
वॉशिंगटन/तेहरान। US-Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी चरम पर है या यूं कहें कि दोनों देशों के बीच कभी भी जंग छिड़ सकती है, क्योंकि अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा साउथ चाइना सी से मिडिल ईस्ट की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इससे पूरे इलाके की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसके साथ ही वहां रह रहे भारतीय भी मुश्किल में आ गये हैं। जम्मू कश्मीर स्टूडेंट यूनियन (JKSA) ने भारत सरकार से गुजारिश की है कि, किसी भी तरह की अनहोनी होने से पहले भारतीय छात्रों को सुरक्षित वहां से निकाल लिया जाये।
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शुरू हुआ देशव्यापी प्रदर्शन

बता दें कि, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली होसैनी ख़ामेनेई के खिलाफ वहां कई दिनों से प्रदर्शन हो रहा है। तेहरान से शुरू हुआ ये प्रदर्शन अब लगभग पूरे देश में फ़ैल चुका है। प्रदर्शनकारी खामेनई की सत्ता को उखाड़ फेंकने के नारे लगा रहे हैं। इसे लेकर दो दिन पूर्व ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि, ईरान में प्रदर्शन करने वाले लोगों की मदद के लिए अमेरिका की तरफ से मदद भेजी जा रही है।
ट्रंप के इस बयान के साथ ही रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान के निर्वासित नेता रेजा पहलवी से मुलाकात की और कहा, ईरानी प्रदर्शनकारियों के लिए मदद निकल चुकी है।’ इन सबके बीच अब खबर आ रही है कि अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन का बेड़ा मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहा है। उसकी ये नौसेना आने वाले दो हफ्तों में कहीं भी हो सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के मौजूदा हालात पर बराबर नजर रखी जा रही है।
ईरान में मच सकती है तबाही
आपको बता दें कि, एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन के साथ युद्धपोतों का एक विशालकाय बेड़ा भी है। ये बेड़ा ईरान में तबाही मचाने में पूरी तरह से सक्षम है। एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन को अगर एक चलता फिरता युद्ध का मैदान कहा जाये, तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। रिपोर्ट है कि इस युद्धपोत के अलावा अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर जेराल्ड आर. फोर्ड साउदर्न को भी कमांड में तैनात किया है।
U.S. Navy carrier update amid reports that the Abraham Lincoln Carrier Strike Group (ABECSG) has been redirected to the Middle East from Asia.
“The Navy can be anywhere in two weeks,” CNO Caudle told reporters at SNA. However, as @haltman noted, “a carrier is not a prerequisite… pic.twitter.com/ghD079LRv3
— Ian Ellis (@ianellisjones) January 15, 2026
बात करें, एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन की युद्ध क्षमता की, तो ये एक साथ 90 लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टर को ले जाने में सक्षम है। ये युद्धपोत F-35C लाइटनिंग II और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान से लैस है। इसके अलावा इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर आर्ले बर्क-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी तैनात हैं। इस एयरक्राफ्ट कैरियर के मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ने का मतलब है कि, अमेरिका जल्द ही ईरान पर हमला कर सकता है, जिससे वहां बड़े स्तर पर तबाही मच सकती है।
निर्वासित नेता रेजा पहलवी से मिले अमेरिकी नेता

ये भी कहा जा रहा है कि, इस हमले के विरोध में ईरान अगर इजरायल पर मिसाइल से हमला करता है, तो ये अमेरिकी एयर क्राफ्ट कैरियर अब्राहिम लिंकन उन मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट करने का काम करेगा। जैसा कि पिछले साल जून महीने में उस वक्त देखने को मिला था, जब इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के परमाणु हथियार को नष्ट करने के लिए उस पर हमला किया था। ये एयरक्राफ्ट कैरियर 1600 से 2500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली टॉमहॉक मिसाइलों से भी लैस है। इस एयर क्राफ्ट की क्षमता इतनी है कि ईरान की सीमा में घुसे बगैर ही ये उसकी राजधानी तेहरान समेत देश के कई हिस्सों को मिटटी में मिला सकता है।
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अमेरिका का ये अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप परमाणु उर्जा से ऑपरेट होता और ये वहां की नौ सेना की सबसे शक्तिशाली समुद्री यूनिट है। जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में ये एयरक्राफ्ट कैरियर दक्षिण चीन सागर और फिलीपीन सागर में तैनात था, लेकिन अब मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहा है। ईरान में बढ़ते तनाव को देखते हुए पेंटागन ने इसे दक्षिण चीन सागर से हटाकर मध्य पूर्व की तरफ बढ़ने का आदेश दिया है। इधर, ईरान के निर्वासित नेता रेजा पहलवी से अमेरिकी नेताओं की मुलाकात भी शुरू हो गई है।
कतर एयर बेस से बुलाये गये अमेरिकी सैनिक

दोनों देशों की तरफ से एक दूसरे को कड़ी चेतावनियां दी जा रही हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि, ईरान कभी भी अमेरिका पर खतरनाक पलटवार कर सकता है और दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो सकता है, क्योंकि ईरान ने एहतियातन अपने सभी एयरस्पेस बंद कर दिए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने भी कतर स्थित अल उदीद एयरबेस पर तैनात अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को वापस बुला लिया। क़तर के एयरबेस पर करीब 10 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं। इस मुद्दे पर कतर प्रशासन को कहना है कि, ये फैसला मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव देखते हुए लिया गया है।
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते इस तनाव को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि, “आपात स्थितियों या आक्रामक ऑपरेशन्स से निपटने के लिए इस क्षेत्र में पहले से ही बड़ी मात्रा में अमेरिकी संसाधन मौजूद हैं। इसके लिए एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत नहीं है। एक अन्य रिपोर्ट में अमेरिकी पत्रकारों के हवाले से बताया गया है कि, पिछले 48 घंटों में, USS थियोडोर रूजवेल्ट और USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश क्रमशः सैन डिएगो और नॉरफॉक से रवाना हो चुक हैं। ये दोनों रूटीन ट्रेनिंग से या चुपचाप तैनाती के लिए निकल सकते हैं। दोनों में से किसी भी कैरियर ने COMPTUEX पूरा नहीं किया है, इसका मतलब साफ़ है कि, पनडुब्बियों ने अलग-अलग युद्धपोतों के साथ अभ्यास नहीं किया है, लेकिन, वे अभ्यास छोड़कर तेजी से आगे बढ़ेंगे, ऐसा महसूस हो रहा है।
खतरे ने भारतीय मूल के लोग

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव को देखते हुए वहां रह रहे 10 से 12 हजार भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा खतरे में आ गई है, जिनमें दो से तीन हजार कश्मीरी छात्र है, जो वहां मेडिकल की पढ़ाई के लिए गये हैं। ऐसे में जम्मू कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और सरकार ने हालात पर नजर बनाये रखने व गम्भीर स्थिति में उन्हें वहां से सुरक्षित निकालने की अपील की है। संगठन का कहना है कि, कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, जिससे छात्रों से संपर्क करना भी मुश्किल हो रहा है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि वह छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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