
नई दिल्ली। Ban On Firecrackers: दीवाली का त्यौहार आने में अब सिर्फ एक महीने का ही समय बचा है। ऐसे में पटाखों को लेकर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में भी पटाखों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य न्यायधीश ने कुछ अहम टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ने कहा, साफ़ हवा का अधिकार सिर्फ दिल्ली एनसी आर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, इसलिए पटाखों पर बैन लगाना है, तो पूरे देश में लगाना चाहिए न कि सिर्फ दिल्ली एनसीआर में। दरअसल कोर्ट ने ये टिप्पणी दिल्ली-NCR के लिए विशेष रूप से लागू पटाखा प्रतिबंध नियम को लेकर की।
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कोर्ट में दायर हुई याचिका

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पटाखा निर्माताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। याचिका में पटाखा बनाने वाले लोगों ने दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर लगे एक साल के प्रतिबंध का विरोध जताया था और इसे हटाने की मांग की थी। पटाखा व्यापारियों द्वारा कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि, कई परिवारों की आजीविका इस उद्योग पर निर्भर है। ऐसे में इस पर से बैन हटाया जाना चाहिए।
देश भर में लागू होना चाहिए नियम
याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि, पिछली सर्दियों में वह अमृतसर गए थे, वहां उन्हें पता चला कि अमृतसर का प्रदूषण तो दिल्ली से भी बदतर है, इसलिए सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि पूरे देश में पटाखों पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा, इसलिए कि दिल्ली देश की राजधानी है और यहां सुप्रीम कोर्ट स्थित है, इसलिए ये प्रदूषण मुक्त होनी चाहिए, तो क्या अन्य शहर में रह रहे नागरिकों को प्रदूषण मुक्त हवा का अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा, पटाखों पर बैन लगाने का जो नियम है, वह सिर्फ दिल्ली पर ही नहीं बल्कि पूरे देश पर लागू होना चाहिए। पूरे देश में पटाखा प्रतिबंधित होना चाहिए।
ठोस कदम उठाना जरूरी

सरकार का पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने दलील दी कि, सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली की स्थिति बद से बदतर होने लगती है। यहां की हवा में इतना जहर घुल जाता है कि लोगों का दम घुटने लगता है। आखों में जलन होने लगती है। आलम ये रहता है कि, लोगों का घरों से निकलना दूभर हो जाता है। अपराजिता ने कहा, दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए जरूरी है कि इसे रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाएं।
बाहर चले जाते हैं एलीट क्लास के लोग

उन्होंने कहा- दिल्ली में रहने वाले एलीट क्लास के लोगों को यहां के प्रदूषण का खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता क्योंकि जब दिल्ली में प्रदूषण की अधिकता होने लगती है तो वे राजधानी से बाहर चले जाते हैं, लेकिन सामान्य और लोअर वर्ग के लोगों को इसी प्रदूषण में रहना पड़ता है। उन्होंने कहा, जब दिल्ली में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध सहित आपातकालीन उपायों का प्रस्ताव रखा गया था, उस वक्त भी अदालत ने यह सुनिश्चित किया था कि, काम के नुकसान से प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा दिया जाए।
22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
इस पर कोर्ट ने कहा- जब हम काम पर प्रतिबन्ध लगाते हैं, तो श्रमिक वर्ग के लोग बिना काम के रह जाते हैं। फ़िलहाल, कोर्ट अगली सुनवाई पर मामले की जांच करने के लिए सहमत हो गई है। साथ ही केंद्र से, नीरी (National Environmental Engineering Research Institute) के परामर्श से, आवेदनों पर अपना जवाब देने और हरित पटाखों के निर्माण पर एक और स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को भी यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई दशहरा और दिवाली त्योहारों से पहले 22 सितंबर करना तय किया है।
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