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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सराहना की

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के लोगों के बीच की दूरी कम करने के लिए अब्दुल्ला ने सही कदम उठाया है। रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार दिल्ली और कश्मीर को एक समान दृष्टि से देखती है। सिंह ने ये बयान टांडा आर्टिलरी ब्रिगेड द्वारा आयोजित 9वीं पूर्व सैनिक दिवस रैली के दौरान दिया। उन्होंने अधिकृत कश्मीर (POK) के प्रधानमंत्री चौधरी अनवर उल हक के उस बयान की भी कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने भारत के खिलाफ जहर उगला था। रक्षामंत्री ने कहा कि पीओके के बिना जम्मू-कश्मीर अधूरा है। इस दौरान सिंह ने सभी को मकर संक्रांति और नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं और कहा कि अखनूर में उनकी उपस्थिति दर्शाती है कि हम दिल से अखनूर और जम्मू-कश्मीर को दिल्ली की तरह ही मानते हैं।
पाकिस्तान को खत्म करना होगा आतंकवाद
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर भारत को अस्थिर करने के उद्देश्य से आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना होगा या गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अखनूर जिले में पूर्व सैनिकों की बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीओके की जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। वहां आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप सक्रिय हैं और सीमा के पास लॉन्च पैड बनाए गए हैं। भारत सरकार इस स्थिति से पूरी तरह परिचित है। पाकिस्तान को इस समस्या को ख़त्म करना होगा।
अनवर-उल-हक के बयान की निंदा की

उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि पीओके के बिना जम्मू-कश्मीर अधूरा है। पाकिस्तान के लिए PoK महज एक विदेशी क्षेत्र है। सिंह ने यह भी कहा कि पीओके के लोग सम्मानजनक जीवन से वंचित हैं और पाकिस्तानी शासक भारत के खिलाफ अपने मंसूबों को आगे बढ़ाने के लिए धर्म के नाम पर उनका शोषण कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक के हालिया बयान की भी कड़ी निंदा की और इसे पाकिस्तान के भारत विरोधी एजेंडे का स्थायी हिस्सा बताया जो जनरल जिया-उल-हक के जमाने से चला आ रहा है।
पाकिस्तान की आलोचना की
उन्होंने पाकिस्तान की आतंकवाद को समर्थन देने की नीति की आलोचना की और कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत को अस्थिर करने का प्रयास किया है। ये कोशिशें जारी रहेंगी, लेकिन पाकिस्तान आतंकवाद को कभी नहीं छोड़ेगा। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आतंकी पाकिस्तान से आते हैं। रक्षामंत्री ने आतंकवाद और घुसपैठ को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों की आलोचना की। उन्होंने कहा पाकिस्तान 1965 से ही इस तरह के प्रयास कर रहा है, लेकिन वह हमेशा ही जम्मू-कश्मीर के लोगों का समर्थन पाने में नाकामयाब रहा है। 1965 में युद्ध और आतंकवाद चरम पर थे, तब भी जम्मू कश्मीर के लोग पाकिस्तान के साथ नहीं थे। यह पाकिस्तान से अलग है। इसके विपरीत, हमारे कई मुस्लिम भाइयों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपने प्राणों की आहुति दी।
#WATCH | Akhnoor, Jammu and Kashmir: Speaking at the 9th Armed Forces Veterans’ Day event, Defence Minister Rajnath Singh says, “… The top priority of our government is to bridge whatever gap exists between Kashmir and the rest of the country. Steps are being taken in this… pic.twitter.com/rx1YtV51jy
— ANI (@ANI) January 14, 2025
हर युद्ध में हारा है पाकिस्तान
भारत का मुकुट है जम्मू कश्मीर

1965 के युद्ध के अनुभव को याद करते हुए सिंह ने कहा कि भारतीय सेना द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्रों को बाद में बातचीत के माध्यम से छोड़ दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप आतंकवादियों के लिए घुसपैठ के रास्ते खुल गए। अगर ऐसा न हुआ होता तो आतंकवादियों की घुसपैठ रोकी जा सकती थी। रक्षामंत्री ने अनुच्छेद 370 के ख़त्म होने को इन बदलावों की शुरुआत बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति में काफी बदलाव आया है। जम्मू-कश्मीर पीओके के बिना अधूरा है और ये भारत का मुकुटमणि है।
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