
पश्चिम बंगाल। Mamta Big Allegation On EC: बीते कुछ सालों से विपक्ष के निशाने पर रहने वाला चुनाव आयोग, एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी न उस पर मतदाता सूची में हेर फेर करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि, बीजेपी के निर्देश पर अन्य राज्यों खासकर हरियाणा और राजस्थान के लोगों को यहां की मतदाता सूची में जोड़ा जा रहा है, ताकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया को बाधित किया जा सके। उनका आरोप है कि, बीजेपी पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में गुजरात, राजस्थान, पंजाब, बिहार और हरियाणा के लोगों को शामिल किया जा रहा है। इन मतदाताओं के नाम पश्चिम बंगाल के मौजूदा मतदाताओं के इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) नंबरों से जोड़े जा रहे हैं। ऐसा करके वैध मतदाताओं को डुप्लिकेट बनाया जा रहा है और डुप्लीकेट को वैध।
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पार्टी की संगठनात्मक बैठक संपन्न

ये आरोप टीएमसी की मुखिया और सीएम ममता बनर्जी ने बीते 27 फरवरी को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित पार्टी की संगठनात्मक बैठक में लगाये। उन्होंने कहा, बीजेपी 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की पूरी कोशिश में जुटी है। उसके इस काम में खुद चुनाव आयोग उसका सपोर्ट कर रहा है। इस दौरान उन्होंने उन कंपनियों के नाम भी बताये, जिन्हें भाजपा ने इस काम के लिए नियुक्त किया है।
मतदाता सूची में हेर फेर करने का लगाया आरोप
ममता बनर्जी ने कहा, एसोसिएशन ऑफ ब्रिलियंट माइंड्स और इंडिया 360 नाम की ये दो एजेंसियां “भ्रष्ट ब्लॉक स्तरीय रिटर्निंग अधिकारियों” और ”डेटा एंट्री ऑपरेटरों” को साथ मिलाकर बीजेपी के इस काम को अंजाम दे रही है। बैठक में सीएम ने एक सूची भी दिखाई और कहा, इसमें अन्य राज्यों के नकली मतदाताओं के सबूत हैं, जो पश्चिम बंगाल के निवासियों के साथ एक ही EPIC नंबर के तहत दर्ज हैं। बैठक में उन्होंने उदाहरण के तौर पर मुर्शिदाबाद के रानी नगर, दक्षिण दिनाजपुर के गंगारामपुर का नाम भी लिया, जहां की मतदाता सूची में पुराने मतदाताओं के स्थान पर नये मतदाताओं का नाम दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि, “मेरे पास पश्चिम बंगाल के सभी जिलों के सबूत हैं।” हालांकि उन्होंने इन सबूतों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं साझा की।
दिल्ली में प्रदर्शन की धमकी

बैठक में बनर्जी ने नये चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति का भी जिक्र किया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह जताया। उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में जो हेर फेर किया जा रहा है, उसमें चुनाव आयोग की मिलीभगत है। सीएम ने धमकी दी कि यदि इस संबंध में चुनाव आयोग ने कार्रवाई नहीं की तो वे उसके खिलाफ दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने कहा, वे इस बार भी उसी तरह का प्रदर्शन करेंगी जैसे साल 2006 में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रह कर किया था।
कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश
इस दौरान ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया। साथ ही मतदाता सूची की जांच करने और नकली मतदाताओं की पहचान करने के लिए पार्टी में जिला-स्तरीय कोर कमेटियां बनाने का ऐलान किया। इसके लिए उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों को 10 दिन का समय दिया है। साथ ही ये चेतावनी भी दी कि अगर समितियां अपना काम ढंग से नहीं करती है, तो वे खुद इसकी निगरानी करेंगी। उन्होंने पार्टी के सामने 2026 के चुनावों में 294 सीटों में से 215 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। उनका लक्ष्य है कि 2026 के चुनाव में बीजेपी को 77 से भी कम सीट मिले।
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चुनाव में धांधली की आशंका
बता दें कि 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीती थी जबकि बीजेपी 77 सीटें जीतकर दूसरे नबंर पर थी। वहीं स्थानीय निकाय चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी टीएमसी का प्रदर्शन बेहतर रहा है। हालांकि, बीजेपी पश्चिम बंगाल में ममता की पार्टी को सत्ता से बेदखल करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। यही वजह है कि ममता आरोप लगा रही हैं कि जिस तरह से बीजेपी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली के विधानसभा चुनाव में धांधली कराई है, वैसे ही वह बंगाल में भी कराने की तैयारी कर रही है।
एक्टिव हुए बीजेपी नेता

इधर ममता बनर्जी के इस आरोप के बाद शुभेंदु अधिकारी समेत पश्चिम बंगाल के अन्य बीजेपी नेता एक्टिव हो गये हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को पांच पन्नों का पत्र लिखा है जिसमें ममता बनर्जी द्वारा सीईसी ज्ञानेश कुमार पर उठाए गये सवाल का जिक्र किया है। बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग के ममता बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इस साथ ही बीजेपी ने भी ममता पर मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोप लगा दिया है।
ममता पर कार्रवाई की मांग

बीजेपी नेताओं का कहना है कि, ममता बनर्जी मतदाता सूची से हिंदुओं, विशेष रूप से गैर-बंगाली मतदाताओं के नाम हटाने की योजना बना रही हैं। बीजेपी का कहना है कि चूंकि गैर बंगाली मतदाता आमतौर पर बीजेपी का समर्थन करते हैं, यही वजह है कि टीएमसी प्रमुख मतदाता सूची से उनका नाम हटाना चाह रही हैं। पत्र में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के चुनाव में बायोमेट्रिक सत्यापन की मांग की है। इसे लेकर टीएमसी का आरोप है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने जिस तरह से अभी तक बीजेपी के पक्ष में फैसले लिये हैं, वैसे ही वह बीजेपी की इस मांग को भी मान लेगा। फ़िलहाल चुनाव आयोग की तरफ से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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