
जम्मू-कश्मीर। Pahalgam Terror Attack: मंगलवार 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के विरोध में आज बुधवार को कश्मीर में पूर्ण बंद का आह्वान किया गया। इस बंद के साथ लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर की। इस हमले में 26 पर्यटकों के मारे जाने की खबर है। घटना के बाद पूरे राज्य के शोक की लहर दौड़ गई। हमले के बाद श्रीनगर, बारामूला, सोपोर और कुपवाड़ा जैसे कई इलाकों में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा।
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लोगों ने निकाला कैंडल मार्च

इस बंद को राजनीतिक दलों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक समूहों का भी समर्थन मिला। वहीं, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित अन्य दलों ने भी जनता से इसे सफल बनाने की अपील की। हमले के विरोध में हजारों लोगों ने जम्मू को सड़कों पर प्रदर्शन किया। साथ ही मंगलवार शाम को कैंडल मार्च निकालकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। इस बीच, उरी सेक्टर में घुसपैठ कर रहे दो आतंकियों को भारतीय सेना ने मार गिराया।
पाकिस्तान के खिलाफ की नारेबाजी

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के विरोध में जम्मू में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। यहां, कई संगठनों के बैनर तले भारी संख्या में स्थानीय लोग सड़क पर उतरे और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की। इससे पहले मंगलवार की शाम को पहलगाम और अन्य क्षेत्रों में हजारों लोगों ने कैंडल मार्च निकाल कर मारे गए पर्यटकों को श्रद्धांजलि दी गई। कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने सरकार से आतंकियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। कश्मीर की मस्जिदों, विशेष रूप से जामिया मस्जिद भलेसा ने माइक पर इस हमले की निंदा की और इसे कायराना कृत्य बताया।
स्थानीय लोग बोले- हम शांति चाहते हैं
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बंद के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए श्रीनगर और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। कई स्थानों पर बैरिकेड्स लगाए गए और वाहनों की चेकिंग की जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियातन इंटरनेट सेवाओं पर आंशिक प्रतिबंध लगाने का निर्णय भी लिया गया है। इस हमले को लेकर श्रीनगर के व्यवसायी मोहम्मद यूसुफ ने कहा, “यह हमला केवल पर्यटकों पर नहीं है, बल्कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था और छवि पर भी है। हम शांति चाहते हैं न कि आतंकवाद।
उरी में एक्टिव हुई सेना

पहलगाम में हुए हमले के बाद से उत्तरी कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सेना एक बार फिर से एक्टिव हो गई है। दरअसल, मंगलवार को देर रात में यहां के गोहालन इलाके में नियंत्रण रेखा के पास कुछ संदिग्ध गतिविधि देखने को मिली। इसके तुरंत बाद, सेना की 3 मराठा लाइट इंफैंट्री ने पूरे इलाके को घेर लिया। इस दौरान घुसपैठ का प्रयास कर रहे आतंकियों ने सेना पर फायरिंग शुरू कर दी, सेना ने भी जवाबी फायरिंग की और दो आतंकियों को मौत की नींद सुला दिया।
सफल नहीं होने देंगे घुसपैठ

हालांकि, उनके शव बरामद नहीं किए जा सके, क्योंकि यह इलाका एलओसी के बेहद करीब है और घने जंगल के कारण विजिबिलिटी कम थी। सेना ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। इसके लिए ड्रोन और थर्मल इमेजिंग का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। उरी में मारे गये घुसपैठियों के बारे में जानकारी देते हुए सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारी टीमें पूरी तरह सतर्क हैं। एलओसी पर किसी भी तरह की घुसपैठ को सफल नहीं होने दिया जाएगा।’
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आतंकी गतिविधियां बढ़ने की आशंका
खुफिया सूत्रों के हवाले से आशंका जताई गई है कि, पहलगाम हमले के बाद जम्मू कश्मीर में आतंकी संगठन और उनकी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इस खबर के बाद से सेना और खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, हमले का मास्टरमाइंड लश्कर का टॉप कमांडर सैफुल्लाह है, जिसने पाकिस्तान में बैठकर इस साजिश को अंजाम दिया। हमले में चार से छह आतंकियों के शामिल होने की बात सामने आई है, जिनमें से दो की पहचान की जा रही है।
पहाड़ियों में छिपे हो सकते हैं आतंकी
आशंका जताई जा रही है कि हमले में शामिल आतंकी दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपे हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें तलाशने के लिए सेना हेलीकॉप्टर, ड्रोन और उन्नत तकनीकी का इस्तेमाल कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले बताया जा रहा है कि, हमले में इस्तेमाल हुए हथियार और विस्फोटक पाकिस्तान से तस्करी कर लाए गए थे। संदेह है कि, स्थानीय स्तर पर भी आतंकियों को कुछ रसद सहायता मुहैया कराई गई होगी, जिसकी जांच की जा रही है।
पीएम ने बुलाई आपात बैठक

पहलगाम हमले ने केंद्र और राज्य सरकारों को तत्काल कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया है। हमले की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में ही छोड़ दी और भारत लौट आये। आज बुधवार को उन्होंने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। इधर, पीएम के निर्देश पर गृहमंत्री अमित शाह मंगलवार शाम को ही श्रीनगर पहुंच गये। वहां, उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान शाह ने स्पष्ट किया कि, आतंकवादियों और उनके समर्थकों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हम कश्मीर में शांति और विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं, इसमें अड़चन डालने वालों को उसकी कीमत चुकानी होगी।”
उमर अब्दुल्ला ने की निंदा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले की निंदा की और कहा, यह कश्मीर की आत्मा पर हमला है, हम अपने मेहमानों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।” प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय जनता से शांति बनाए रखने का आह्वान किया है। बता दें कि, पहलगाम हमले को पिछले 5 सालों में सबसे बड़ा आतंकी हमला बताया जा रहा है। इस हमले से कश्मीर के पर्यटन उद्योग को गहरा झटका लगा है। अप्रैल का महीना पर्यटकों के लिए सबसे व्यस्त महीना माना जाता है। इस महीने में हमेशा पहलगाम, गुलमर्ग और सोनमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ जमा होती है।
पर्यटकों ने रद्द की यात्राएं

हमले के बाद कई पर्यटकों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दी हैं, जिससे स्थानीय होटल, टूर ऑपरेटर और गाइड को आर्थिक नुकसान हो सकता है और उनकी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, पर्यटन विभाग ने पर्यटकों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सुरक्षा उपायों का ऐलान किया है।
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