
India Made Machine Gun: भारत ने विदेशों से कई नवीनतम रोबोटिक्स और उच्च तकनीक वाले हथियारों का आयात करके अपने राष्ट्रीय शक्ति घोषणापत्र को मजबूत किया है, लेकिन भारत में भी कई शानदार हथियार बनाये जाते हैं, जिन्हें विदेशों में बेहद पसंद किया जाता है। इन्हीं में से एक है भारत में निर्मित मीडियम मशीन गन (एमएमजी)। ये मशीन गन गेम चेंजर बनें साबित हो रही है। मोदी सरकार के मेक इन इंडिया के तहत इस मशीन गन की फैक्ट्री उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में लगाई गई है। इस मशीन गन को यूरोप में काफी पसंद किया जाता है और वहां इसकी डिमांड भी खूब है।
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पल में मार गिराती है दुश्मन को
स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री द्वारा निर्मित यह मशीन गन अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय है। नई तकनीक वाली यह मशीन गन जमीनी युद्ध में कारगर हथियार साबित होती है। यह मीडियम मशीन गन प्रति मिनट 1000 राउंड फायर करने में सक्षम है, जो सैनिकों के बीच करीबी मुकाबले में गेम चेंजर साबित हो सकती है। यह मशीन गन एक साथ कई दुश्मनों को एक ही पल में मार गिराने में सक्षम है।
मशीन गन की खूबियां
India.co के मुताबिक मशीन गन का वजन 11 किलोग्राम है। इसके बैरल का वजन 3 किलोग्राम है। यह प्रति मिनट 1000 राउंड फायर कर सकती है। यह 1.8 किलोमीटर या 1800 मीटर की दूरी तक दुश्मनों को मार सकती है। इस मशीन गन की लंबाई 1255 मिमी है। यह दुश्मनों पर सटीक निशाना लगाने में भी पूरी तरह से सक्षम है। इस मशीन गन का कैलिबर 7.62×51 मिलीमीटर है। इन्हीं खूबियों की बदौलत यह मशीन गन कई दुनिया भर की कई सेनाओं की पसंद बनी हुई है।
225 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मशीन गन का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर 2024 में आया था। ऑर्डर दिसंबर 2023 में दिया गया था और मशीन गन का उत्पादन जारी है। जल्द ही डिलिवरी दे दी जाएगी। इस साल मशीन गन के लिए 225 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। पिछले साल इसी ऑर्डर की कीमत 190 करोड़ रुपये थी।
2024 में भारतीय सेना में आये कई बदलाव
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2024 यानी ये साल भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर साबित हुआ। यह वर्ष भारतीय सेना और रक्षा प्रौद्योगिकी के लिए बेहद खास रहा। देश के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए DRDO और HAL ने ठोस कदम उठाए। इस वर्ष, DRDO ने अपने मिशन, दिव्यास्त्र अग्नि-5 ICBM का MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) का सफल परीक्षण किया। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के लिए बनाए गए तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट का परीक्षण किया गया।
हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया गया
डीआरडीओ की अग्नि प्राइम मिसाइल का परीक्षण किया गया। भारत को 35 हजार एके-203 असॉल्ट राइफलों का बैच मिला। ज़ोरावर लाइट बैटल टैंक को भारतीय सेना में शामिल किया गया। DRDO ने MPATGM (मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल) का परीक्षण किया। भारत में निर्मित पनडुब्बी आईएनएस अरिगेट भारतीय नौसेना में शामिल की गई। VSHORADS मिसाइल का परीक्षण किया गया। भारत में यूसीएवी स्टील्थ ड्रोन का उत्पादन शुरू हो गया है। नवंबर में भारत ने अपनी पहली हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था।
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