
नई दिल्ली। Pahalgam Aatnki Hamla: पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कुछ सख्त कदम तो उठाए हैं, लेकिन ये नाकाफी। सर्जिकल स्ट्राइक से भी कुछ ख़ास असर नहीं पड़ने वाला। हालांकि, पाकिस्तान थोड़ा डरा जरूर है, तभी तो वह कहा रहा है कि, अगर भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की तो वह जवाब देगा।
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मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा पाकिस्तान

खबर ये भी है कि, पाकिस्तान एक मिसाइल का परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए उसने अधिसूचना जारी कर दी है। सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल का परीक्षण 24-25 अप्रैल को कराची तट पर किया जाना है। हालांकि, भारत की जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाएं हुए हैं। वहीं, खुफिया विभाग भी इस पर निगरानी रखे हुए है। पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कदमों को तब तक सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, जब तक कि वह आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने के लिए मजबूर न हो जाए।
सिन्धु जल समझौते पर लगी रोक

पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बता दें कि, यह पहली बार है जब भारत ने इस तरह की कोई बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। इससे पहले, भारत और पाकिस्तान के बीच तीन बड़े युद्ध हो चुके हैं, लेकिन भारत ने उसके खिलाफ इस तरह के बड़े फैसले कभी नहीं। इस बार भारत द्वारा लिए गये कड़े फैसलों से पाकिस्तान की चुनौतियां तो बढ़ेंगी, लेकिन सिर्फ इतने से पहलगाम का बदला पूरा नहीं होगा। भारत को पाकिस्तान के खिलाफ कुछ ऐसा करना होगा जिससे उसकी रीढ़ टूट जाये, जैसे कि, बड़े आर्थिक प्रतिबन्ध लगाना।
बक्शे नहीं जाएंगे आतंकी

हालांकि, सीसीएस की बैठक में साफ़ कहा गया कि, पहलगाम हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और जिस तरह 26/11 मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा को भारत लाया गया है, उसी तरह पहलगाम हमले के किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाएगा। इस हमले से जुड़े हर शक्स को चुन-चुन के मारा जायेगा। हालांकि इस बैठक में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ पांच बड़े और सख्त कदम उठाए हैं, जिसमें सिंधु जल संधि और अटारी सीमा से जुड़ा फैसला बेहद अहम है। जी हां, भारत ने पाकिस्तान के साथ साल 1960 में हुई सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निलंबन तब तक लागू रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता।
बंद हुआ अटारी चेक पोस्ट

बता दें कि, सिन्धु जल संधि पर नौ साल की बातचीत के बाद विश्व बैंक की मध्यस्थता से हस्ताक्षर हुआ था। इस संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री आयूब खान ने दस्तखत किये थे। इसके साथ ही भारत ने अटारी चेकपोस्ट को भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है और जो लोग वैध तरीके से भारत आए हैं, उन्हें 1 मई 2025 से पहले उसी रास्ते से वापस लौट जाने काफरमान जारी कर दिया है।
सऊदी अरब-युएई ने की हमले की निंदा

भारत के इन सख्त कदमों से निश्चित रूप से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेंगी, लेकिन सिर्फ इतने से वह सुधरने वाला नहीं है और न ही वह आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने वाला है। अब समय है कि, पाकिस्तान के खिलाफ और भी कुछ सख्त कदम उठाए जाएं। यह अच्छी बात है कि, सऊदी अरब और यूएई ने पहलगाम हमले की निंदा की है और इस दुःख की घड़ी में वे भारत के साथ खड़े होने की बात कर रह है, लेकिन सिर्फ साथ खड़े होने की बात करने से बात नहीं बनेगी। उन्हें भी पाकिस्तान के खिलाफ कुछ फैसला लेना चाहिए।
पाकिस्तान की नहीं मिल रही अहमियत
मालूम हो कि, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच काफी मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सऊदी अरब और पाकिस्तान के संबंध ऐसे थे कि, अप्रैल 2024 में जब शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे, तो सबसे पहले उन्होंने सऊदी अरब का ही दौरा किया था, लेकिन साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद पाकिस्तान को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में सऊदी अरब और यूएई से अपेक्षित मदद नहीं मिल पाई।
उस वक्त पाकिस्तान ने पूरी दुनिया में अनुच्छेद 370 पर समर्थन जुटाने की कोशिश की थी, लेकिन दुनिया का सबसे ताकतवर मुस्लिम देश सऊदी अरब भी इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश रहा। तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि, भारत, सऊदी और यूएई के साथ जो संबंध बने हैं, उनमें पाकिस्तान को पहले जैसी अहमियत नहीं मिल रही है। विशेषकर 2008 के मुंबई हमले के बाद सऊदी अरब और यूएई का पाकिस्तान के प्रति रवैया काफी बदल गया है।
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भारत-सऊदी अरब के बीच हुए 4 समझौते

पहलगाम हमले के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सऊदी अरब का दौरा बीच में ही छोड़कर लौटना पड़ा। मोदी का दौरा छोटा होने के बावजूद भारत और सऊदी अरब के बीच चार अहम समझौते हुए हैं। ये समझौते अंतरिक्ष और स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। साथ ही दोनों देश भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर भी सहमत हुए हैं। सऊदी अरब के साथ साझेदारी को मजबूत करने के लिए काम जारी रहना चाहिए, लेकिन अब भारत को पाकिस्तान को दी जा रही मदद और फंडिंग को रोकने के लिए और प्रयास करने चाहिए।
FATF की लिस्ट से बाहर हो चुका है पाकिस्तान
इससे पहले जब मई 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण के जवाब में पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण करना चाहता था, तो सऊदी अरब की मदद से उसका हौसला बढ़ा था। उस वक्त सऊदी अरब ने पाकिस्तान को हर दिन 50 हजार बैरल तेल मुफ्त देने का वादा किया था। उसी की बदौलत तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पश्चिमी देशों द्वारा लगाये गये आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करने में सक्षम हुए थे। ,इसके बाद अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट से बाहर आकर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगना चाहिए आर्थिक प्रतिबन्ध

कहा जाता है कि, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पाकिस्तान ने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाए थे, जो सिर्फ एक दिखावा जैसा था। अब पहलगाम हमला इसका सबसे बड़ा सबूत है। अब समय आ गया है कि, पाकिस्तान को अरब देश भी अपने से अलग कर दें। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगने चाहिए और ये प्रतिबंध तब तक लागू रहने चाहिए जब तक कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह से बंद न कर दें।









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