
अमेरिका। US Tariffs Indian Solar Industry: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ का असर भारत पर पड़ने लगा है। यहां के कपड़ा, स्पोर्ट्स और लेदर उद्योग बुरी तरह से प्रभावित होने लगे हैं। अब एक और बुरी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि भारत की सोलर इंडस्ट्री पर भी बड़ा संकट आने वाला है। दरअसल, अमेरिका में भारत, लाओस और इंडोनेशिया से सौर पैनल आयात की जांच शुरू कर दी गई है। आशंका जताई जा रही है कि, अमेरिका सोलर पर भी भारी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। भारत के साथ ही अमेरिका लाओस और इंडोनेशिया पर भी नए टैरिफ लगा सकता है।
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प्रभावित हो सकता है व्यापार संबंध

इस जांच की वजह से भारत-अमेरिका के व्यापार संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोग (आईटीसी) ने शुक्रवार को एकमत होकर इस जांच को आगे बढ़ाने के लिए वोट किया। ये जांच इस लिए की जा रही है कि क्योंकि चीनी समर्थित कंपनियां मौजूदा शुल्कों से बचने और अमेरिकी बाजार में सस्ते सोलर पैनल की बाढ़ लाने के लिए इन देशों का इस्तेमाल कर रही हैं।
अरबों डॉलर के निवेश पर खतरा
रिपोर्ट है कि, चीन के सोलर पैनल पहले भारत आ रहे हैं फिर इन्हें यहां से अमेरिकी मार्केट में भेजा जा रहा है। आईटीसी का निर्णय प्रक्रियात्मक लेकिन अहम है। यूएस की इस जांच का फायदा अमेरिकी सोलर पैनल निर्माण कंपनियों को मिलेगा, जो ये तर्क देती हैं कि, भारत और अन्य देशों से सोलर के सस्ते आयात से घरेलू उत्पादन को नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा में अरबों डॉलर के निवेश पर भी खतरा मंडरा रहा है।
सिस्टम का इस्तेमाल कर रहीं चीनी कंपनियां

मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि, अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड गठबंधन के प्रमुख वकील टिम ब्राइटबिल का कहना है कि- ‘वर्तमान का आईटीसी निर्णय हमारी याचिकाओं में किए गए दावों की पुष्टि करता है।” उन्होंने कहा- “चीनी स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ ही अन्य कंपनियां लाओस, इंडोनेशिया और भारत में अनुचित प्रथाओं के साथ सिस्टम इस्तेमाल कर रही है, जिससे अमेरिका में नौकरियां और निवेश दोनों खतरे में हैं।
बढ़ा आयात
ये मामला बीते जुलाई महीने में फर्स्ट सोलर और क्यूसेल्स जैसी प्रमुख सौर कंपनियों ने मिलकर दायर किया था। याचिका में उन्होंने जो डेटा दिया था, उसके अनुसार, 2023 में इन तीनों देशों से आयात बढ़कर 1.6 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। पिछले वर्ष ये आंकड़ा 289 मिलियन डॉलर था। माना जाता है कि, इसमें से अधिकांश आयात उन देशों से हो रहा है जो पहले से ही अमेरिकी शुल्कों का सामना कर रहे हैं।
अमेरिकी व्यापार कानूनों का उल्लंघन
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि, भारत और अन्य देशों में काम कर रहीं चीनी कंपनियां अमेरिकी व्यापार कानूनों का उल्लंघन करती हैं और सरकारी सब्सिडी प्राप्त करती हैं और उत्पादन लागत से कम दाम पर अपने उत्पाद बेचती हैं। हालांकि, जांच भारत, लाओस और इंडोनेशिया तीनों देशों पर केंद्रित है। बता दें कि, भारत का पहले से ही विभिन्न शुल्कों और वीज़ा प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका के साथ मतभेद चल रहा है और अब अपने तेज़ी से बढ़ते सौर निर्यात क्षेत्र पर संभावित प्रभाव का सामना कर रहा है। वाणिज्य विभाग अब अपनी समानांतर जांच करेगा, जिसमें सब्सिडी-रोधी शुल्कों पर प्रारंभिक निर्णय 10 अक्टूबर तक और डंपिंग-रोधी निर्धारण 24 दिसंबर तक आने की उम्मीद है।
व्यापार गतिशीलता पर पड़ेगा असर

इस जांच के जो भी नतीजे आएंगे वे अमेरिकी सोलर डेवलपर्स की सोर्सिंग रणनीतियों को नया रूप दे सकते हैं, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में व्यापार गतिशीलता पर भी असर पड़ सकता है। भारत के लिए, यह जांच ऐसे समय में आई है जब वह “मेक इन इंडिया” पहल के तहत सौर विनिर्माण में वैश्विक निवेश को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है।
तेजी से बढ़ा भारतीय बाजार
बता दें कि, भारत कि सौर पैनल इंडस्ट्री में हाल के वर्षों में काफी उछाल आया है। यह देश की अक्षय ऊर्जा नीतियों की वजह से इंटरनेशनल स्तर पर एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है। साल 2018 में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 22 गीगावाट थी, जो 2022 में 61 गीगावाट हो गई थी। इसके बाद 2023 में भारत में सौर पैनल उद्योग का बाजार लगभग 1.6 अरब डॉलर के आयात के साथ उल्लेखनीय रूप से बढ़ा, जिसमें से काफी हिस्सा भारत, लाओस और इंडोनेशिया जैसे देशों से आया।

टाटा, अदानी सोलर और लूम सोलर जैसी अग्रणी कंपनियों ने घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए 10W से 730W तक के सौर पैनलों के उत्पादन में योगदान दिया है, जिससे भारत सौर ऊर्जा उत्पादन में वैश्विक अग्रणी बनने की ओर अग्रसर है।
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