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RamVilas Vedanti Death: राम मंदिर के लिए सड़क से लेकर सदन तक किया संघर्ष, 25 बार गए जेल

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RamVilas Vedanti Death

अयोध्या। Ram Vilas Vedanti Death: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व सासंद और राम मंदिर आन्दोलन में अहम भूमिका निभाने वालों में से डॉ. राम विलास वेदांती का आज सोमवार को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में निधन हो गया। वे 67 साल के थे। उनके निधन से रामभक्तों और बीजेपी में शोक की लहर दौड़ गई।

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बताया जा रहा है कि राम विलास वेदांती मध्य प्रदेश में लालगांव के निकट स्थित भेटवा गांव में कथा सुना रहे थे, जो 17 दिसंबर तक चलनी थी। इसी दौरान शनिवार रात उन्हें सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत हुई, जिस पर आनन फानन में उन्हें रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।  आइये जानते हैं राम विलास वेदांती के बारे में…

7 अक्टूबर 1958 को हुआ था जन्म

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मध्य प्रदेश में रीवा के गुढ्वा गांव में 7 अक्टूबर 1958 को जन्मे राम विलास वेदांती राम मंदिर आन्दोलन के साथ शुरूआती दौर से जुड़े हुए हैं और इसके लिए उन्होंने न सिर्फ संसद में संघर्ष किया बल्कि सड़क पर भी उतरे और कई बार जेल भी गए। धार्मिक नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले राम विलास वेदांती 12वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में संसद के कदम रखा था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सासंद बने। राममंदिर में सक्रिय भूमिका निभाने वाले वेदांती श्री राम जन्म भूमि ट्रस्ट के सदस्य भी रहे और मन्दिर निर्माण ने भी अहम भूमिका निभाई।

प्रतापगढ़ में खिलाया था कमल

बता दें कि, प्रतापगढ़ (बेल्हा) की राजनीति में उस दौर में राजा रजवाड़ों और परंपरागत राजनीतिक परिवारों का प्रभाव था। ऐसे में लोकसभा चुनाव जीतकर राम विलास वेदांती ने वहां की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा। उन्होंने प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर भगवान राम के नाम पर चुनाव लड़ा और कमल खिलाया। उस दौर में अयोध्या में मन्दिर निर्माण को लेकर न सिर्फ उत्तर प्रदेश में बल्कि देश भर के लोगों में जबर्दस्त उत्साह था।

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हर हिन्दू की एक ही मांग थी कि, अयोध्या में जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर का निर्माण हो, जिसका फायदा राम विलास वेदांती को चुनाव में मिला। इससे पहले साल 1996 में बीजेपी ने इस सीट से उदयराज मिश्र को टिकट दिया था, लेकिन वह कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह ने हार गये थे। वहीं राम विलास वेदांती को मछली शहर से टिकट दिया गया था, जहां उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की थी।

रत्ना सिंह को दी थी शिकस्त

1998 में भाजपा के टिकट पर प्रतापगढ लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे राम विलास वेदांती ने कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह को भारी मतों से शिकस्त दी। इस चुनाव में  पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय राजा दिनेश सिंह की पुत्री रत्ना सिंह को 1,64,467 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी वेदांती को 2,32,927 मत प्राप्त हुए थे। माना जाता है कि उनकी इस जीत की वजह राम जन्मभूमि न्यास से उनके सीधे जुड़ाव और मंदिर आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका थी।

वेदांती हमेशा से सार्वजनिक मंचों से अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने की वकालत करते रहते थे। साथ ही अपने इंटरव्यूज में भी उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि जब तक विवादित ढांचा हटाया नहीं जाता मन्दिर निर्माण संभव नहीं होगा। उनका ये भी कहना था कि, विवादित ढांचे में  धनुष-बाण, शंख-चक्र-गदा जैसे चिन्ह मौजूद थे और दुनिया की कोई भी ऐसी मस्जिद नहीं है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं के प्रतीक बने हों।

1111 फुट ऊंचा राम मंदिर बनाने का था सपना

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उन्होंने इस आरोप से भी इनकार किया था कि किसी मस्जिद को तोड़ा गया है। उन्होंने कहा था कि जो भी तोड़ा गया ,वह मंदिर का ढांचा था। डॉ. वेदांती का मानना था कि अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर विश्व का सबसे भव्य मंदिर होगा, जो इंटरनेशनल पर्यटक स्थल के तौर पर जाना जायेगा। उन्होंने ये भी कहा था कि, राम मंदिर के लिए 67 एकड़ भूमि भी कम पड़ सकती है। ऐसे में भविष्य में और जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है। उन्होंने ये भी इच्छा जताई थी कि, अयोध्या में 1111 फुट ऊंचा राम मंदिर बनाया जाना चाहिए, ताकि ये इस्लामाबाद, काठमांडू और कोलम्बो से भी दिखाई दे। उनका ये बयान काफी चर्चित हुआ था।

पीएम मोदी ने पूरा किया संतों का सपना

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले उन्होंने ये भी कहा था कि, इस्लाम को हिन्दुओं से कोई खतरा नहीं है, इसलिए बहुत से मुसलमान भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द अयोध्या में मन्दिर का निर्माण हो। उन्होंने ये भी कहा था कि महंत अवैद्यनाथ, रामचंद्र परमहंस अशोक सिंघल समेत तमाम हिन्दू और संतों का सपना था कि, अयोध्या में राम मन्दिर बने, उनके इस सपने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा किया। बता दें कि, राम मंदिर आन्दोलन किसी मन्दिर के लिए आजादी के बाद का सबसे बड़ा आन्दोलन है।

बाबरी ढांचा विध्वंस में चला था केस

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गौरतलब है कि. डॉ. वेदांती उन नेताओं में थे, जिन पर 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा विध्वंस का आरोप लगा था और केस चला था। ये मामला सीबीआई की विशेष कोर्ट में चला था, जहां से डॉ. वेदांती सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था। फैसले से पहले डॉ. वेदांती ने एक बार कहा था कि, हमने किसी मस्जिद को नहीं तोड़ा, हमने तो मंदिर के खंडहर को तोड़ा था। वहां केवल और केवल राजा विक्रमादित्य द्वारा बनवाया गया राम मंदिर था।

 

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