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Campaign against Naxalism: नक्सल मुक्त होगा छत्तीसगढ़, सरकार ने बनाई ये योजना, 45 लाख इनामी को भी है ढेर करने का प्लान

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Campaign against Naxalism

छत्तीसगढ़। Campaign against Naxalism:  दशकों से नक्सलवाद के साये में जी रहा छत्तीसगढ़ अब जल्द ही नक्सलियों से मुक्त होने वाला है। इसके लिए सरकार ने नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत जिन ग्राम पंचायतों से नक्सलियों का खात्मा हो जाएगा, उन पंचायतों को सरकार नक्सल मुक्त गांव का सर्टिफकेट देगी। इस योजना का ऐलान उप मुख्यमंत्री और प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा आज शुक्रवार 21 मार्च को कर सकते हैं।

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31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त होगा देश

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इससे पहले गुरुवार 20 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा है, ‘हमारे जवानों ने नक्सलमुक्त भारत अभियान’ की दिशा में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने, छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में चलाये गये 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 30 नक्सली मार गिराया है। मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है। समर्पण से लेकर समावेशन की तमाम सुविधाओं के बाद भी जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपने जा रही है। अगले साल यानी 31 मार्च 2026 से पहले देश नक्सलमुक्त होने वाला है।

30 नक्सली ढेर

बता दें कि, सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर जिलों में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 30 नक्सलियों को ढेर कर दिया है और भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किया है। हालांकि, बीजापुर मुठभेड़ में डीआरआई के जवान राजू ओयाम शहीद हो गये हैं। दोनों जिलों में चलाए गये इस ऑपरेशन में 600 जवान शामिल थे। बस्तर आईजी और गृहमंत्री ने इस ऑपरेशन को बड़ी सफलता बताया है। दरअसल, सरकार ने 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प लिया है। इस साल अब तक 119 नक्सली मारे जा चुके हैं। वहीं, अब गृहमंत्री अमित शाह ने भी ऐलान कर दिया है कि अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सलमुक्त हो जायेगा।

तेज हुई हिडमा की तलाश

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गृहमंत्री के इस मिशन को पूरा करने में जुटी सुरक्षा एजेंसियां अब देश के सबसे मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर की तलाश में जुट गई हैं, जिसका नाम है माडवी हिडमा।  NIA की वेबसाइट के अनुसार उसके एक नहीं कई नाम हैं- जैसे- हिडमन्ना उर्फ माडवी हिडमा उर्फ हिडमालू उर्फ संतोष आदि।  एनआईए के अनुसार , 51 साल का ये नक्सली कमांडर हिडमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवराती गांव का रहने वाला है। उसके इस गांव को हाल ही में  BSNL के मोबाइल नेटवर्क से जोड़ा गया है जिससे इस इलाके में मौजूद सुरक्षा बलों को अब जाकर कनेक्टिविटी की सुविधा मिली है। बता दें कि, हिडमा ने कई ऐसे कांड किये हैं जिसे सुनकर इन्सान की रूह कांप जाती है। वह आमतौर पर छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के घने जंगलों छिप कर रहता है। उसने सुरक्षा बलों पर भी कई हमले किए हैं और दर्जनों जवानों की जान ली है।

कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दे चुका है हिडमा

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वह नक्सलियों की बटालियन का नेतृत्व करता है। उसके ऊपर 45 लाख का इनाम है। इसने 25 मई 2013 को एक ऐसी खूनी वारदात की थी, जिससे पूरा देश सिहर गया था। इस दिन हिडमा के नेतृत्व में नक्सलियों ने बस्तर के झीरम घाटी में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की टॉप लीडरशिप समेत 33 लोगों का क़त्ल कर दिया था। इसके घटना के बाद से ही छत्तीसगढ़ पुलिस समेत कई एजेंसियां हिडमा को तलाश रही हैं। हिडमा पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 लाख और दूसरी एजेंसियों ने 20 लाख का इनाम घोषित किया है।

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बता दें कि, झीरम घाटी की घटना से पहले भी उसका नाम कई बड़े कांड में आ चुका है। जैसे कि 2010 की ताड़मेटला की घटना। इस घटना मे 76 CRPF जवान शहीद हुए थे। पुलिस का कहना है कि झीरम के साथ ही इस वारदात में भी हिडमा मौजूद था। हिडमा जिस बटालियन को लीड करता है वह दक्षिण बस्तर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में काम करती है। ये इलाका कभी माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा करता था। हालांकि अब हालात सुरक्षा बलों के पक्ष में है।

16 साल की  उम्र में जुड़ा था नक्सली संगठन से

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोंड समाज से ताल्लुक रखने वाला माडवी हिडमा मात्र 16 साल की उम्र में नक्सलियों के साथ जुड़ गया था। जब वह माओवादी संगठन से जुड़ा था, उससे पहले ही उसकी शादी हो चुकी थी। बताया जाता है कि ‘दुबली पतली, लेकिन चुस्त कद काठी वाला हिडमा बहुत तेज था और वह चीजों को बहुत तेजी से सीखता था।’ कहा जाता है कि, माओवादियों का अपना परंपरागत एजुकेशन सिस्टम और कल्चरल कमेटी होती है, जिसमें शामिल होकर हिडमा ने पढ़ाई की। इसके साथ ही इसने गाना-बजाना भी सीखा।

मांद में घुसकर घेरने की फ़िराक में एजेंसियां

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माओवादी कमांडरों ने उसका ब्रेनवॉश किया और सरकारी तंत्र के खिलाफ उसके मन में नफरत भर दी, जिससे वह दिन बा दिन खूंखार होता चला गया।’ बताया जाता है कि, हिडमा जितना अच्छी तरह घात लगाकर दुश्मन पर हमला करता था, उतना ही अच्छा वह वाद्ययंत्रों को भी बजाता है। नक्सली ट्रेनिंग के बाद हिडमा को सबसे पहले नक्सलियों के मांद गढ़चिरौली में भेजा गया था। 2013 में हुई झीरम घटी की साजिश भी हिडमा ने ही थी। सुरक्षा एजेंसियों और रणनीतिकारों का कहना है कि देश से अगर नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करना है, तो हिडमा का खात्मा अनिवार्य है। यही वजह है कि अब केंद्रीय एजेंसियां उसकी मांद में घुसकर उसे घेरने की रणनीति बना रही हैं। इसके लिए वे सभी जरूरी तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।

125 गांवों की जा रही टेक्निकल मैपिंग

रिपोर्ट है कि हिडमा की तलाश के लिए 125 से अधिक गांवों की टेक्निकल मैपिंग की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बॉर्डर पर मौजूद लगभग 125 गांव का थर्मल इमेजिंग करवा रही है। इसके लिए NTRO (National Technical Research Organisation) की मदद ली जा रही है। थर्मल मैपिंग का सबसे अधिक फायदा ये होगा कि जब भी सिक्योरिटी फोर्स इन इलाकों में ऑपरेशन के लिए निकलेगी, तो उन्हें वहां के सभी रास्तों की जानकारी भी होगी। बता दें कि, हिडमा का गांव भी बीजापुर और सुकमा बॉर्डर पर ही है। थर्मल मैपिंग के बाद सुरक्षा बल इन इलाकों में कभी भी हिडमा की तलाश में अपना ऑपरेशन शुरू कर सकते हैं।

2025 में अब तक मारे गये 119 नक्सली

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गुरुवार को चलाए गये ऑपरेशन में 30 नक्सलियों को ढेर होने के साथ ही इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में 119 नक्सली मारे जा चुके हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, 2025 में अब तक देश के अलग-अलग इलाकों से 104 नक्सलियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि 164 ने नक्सलियों से सरेंडर किया है। इससे पहले, 2024 में 290 नक्सलियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। वहीं 1,090 को गिरफ्तार किया गया और 881 ने आत्मसमर्पण किया था। अब तक 15 शीर्ष नक्सली नेताओं का भी खात्मा किया जा चुका है।

नक्सल मुक्त ग्राम पंचायत का सर्टिफकेट देगी सरकार

आपको बता दें कि, छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद है ,जिसके खात्मे का ऐलान सालभर पहले ही कर दिया गया था। इसके बाद से सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार पर काम कर रही हैं। प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ तेजी से ऑपरेशन चलाये जा रहे हैं। वहीं अब सरकार एक और नई योजना बनाई है जिसके तहत नक्सल मुक्त होने वाली ग्राम पंचायतों को सरकार नक्सल मुक्त ग्राम पंचायत का सर्टिफकेट देगी।

 

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