
जम्मू-कश्मीर। Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा बलों ने पूरे जम्मू-कश्मीर, खासकर दक्षिण कश्मीर में 1500 से ज्यादा संदिग्धों को दबोचा हुआ है। इनमें ओवर ग्राउंड वर्कर यानी जिन्होंने आतंकियों को रसद और पनाह दी। साथ ही आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे। दक्षिण कश्मीर में 250 से ज्यादा ओवर ग्राउंड वर्कर हिरासत में लिए गये हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने के वजह से स्थानीय लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया है।
पाकिस्तान से जुड़े हैं तार

बता दें कि, बीते 22 अप्रैल दिन मंगलवार को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच एनआईए कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, डिजिटल सबूतों से पता चल रहा है कि, इस हमले के तार पाकिस्तान के कराची और मुजफ्फराबाद के आतंकी ठिकानों से जुड़े हैं। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर आतंकी नेटवर्क, स्लीपर सेल और हमले में मदद करने वालों की पहचान की जा रही है। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है।
श्रीनगर से अतिरिक्त उड़ानें शुरू

हमले के बाद से पूरे जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट है। पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और रेलवे व बस स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। साथ ही भारतीय सेना की विक्टर फोर्स, स्पेशल फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बारामूला में सुरक्षा बलों को सफलता मिली है। चौकियों पर वाहनों की गहन जांच की जा रही है। पंजाब ने भी सीमा पर सुरक्षा सख्त कर दी गई है। इधर, श्रीनगर से अतिरिक्त उड़ानें शुरू कर दी गई हैं और पर्यटकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग को एकतरफा यातायात के लिए खोल दिया गया है।
पाकिस्तान के खिलाफ हुए 5 बड़े फैसले

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को सुरक्षा समीक्षा बैठक की। गृह मंत्री अमित शाह ने भी श्रीनगर पंहुच कर हालात की समीक्षा की और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को कई सख्त निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की ढाई घंटे चली बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ पांच बड़े फैसले लिए गए। इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए अजीत डोभाल शामिल रहे।
आईएसआई की भूमिका

इस हमले से पता चलता है कि, बैसरन घाटी जैसे दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा तैनाती अपर्याप्त थी। 5.5 किलोमीटर लंबे पहलगाम-बैसरन मार्ग पर एक भी पुलिस पिकेट है। आतंकियों ने पुलिस की वर्दी, एम4 कार्बाइन, एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से घटना को अंजाम दिया। इससे साफ़ समझ आ रहा है कि उनकी तैयारी के आईएसआई का पूरा हाथ है। चश्मदीदों की मानें तो आतंकियों ने पहले लोगों का धर्म पूछा और फिर उन्हें गोली मारी दी। एनआईए की जांच में पाकिस्तान समर्थित टीआरएफ और आईएसआई की भूमिका नजर आ रही है।
बढ़े ड्रोन और सेटेलाइट से निगरानी

ये हमला भारत के खुफिया तंत्र की विफलता को दर्शाता रहा है। इस हमले के बाद ऐसा लग रहा है कि, जम्मू कश्मीर के दूरदराज के इलाकों में ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी और अधिक बढ़ानी चाहिए। साथ ही स्थानीय खुफिया नेटवर्क को भी मजबूत करने की जरूरत है। यह हमला न केवल सुरक्षा के लिए चुनौती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा कर रहा है। पर्यटकों में डर और स्थानीय लोगों में अनिश्चितता के कारण क्षेत्र की छवि को नुकसान पहुंचा है।
पर्यटन उद्योग पर गहराया संकट
जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने तेजी से और बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है। हिरासत में लिए गए लोगों, तलाशी अभियान और उच्च स्तरीय बैठकों से सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का पता चलता है। हालांकि, दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा तैनाती की कमी और आतंकियों की नई रणनीतियां चुनौती बनी हुई हैं। पहलगाम आतंकी हमला जम्मू-कश्मीर के लिए बड़ा झटका है, जिसने सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित किया है। 1500 लोगों की हिरासत और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार के मजबूत इरादे को दर्शाया है। हालांकि, खुफिया विफलताओं और पर्यटन उद्योग में संकट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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