
मॉस्को/पेरिस। Rafael Marine Deal: फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारत को राफेल लड़ाकू विमान का ‘सोर्स कोड’ देने से साफ़ मना कर रही है, जिससे भारत असंतुष्ट है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि, आने वाले समय में भारत फ़्रांस से लड़ाकू विमान नहीं खरीदेगा। दरअसल, हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद से भारत राफेल लड़ाकू विमान में अपनी स्वदेशी मिसाइलों को एकीकृत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन फ्रांस सोर्स कोड साझा करने को तैयार नहीं है।
इसे भी पढ़ें- American F-16: अमेरिका के खिलाफ एक्शन में चीन, F-16 को बाजार से बाहर करने की बना रहा योजना
सोर्स कोड नहीं साझा करता फ़्रांस

इससे पहले भी जब भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन ‘कावेरी’ के लिए भारत से फ्रांसीसी कंपनी से मदद मांगी थी, तब भी फ़्रांस ने भारत की मदद करने से इनकार कर दिया था, उस वक्त भी भारत की मदद के लिए उसका सबसे पुराना दोस्त रूस आगे आया था। आज के परीक्षण में कावेरी टर्बोफैन इंजन को रूस में इल्युशिन 11-76 विमान में लगाकर उसका परीक्षण किया जा रहा है। बता दें कि, लड़ाकू विमान के इंजन का परीक्षण करना एक कठिन प्रक्रिया है और इसके लिए अलग से बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पड़ती है। रूस ने भारतीय इंजन का परीक्षण करने पर सहमति जताई है।
भारत में उत्पादन को तैयार रूस
ओपन मैगजीन की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, अगर भारत के साथ राफेल लड़ाकू विमान का सोर्स कोड फ़्रांस साझा नहीं करता है, तो काफी हद तक उम्मीद है कि, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के साथ Su-57 लड़ाकू विमान की तकनीक साझा करने के लिए तैयार हैं। बता दें कि, Su-57 लड़ाकू विमान बनाने वाली रूसी कंपनी सार्वजनिक तौर पर कई बार कह चुकी है कि, वह भारत के साथ न केवल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए तैयार है, बल्कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने के लिए भी भारत आ सकती है। रूसी कंपनी ने तो ये तक कहा है कि, अगर भारत सरकार राजी हो जाए, तो वह इसी साल से भारत में SU-30MKI उत्पादन इकाई से Su-57 लड़ाकू विमान का उत्पादन शुरू कर सकती है। ओपन मैगजीन में ये भी दावा किया गया है कि, भारत फ्रांस के साथ 26 राफेल मरीन के लिए किए गए सौदे पर भी पुनर्विचार कर रहा है।
क्या है सोर्स कोड

दरअसल, ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत भारत लड़ाकू विमानों की प्रोडक्शन लाइन अपनी ही जमीन पर स्थापित करना चाहता है और रूस इसके लिए पूरी तरह से रेडी है। सोर्स कोड का मतलब किसी हथियार प्रणाली, जैसे फाइटर जेट, मिसाइल या रडार का मूल सॉफ्टवेयर या प्रोग्रामिंग कोड होता है, जिससे उसे ऑपरेट किया जाता है। यह किसी भी आधुनिक लड़ाकू विमान की ‘जान’ होती है। बताया जा रहा कि, अगर फ्रांस राफेल का सोर्स कोड भारत को दे देता है, तो वह इसमें इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर कस्टमाइजेशन,स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल, भारतीय रडार या सैटेलाइट नेटवर्क से लिंकिंग के साथ-साथ अपने भविष्य की जरूरतों के हिसाब से इसे अपग्रेड भी कर सकता है।
2016 में हुआ था राफेल का सौदा
बता दें कि, भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया था, जो भारत आ चुके हैं। इन विमानों में फ़्रांस की कंपनी ने भारत की जरूरतों के हिसाब से कई कस्टम फीचर्स भी एड किये थे। इस डील के तहत फ़्रांस की कंपनी ने कुछ कंपोनेंट्स की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की थी, लेकिन सोर्स कोड देने से इनकार कर दिया है।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, सोर्स कोड न मिलने पर भारत अगर राफेल में अपने स्वदेशी हथियार शामिल करना चाहे है, तो उसे फ़्रांस में स्थित राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट से बार-बार संपर्क करना होगा। भारत ने फ़्रांस से ही मिराज लड़ाकू विमान भी खरीदा था, जिसका सोर्स कोड आज भी भारत के पास नहीं है। फ्रांस के अड़ियल रवैये को देखते हुए अब भारत राफेल मरीन जेट डील पर एक बार फिर से विचार कर रहा है।
रूस जाएंगे एनएसए
ऐसे में कहा जा सकता है कि, भारत अगर राफेल मरीन फाइटर जेट डील रद्द कर दे तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। रिपोर्ट की मानें, तो भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) इस हफ्ते रूस के दौरे पर जाएंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत-रूस के बीच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की कुछ और यूनिट खरीदने पर बात हो सकती है। वहीं रूस ने भारत को एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम का ऑफर भी दिया है, वह हमेशा से भारत के साथ तकनीक जानकारियां साझा करने को तैयार रहता है। ऐसे में उम्मीद है कि, आने वाले समय में भारत-रूस के बीच एसयू-57 को लेकर बड़ी डील हो सकती है।
इसे भी पढ़ें- Indo-Pak Tension: भारत ने पाकिस्तान पर किया इस ताकतवार बम से हमला, जल्द दिखेगा तबाही का मंजर









Users Today : 21

