारी सामने आई है, जो भारत के लिए बड़ा खतरा बना सकती है। इस अमेरिकी रिपोर्ट में चीन की विस्तारवादी नीति और भारत के लिए उसकी सामरिक चुनौती पर एक बार फिर से चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रक्षा नीति वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करने, चीन के साथ मुकाबला करने और देश की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित रहेगी। भारत चीन को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता है, जबकि पाकिस्तान को एक सीमित सुरक्षा समस्या के रूप में देखता है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है।
सैन्य अड्डे स्थापित करने का प्लान
रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन भारत के अन्य पड़ोसी मुल्कों जैसे कि बर्मा (म्यांमार), पाकिस्तान और श्रीलंका पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी की अपनी सेना के लिए के सैन्य अड्डे स्थापित करने का प्लान बना रहा है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि,अगर ऐसा हुआ, तो यह भारत के लिए एक गंभीर रणनीतिक खतरा साबित हो सकता है क्योंकि ये तीनों देश भारत की सीधी समुद्री और जमीनी सीमाओं से लगे हुए हैं। इसे ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। इस रणनीति की मदद से चीन हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में हैं।
बहुपक्षीय मंचों पर भी काफी एक्टिव है भारत

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की ये कोशिश उसकी अपनी वैश्विक सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की मंशा को दर्शाने वाली है, लेकिन यह भारत की सुरक्षा स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, मई 2024 में भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के मध्य सीमा पार से हुई गोलीबारी और हमलों के बावजूद, भारत की रणनीतिक सोच में चीन को एक बड़े खतरे के रूप देखा जा रहा है। यही वजह है कि, भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में त्रिपक्षीय भागीदारी भी बढ़ाई है। साथ ही क्वाड, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और आसियान जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी काफी एक्टिव है।
इसे भी पढ़ें- American F-16: अमेरिका के खिलाफ एक्शन में चीन, F-16 को बाजार से बाहर करने की बना रहा योजना
सीमा विवाद बरकरार
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, 2024 में अक्टूबर महीने के अंत में भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के दो विवादित क्षेत्रों से सैनिकों को वापस लेने पर सहमत हुए थे, जिसके बाद सीमा पर कुछ हद तक गतिरोध कम हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच सीमा विवाद अभी भी बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि, साल 2020 में इसी इलाके यानी कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसमें कई सैनिकों को जान गंवानी पड़ी थी। अप्रैल 2025 के अंत में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी शिविरों पर मिसाइल हमले किये, जिसमें सौ से अधिक आतंकियों की मौत भी हुई।
परमाणु हथियारों को आधुनिक बना रहा पाक
इसके बाद 7 से 10 मई के बीच दोनों देशों के बीच कई राउंड मिसाइल, ड्रोन और ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ (आत्मघाती ड्रोन) हमले और भारी गोलीबारी हुई। इन हमलों में पाकिस्तान का काफी नुकसान हुआ। हालांकि, 10 मई तक सीजफायर हो गया। अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, अब पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को तेजी से आधुनिक बनाने में जुटा हुआ है, क्योंकि वह भारत को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है। यह रणनीति पाकिस्तान की सैन्य सोच और सीमा पर उसकी आक्रामकता को दर्शाती है।
तनाव बढ़ाने वाली है नीति

रिपोर्ट में बताया गया है कि, पाकिस्तान अपनी आर्थिक और सैन्य उदारता के लिए चीन पर निर्भर है। वह इस समय चीन से मिले संसाधनों और उसकी ही तकनीकी सहायता से अपने सैन्य ढांचे को न सिर्फ मजबूत कर रहा है बल्कि अपनी परमाणु क्षमताओं को भी तेजी से बढ़ा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, चीन और पाकिस्तान की ये दोस्ती भारत के लिए सामरिक रूप से दोहरा खतरा पैदा करने वाली है। इस दोस्ती से भारत को एक तरफ एलएसी पर चीन का दबाव झेलना पड़ सकता है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की परमाणु और सीमा पार नीति तनाव बढ़ाने वाली है।
भारत जाहिर कर चुका है चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि, आने वाले वर्ष में क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ सीमा पार की झड़पें पाकिस्तानी सेना की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल होंगी। भारत के साथ सीमा पर तनाव, आतंकवाद संबंधी गतिविधियां और कश्मीर पर आक्रामक बयानबाजी इस नीति का हिस्सा हैं। खास तौर पर उल्लेखनीय है कि, भारत पहले भी कई मौकों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम उल्लंघन को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। भारत रूस के साथ अपने संबंधों को 2025 तक बनाए रखेगा, क्योंकि वह रूस को अपने आर्थिक और रक्षा हितों के लिए जरूरी मानता है।
‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा दे रही मोदी सरकार

रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार ने भले ही रूस से सैन्य उपकरणों की नई खरीद में कमी की है, लेकिन रूस में बने टैंकों और लड़ाकू विमानों का बड़ा स्टॉक बनाए रखने के लिए अभी भी भारत को रूस के सामानों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस सहयोग को चीन-रूस के करीबी संबंधों के संतुलन के तौर पर भी देखा जा रहा है। भारत इस साल घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला की चिंताओं को कम करने के लिए ‘मेड इन इंडिया’ पहल को भी बढ़ावा देगा। भारत ने 2024 में अपनी सैन्य क्षमताओं का आधुनिकीकरण जारी रखा। भारत ने अग्नि-1 प्राइम मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (एमआरबीएम) और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि-5 मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) का परीक्षण किया। इसके साथ ही भारत ने अपनी दूसरी परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी को भी नौसेना में शामिल किया, जिससे उसकी परमाणु तिकड़ी मजबूत हुई।
इसे भी पढ़ें- Japan Railgun: जापान ने किया इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन का परीक्षण, टेंशन में आए चीन-कोरिया






Users Today : 14

