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Bhojshala Controversy: कड़ी सुरक्षा ने बीच वाग्देवी की ऑयल पेंटिंग लेकर भोजशाला पहुंची शोभायात्रा

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भोपाल/इंदौर/धार। Bhojshala Controversy: मध्य प्रदेश का धार जिला इन दिनों खूब सुर्ख़ियों में है, क्योंकि यहां स्थित भोजशाला में पूजा और नमाज़ एक साथ की जाएगी। दरअसल, वसंत पंचमी के दिन सूर्योदय के समय से हिन्दू पक्ष यहां पूजा शुरू करेगा। वहीं मुस्लिम पक्ष दोपहर में 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करेगा।

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भक्तिमय हुआ माहौल

Bhojshala Controversy

मां वाग्देवी के तेल चित्र को लेकर हिन्दू समुदाय की शोभायात्रा यहां भोजशाला परिसर में पहुंच गई है। इस दौरान यहां भक्तों की लंबी लाइन भी लगी हुई है। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी भगवा झंडा लेकर पहुंचे हैं। शोभायात्रा में शामिल युवा भोजशाला जाने के लिए सड़कें खाली कराते भी नजर आये। इस दौरान भक्ति गानों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।

इस दौरान लाइन में खड़े एक बुजुर्ग की तबियत खराब हो गई, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए हेल्थ सेंटर ले जाया गया। फर्स्ट एड के बाद उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। डॉक्टर हालत पर नजर बनाये हुए हैं। कहा जा रहा है कि, भीड़ भीड़ की वजह से और लोगों की भी तबियत खराब हो रही है।

SP ने लिया व्यवस्था का जायजा

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रिपोर्ट के अनुसार, शोभायात्रा धार के लालबाग से शुरू हुई और देवी वाग्देवी की ऑयल पेंटिंग को भोजशाला में स्थापित किया गया। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए यहां सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये गए हैं। भोजशाला की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते पहुंचे धार के SP मयंक अवस्थी ने कहा कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए हैं। पूरे शहर को सात जोन में बांटा गया है। हर जोन की मॉनिटरिंग का जिम्मा एसपी रैंक के अधिकारी को सौंपा गया है।

पूरा इलाका सीसीटीवी से कवर है। एसपी ने कहा, किसी भी तरफ की अफवाह फ़ैलाने वाले या उड्डंदता करने वाले को बक्शा नहीं जायेगा। नमाज को लेकर भी उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, नमाज के लिए भी सभी बंदोबस्त किये गए हैं। इधर, भोजशाला में आने वाले भक्तों के लिए जिले में सामजिक संगठनों और व्यापार संगठनों ने खाने के स्टॉल लगाएं हैं, जहां भक्तों को पूरी सब्जी और चाय पोहा बांटा जा रहा है।

क्या है विवाद की वजह

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धार जिले में स्थित भोजशाला का निर्माण राज भोज ने 11वीं-12वीं सदी में कराया था। राज भोज के शासनकाल में यहां ज्ञान और कला की शिक्षा दी जाती थी। अब यह आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट के संरक्षण में है। हिंदू समुदाय के लोग इसे देवी सरस्वती का मंदिर और ज्ञान का स्थान कहते हैं। वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। इस मुद्दे को लेकरदोनों पक्षों के बीच लंबे से से विवाद चल रहा है।

मुस्लिम नमाज पढ़ेंगे 

धार भोजशाला मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी किया, जिसके मुताबिक, 23 जनवरी यानी बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष सूर्योदय से सूर्यास्त तक देवी सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा करेगा। वहीं दोपहर 1 से 3 बजे तक मुस्लिम पक्ष शुक्रवार की नमाज़ पढ़ेगा। गई। कोर्ट ने प्रशासन को दोनों के लिए अलग-अलग जगह तय करने, स्पेशल पास का इंतज़ाम करने और पूरी सुरक्षा और शांति पक्का करने का निर्देश दिया।

 

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