
Obesity Expenses in India: मौजूदा समय में मोटापा दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। भारत भी समस्या से अछूता नहीं है। इसकी वजह से जहां एक तरफ कई जानलेवा बीमारियां जन्म ले रही हैं। वहीं दूसरी तरफ जेब पर भी बोझ बढ़ रहा है। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि मोटापा सिर्फ शारीरिक सेहत के लिए नहीं बल्कि देश की आर्थिक सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसका खुलासा हाल ही में हुए एक शोध में हुआ है।
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6.7 लाख करोड़ हो जायेगा आर्थिक बोझ

भारत में बढ़ रहे मोटापे के लेकर हुए शोध में दावा किया गया है कि भारत में 2030 तक मोटापे का आर्थिक बोझ बढ़कर 6.7 लाख करोड़ हो जायेगा। यानी एक व्यक्ति पर मोटापे का खर्च 4,700 रूपये आएगा, जिसका टोटल खर्च देश की जीडीपी का 1.57% है। ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी द्वारा जारी किए गये आंकड़ों पर गौर करें तो मोटापे का आर्थिक बोझ निरंतर बढ़ रहा है। ये साल 2019 में 2.4 लाख करोड़ रुपए था, जो लगभग 1,800 रुपए प्रति व्यक्ति था, लेकिन आने वाले साल 2030 तक यह बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपए हो सकता है। ऐसे में समय रहते इस पर नियन्त्रण पाना जरूरी हो गया है, अन्यथा स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
पीएम मोदी भी कर चुके हैं ‘मन की बात’ में जिक्र

इस नये शोध में ये भी कहा गया है कि, अगर इसे रोका नहीं गया तो साल 2060 तक यह आंकड़ा बढ़कर 69.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो प्रति व्यक्ति 44,200 रुपए तक हो जाएगा। उस वक्त इसका खर्च कुल जीडीपी का 2.5% हो जाएगा। इस रिसर्च को देख कर साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या पर होने वाला खर्च अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में ‘मन की बात’ में मोटापे की समस्या का जिक्र किया था और लोगों से इसे कम करने की अपील की थी। उन्होंने मोटापे को एक मुहिम की तरह लेने को कहा है। पीएम ने इसे सेहत के लिए खतरनाक बताया है।
हेल्थ सिस्टम और इकोनॉमी पर बढ़ेगा दबाव

नेशनल फैमिली हेल्थ द्वारा किये गये सर्वे-5 के मुताबिक, भारत में 44% पुरुष और 41% महिलाएं मोटापे का शिकार हैं जबकि पिछले सर्वे में ये आंकड़ा क्रमशः 37.7% और 36% था। यानी 37.7% पुरुष और 36% महिलाएं मोटापे का शिकार थीं। देश में तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, आने वाले समय में मोटापे का आर्थिक असर इतना अधिक हो सकता है कि इससे हेल्थ सिस्टम और इकोनॉमी दोनों प्रभावित हो सकते। साथ ही व्यक्तिगत तौर और राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।
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