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Shani ke Upay: साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष से राहत दिलाती हैं इन 2 पौधों की जड़ें, जानें कैसे करना है उपाय

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Shani ke Upay: इस वर्ष शनि 139 दिनों तक वक्री रहने के बाद 15 नवंबर को मार्गी हो गये। मार्गी होने के बाद 27 दिसंबर को उन्होंने पहली बार अपनी चाल बदली। इस दिन से वे पूर्वा भाद्रपद में गोचर कर रहे हैं। इस नक्षत्र के स्वामी देवगुरु  बृहस्पति हैं और यह नक्षत्र कुम्भ और मीन राशि को जोड़ता है। वैदिक ज्योतिष में शनि को एक क्रूर ग्रह माना जाता है। कहा जाता है कि शनिदेव कलियुग के न्यायाधीश हैं और लोगों के उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

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जीवन में समस्याएं और संघर्ष लाता है शनि का प्रकोप

शनि का प्रकोप जीवन में समस्याएं और संघर्ष लाता है। बहुत से लोग इसके कुप्रभाव को कम करने के लिए रत्न, यंत्र और रुद्राक्ष पहनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे रत्नों, यंत्रों या रुद्राक्षों के बिना भी शांत किया जा सकता है? ज्योतिष शास्त्र में शनि दोष को दूर करने के लिए दो जड़ी-बूटियों की जड़ें विशेष रूप से अच्छी मानी जाती हैं। ये प्राकृतिक उपाय आपकी कुंडली से साढ़े साती और ढैय्या के प्रभाव को कम कर सकते हैं और आपके जीवन में शांति व समृद्धि ला सकते हैं। आइए जानते हैं कि ये जड़ी-बूटियां क्या हैं और आप सफलता और मन की शांति के लिए इनका उपयोग कैसे कर सकते हैं।

बिच्छू जड़ के उपाय

आयुर्वेद के अनुसार, बिच्छू जड़ या बिच्छू घास की जड़ एक औषधीय जड़ी बूटी है, लेकिन ज्योतिष ग्रंथों और लाल किताब में बिच्छू जड़ को शनि ग्रह को शांत रखने का एक अनोखा उपाय बताया गया है। आयुर्वेद में बिच्छू घास की जड़ का उपयोग अवरुद्ध मूत्र मार्ग को खोलने के लिए किया जाता है। यह जड़ गुर्दे और मूत्र प्रणाली में सूजन और तरल पदार्थ जमा होने की प्रक्रिया को कम करती है। वहीं, ज्योतिष की दुनिया में इस पौधे की जड़ की मदद से कमजोर शनि को शांत किया जा सकता है।

 बिच्छू जड़ से शनि के उपाय

लाल किताब के अनुसार बिच्छू की जड़ को काले धागे में लपेटकर पहनने से शनि से जुड़े कामों में सफलता मिलती है। इसके लिए बिच्छू बूटी की जड़ को हर महीने  के शुक्ल पक्ष में शनिवार की सुबह पुष्य नक्षत्र में उखाड़कर ले आना चाहिए। बिच्छू की जड़ के टुकड़ों को चांदी के ताबीज में भरकर शनि मंत्र का जाप करके धारण करने से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शांत होता है। बहुत से लोग बिच्छु की जड़ की अंगूठी पहनते हैं, जिसके बारे में माना जाता है कि इससे शनि का प्रभाव कम हो जाता है।

धतूरा जड़

बिच्छू की जड़ की तरह ही धतूरे की जड़ भी एक आयुर्वेदिक औषधि है। धतूरे की जड़ तंत्रिका विकारों और गठिया से राहत दिलाने में कारगर होती है। माना जाता है कि धतूरे की जड़ को कमर में बांधने से बवासीर का रोग ठीक होता है। ज्योतिषियों के अनुसार, धतूरे की जड़ शनि के इलाज में औषधि की तरह काम करती है। सदियों से धतूरे की जड़ का उपयोग शनि दोष से बचने के लिए किया जाता रहा है।

शनि के लिए धतूरे की जड़ के उपाय

ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार धतूरे की जड़ शनिवार के दिन धारण करनी चाहिए। इसे हाथ या कलाई पर काले धागे से बांधा जा सकता हैं या लोहे के ताबीज में पहना जा सकता है। इसे धारण करने से पहले आप इसे गंगा जल से शुद्ध कर लें और “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। इस पौधे की जड़ न सिर्फ शनि को शांत करती है बल्कि धन की वर्षा भी कराती है। ऐसा माना जाता है कि काले धतूरे की जड़ रविवार, मंगलवार या किसी भी शुभ नक्षत्र में घर में रखने से सौभाग्य, शांति आती है और समृद्धि आती है।

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