
नई दिल्ली। Bhargavastra: भारत ने एक ऐसा एंटी ड्रोन सिस्टम तैयार किया है, जो सभी ड्रोनों के लिए काल बनेगा। इस सिस्टम का सफल परीक्षण भारत ने बुधवार 14 मई को ओडिशा के गोपालपुर में किया। इस स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम को ‘भार्गवास्त्र’ के नाम से जाना जायेगा। कहा जा रहा है कि, यह एक साथ कई ड्रोन पर हमला कर सकेगा।
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SDAL ने किया है डिजाइन

भार्गवास्त्र को सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने डिजाइन किया है। यह परीक्षण पाकिस्तान के साथ हाल में हुए संघर्ष का बाद किया गया। इस संघर्ष के दौरान रूस से खरीदे गये एयर डिफेन्स सिस्टम S-400 ने पाकिस्तान से किये गये हमलों में इस्तेमाल किये गये ड्रोन और मिसाइलों को हवा में भी नष्ट कर दिया था।
#WATCH | A new low-cost Counter Drone System in Hard Kill mode ‘Bhargavastra’, has been designed and developed by Solar Defence and Aerospace Limited (SDAL), signifying a substantial leap in countering the escalating threat of drone swarms. The micro rockets used in this… pic.twitter.com/qM4FWtEF43
— ANI (@ANI) May 14, 2025
ड्रोन हमलों को रोकने में है सक्षम

जानकारी के मुताबिक, ओडिशा के गोपालपुर में 13 मई को आर्मी एयर डिफेंस (AAD) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में रॉकेट के तीन परीक्षण किए गए। पहले, एक-एक करके दो रॉकेट दागकर परीक्षण किया गया। इसके बाद, साल्वो मोड में दो रॉकेट दो सेकंड के भीतर दागकर एक और परीक्षण किया गया। बताया जा रहा है कि, सभी रॉकेटों ने उसी तरह का प्रदर्शन किया जैसे उम्मीद थी। राकेटों ने सभी जरूरी लॉन्च पैरामीटर भी हासिल किए, जो बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों को रोकने में सक्षम होंगे।
ये हैं खूबियां
भार्गवास्त्र एक बहुस्तरीय एंटी-ड्रोन सिस्टम है। ये तेजी से आ रहे कई ड्रोन का पता लगाने और उन्हें एक साथ नष्ट करने में सक्षम है। भारत की यह उपलब्धि उसकी आत्मनिर्भर रक्षा नीति और मेक इन इंडिया मिशन की सफलता को उजागर करती है। यह एंटी-ड्रोन सिस्टम इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (ईओ/आईआर) सेंसर, रडार और आरएफ रिसीवर से लैस है, जो 6 से 10 किलोमीटर की दूरी पर ड्रोन का पता लगाने में सक्षम है। इसकी एक विशेषता यह है कि यह 2.5 किलोमीटर की दूरी से ड्रोन को नष्ट कर सकता है और इसकी मारक क्षमता 20 मीटर है।
सेना की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम

एंटी ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र को समुद्र तल से 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों समेत विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है। यह ड्रोन सिस्टम भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जिस तरह से पाकिस्तान ने तुर्की और चीनी ड्रोन का इस्तेमाल किया, उससे यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में भारत को नई ड्रोन तकनीक को नाकाम करने की जरूरत होगी।
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