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Farmer Protest: पुलिस ने उजाड़े किसानों के टेंट, खाली कराया शंभू और खनौरी बॉर्डर

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Kisan Andolan

चंडीगढ़। Farmer Protest: शंभू बार्डर और खनौरी बॉर्डर पर एक साल से अधिक समय से धरने पर बैठे किसानों को पंजाब पुलिस ने हटा दिया है। पुलिस ने किसानों के बनाए अस्थायी ढांचों को भी बुलडोजर से ढहा दिया है। इससे पहले पुलिस ने जगजीत सिंह डल्लेवाल और किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंढेर समेत कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। पंजाब सरकार की इस कार्रवाई पर अब राजनीति शुरू हो गई है। विपक्ष ने इसका विरोध किया है।

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खोलना चाहते हैं बॉर्डर

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गौरतलब है कि, फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य समेत कई मांगों को लेकर किसान लंबे समय से आंदोलनरत हैं । किसानों ने कई बार दिल्ली के अंदर भी प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन हर बार असफल रहे। किसानों की हटाये जाने को लेकर पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार अब शंभू और खनौरी बॉर्डर को खोलना चाहती है इसलिए यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा, किसानों की मांगे केंद्र सरकार से है इसलिए उन्हें दिल्ली या फिर कहीं और जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।

दिल्ली में धरना प्रदर्शन करें किसान 

चीमा ने आगे कहा, आम आदमी पार्टी की भगवंत मान की सरकार और पंजाब के लोग किसानों के साथ तब खड़े थे, जब उन्होंने तीन काले कानूनों के खिलाफ विरोध किया था। किसानों की धरने की वजह से शंभू और खनौरी बॉर्डर एक साल से अधिक समय से बंद है, जिसका असर पंजाब के व्यापारियों और युवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, जब व्यापार बढ़ेगा, तो युवाओं को रोजगार मिलेगा और वे नशे से दूर रहेंगे। चीमा का कहना है कि हम चाहते हैं कि पंजाब के युवाओं को रोजगार मिले और वे खुशहाल जीवन जिए। किसानों को पंजाब की सड़कों को अवरुद्ध नहीं करना चाहिए, उन्हें दिल्ली या कहीं और विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।

किसानों को अलग-थलग करना चाहती है सरकार

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पंजाब सरकार की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा, केंद्र और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार किसानों को अलग-थलग करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, किसानों को लगातार धोखा दिया जा रहा है। पहले उनसे कहा  गया कि वे अपनी भूख हड़ताल समाप्त करें और फिर उनसे बात की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  केंद्र सरकार किसानों को, खासकर पंजाब के किसानों को  हमेशा अलग -थलग करने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा, किसानों और केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक समाप्त होने के तुरंत पंजाब पुलिस ने किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। ये पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की तीखी आलोचना की।

भगवंत मान ने किसानों को दिया धोखा

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शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा, ऐसा लगता है पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं, तभी वे किसानों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा, चुनाव के दौरान भगवंत मान ने किसानों से वादा किया था कि वे उनकी सभी मांगों को पूरा करेंगे, लेकिन सीएम बनते ही वे अपने अभी वादे भूल गये। उन्होंने कहा, पंजाब की पुलिस ने जगजीत सिंह डल्लेवाल जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे, उन्हें भी हिरासत में ले लिया है। ये बेहद गलत है।

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने की सीएम की निंदा

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री पर हमला बोला और किसानों के खिलाफ की गई पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने एक वीडियो में कहा, मैं पंजाब सरकार की इस कार्रवाई की निंदा करता हूं। किसानों ने आपको (AAP सरकार) वोट दिया और सत्ता में लाया है। पंजाब के CM भगवंत मान को शर्म आनी चाहिए। पंजाब के लोग अब  मुख्यमंत्री भगवंत मान को किसी भी गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे।

चार मई को होगी अलग बैठक

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बता दें कि, इससे पहले किसानों की अलग-अलग मांगों पर बातचीत करने के लिए चंडीगढ़ में किसान नेताओं और केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के बीच नये दौर की बैठक हुई, जो तीन घंटे तक चली। इस दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने किसानों के हितों को सर्वोपरि बताया। बैठक में शामिल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, वार्ता आगे भी जारी रहेगी और अगली बैठक चार मई को होगी।

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