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What Is Ghibli: क्या है घिबली, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ गई है बहस

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What Is Ghibli

नई दिल्ली। What Is Ghibli: दुनियाभर में सोशल मीडिया पर इस समय जो एक चीज हर प्रोफाइल पर दिख रही है, वो है घिबली आर्ट। एक्स से लेकर इंस्टाग्राम और फेसबुक तक, लोग लगातार एआई के जरिए अपनी और सेलेब्रिटीज की कार्टून जैसी तस्वीरें देखते और इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। इन सबके बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की पहुंच और इसके खतरों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, जापान की कॉमिक बुक्स और कार्टून शो के लिए इस्तेमाल होने वाली घिबली आर्ट, जिसे बनाने में कभी कई दिन से लेकर महीनों तक का समय लगता था, अब एआई ने उन्हें महज कुछ सेकंड या मिनटों में बनाना शुरू कर दिया है।

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 कहां से हुई शुरुआत

ऐसे में सवाल ये है कि आखिर ये घिबली आर्ट क्या है? इसकी शुरुआत कहां से हुई? चैटजीपीटी ने इसे वायरल ट्रेंड कैसे बनाया? इस फीचर का इस्तेमाल कौन कर सकता है? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी जापानी स्टूडियो की आर्ट को बार-बार बनाना कानूनी तौर पर कितना सही है? घिबली की शुरुआत करने वाले कलाकारों का इस बारे में क्या कहना है? और इस आर्ट को लेकर एआई की पहुंच को लेकर क्या चर्चाएं हैं? आइए जानते हैं…

 हल्के पेस्टल रंगों से बनाई जाती है घिबली

घिबली तस्वीरों की खास बात यह है कि, इसके किरदार हाथ से बनाए आते थे। इनमें हमेशा हल्के पेस्टल रंगों का इस्तेमाल किया जाता था और चमक-दमक से दूर दिखाया जाता था। घिबली कला विश्लेषकों का कहना है कि, घिबली की सादगी और शांति ही लोगों को आकर्षित करती है। ऐसे में कुछ सालों में ही इस स्टूडियो ने करोड़ों लोगों को अपना मुरीद बना लिया है। चैटजीपीटी ने पिछले मंगलवार को अपना बिल्ट-इन इमेज जेनरेशन फीचर लॉन्च किया। ओपनएआई के जीपीटी-4ओ टूल ने एआई चैटबॉट को घिबली स्टाइल की तस्वीरों को प्रोसेस करने के फीचर से जोड़ा। नतीजा यह हुआ कि एआई ऐसी तस्वीरें बनाने लगा, जो जापानी एनिमेटर हयाओ मियाजाकी के हाथ से बनाई गई कला जैसी लग रही थीं। इसके चलते बुधवार तक पूरी दुनिया में घिबली की तस्वीरें वायरल होने लगीं।

वायरल हो रहा चैटजीपीटी का ये खास फीचर

हैरान करने वाली बात यह है कि, यूजर्स के निर्देश के आधार पर घिबली स्टाइल में तस्वीरें तैयार करने की चैटजीपीटी की क्षमता ने इसे अन्य चैटबॉट से अलग खड़ा कर दिया। मेटा एआई और एक्स के ग्रोक अभी भी घिबली स्टाइल की तस्वीरों में मियाज़ाकी की पेंटिंग्स जैसी बारीकियां नहीं ला पा रहे हैं, लेकिन चैटजीपीटी का यह खास फीचर कुछ ही समय में वायरल हो रहा है। घिबली आर्ट को लोग किस हद तक इसे पसंद कर रहे हैं,  इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, सोशल मीडिया पर बॉलीवुड फिल्मों से लेकर मशहूर हस्तियों, लोगों की खुद की प्रोफाइल पिक्चर्स, निजी यादों की तस्वीरों से लेकर खेल के दृश्यों तक सब कुछ घिबली स्टाइल में तब्दील हो चुका है। 2024 के पेरिस ओलंपिक से लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क तक, सबसे ज्यादा घिबली फॉर्म दुनिया में आए हैं।

पिघलने लगा जीपीयू 

घिबली बनाने के लिए चैटजीपीटी पर अभी भी होड़ मची है। कुछ उपभोक्ता ने पहले एक्स (x) पर पोस्ट कर बताया था कि, घिबली संस्करण वीडियो चैटजीपीटी के प्रीमियम संस्करण में बनाया जा सकता है। हालांकि, बाद में कई उपभोक्ताओं ने पाया कि यह मुफ़्त संस्करण में काम कर रहा है। इसके बाद चैटजीपीटी उपभोक्ताओं के बीच में घिबली में बदलाव की होड़ लग गई। इसी बीच सैम अल्टमैन ने एक्स पर ट्वीट कर बताया कि उनका जीपीयू (GPU) पिघल’ रहा है।

GPU पर बढ़ा प्रेशर

असल में, चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट सैंड से प्लॉट को क्रिएट करने के लिए ग्राफिकल सर्च यूनिट यानी जीपीयू का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रेंड के बढ़ने से इन GPU में प्रेशर बढ़ जाता है और ये ओवरहीट हो जाता है, जिससे अव्यवस्थित हो जाता है। ऐसे में GPU को नुकसान से बचाने के लिए कुछ उद्यमियों को लाभ या सीमित करना पड़ता है। सैम अल्टमैन ने पोस्ट किया- “यह देखने में बहुत अच्छा लग रहा है कि, लोग चैटजीपीटी से बनी हुई फोटो को पसंद कर रहे हैं, लेकिन हमारी जीपीयू पिघल रही है। हम इसे और अधिक कुशल बनाने के लिए अस्थायी रूप से कुछ दर सीमाएं लागू करने जा रहे हैं। उम्मीद है कि, इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा! चैटजीपीटी फ्री टियर को जल्द ही प्रतिदिन 3 जनरेशन मिलेंगी।”

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ChatGPT प्लेटफार्म हुआ क्रैश

हालांकि, उनकी इस पोस्ट पर शायद ही किसी ने ध्यान दिया हो, क्योंकि शनिवार-रविवार को इतने सारे घिबली क्रिएटर ChatGPT से जुड़े कि प्लेटफॉर्म क्रैश हो गया। इसके बाद ऑल्टमैन ने पोस्ट कर कहा कि, क्या आप सभी कृपया इमेज का जेनरेशन थोड़ा कम कर सकते हैं? हमारी टीम को नींद की जरूरत है! ChatGPT अपने लेटेस्ट मॉडल GPT-4o का इस्तेमाल कर रहा है। इस मॉडल से घिबली इमेज जेनरेशन संभव हो पाया है। इसका सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि, यह स्टूडियो घिबली के मशहूर कार्टून स्टाइल को बखूबी दोहरा सकता है। आप भी आसानी से घिबली इमेज जेनरेट कर सकते हैं…

एआई की पहुंच को लेकर विवाद

दुनिया में घिबली की तस्वीरें वायरल होते ही इसे लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। सबसे बड़ा विवाद AI की पहुंच को लेकर है। दरअसल, सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर विवाद है कि, कैसे AI कुछ ही पलों में कलाकारों के क्रिएटिव कामों को कॉपी कर लेता है। वो भी उन्हें इसके लिए जरूरी क्रेडिट और आर्थिक मुआवजा दिए बिना। चैटजीपीटी ने खुद कई ऐसे उपयोगकर्ताओं को संदेश भेजा जो प्रीमियम सेवा का उपयोग नहीं कर रहे थे कि, वह कॉपीराइट वाले एनीमेशन स्टूडियो के समान छवियां नहीं बना सकता, क्योंकि इसकी कला शैली सुरक्षा मानकों के अंतर्गत आती है। इसके बावजूद, कुछ ही घंटों बाद, चैटजीपीटी पर लोगों ने फिर से घिबली छवियां बनाना जारी रखा।

क्या कानूनों का उल्लंघन है

कानूनी विशेषज्ञों का मानना ​​है कि, ओपनएआई जो कर रहा है, वह न तो कानूनी तौर पर सही है और न ही कानूनों का पूरी तरह उल्लंघन है। यानी घिबली इमेज बनाना बीच के ग्रे जोन में आता है। अमेरिकी लॉ फर्म नील एंड मैकडेविट के बौद्धिक संपदा वकील इवान ब्राउन के मुताबिक घिबली कला शैली कॉपीराइट कानून के तहत संरक्षित नहीं है। सिर्फ इसके किरदारों और कहानियों को ही संरक्षित किया जा सकता है। यानी सिर्फ ऐसी तस्वीरें बनाकर ओपनएआई कोई कानून नहीं तोड़ रहा है।

अदालतें कर रहीं विचार

हालांकि ब्राउन ने स्पष्ट किया कि हो सकता है कि ओपनएआई ने जापानी स्टूडियो की क्रिएटिव तस्वीरों के आधार पर अपने मॉडल को ट्रेंड किया हो यानी मिलती-जुलती तस्वीरें बनाने का कमांड दिया हो। इससे सवाल उठता है कि, अगर आप हमारे काम को सीधे कॉपी नहीं कर सकते तो फिर मिलते-जुलते काम बनाना शुरू कर दें।  उन्होंने बताया कि कई अदालतें अब इस बात पर विचार कर रही हैं कि क्या एआई डेवलपर्स अपने मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट किए हुए काम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आलोचकों ने शेयर किये हयाओ मियाज़ाकी के पुराने वीडियो

इस बीच, कॉपीराइट के मुद्दों पर एआई-जनरेटेड मॉडलों को अदालत में घसीटने वाली कलाकार कार्ला ऑर्टिज़ ने घिबली आर्ट के बारे में कहा कि यह स्पष्ट है कि ओपनएआई जैसी कंपनियां अब कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों और इसके जरिए अपनी आजीविका चलाने वाले लोगों के काम की परवाह नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि, ओपनएआई अपने मॉडल को बढ़ावा देने के लिए घिबली के नाम और ब्रांड का इस्तेमाल कर रही है, जो सीधे तौर पर कॉपीराइट का उल्लंघन है। एआई-जनरेटेड घिबली तस्वीरों के आलोचकों ने एक्स पर हयाओ मियाज़ाकी के कुछ पुराने वीडियो पोस्ट किए हैं। इनमें घिबली आर्ट के संस्थापक ने कभी एआई-जनरेटेड तस्वीरों की कड़ी आलोचना की थी और इसे जीवन का अपमान बताया था।

2016 में की थी एआई की आलोचना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो 2016 का है जिसमें वह एआई की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह ‘जीवन का अपमान’ है और उन्हें इस तरह की सामग्री देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मियाज़ाकी कहते हैं, “मैं ऐसी चीज़ें देखकर रोमांचित नहीं हो सकता, इसे बनाने वाले लोग दर्द के एहसास को नहीं समझते, मैं इससे बेहद निराश हूं और अपनी कला में इस तकनीक को कभी नहीं अपनाना चाहूंगा, मेरे हिसाब से ये जीवन का अपमान है।” उनका मानना ​​है कि कला का असली सार तभी झलकता है जब इंसान अपने अनुभव, दर्द, खुशी और भावनाओं को तस्वीरों और कहानियों में पिरोता है, लेकिन एआई आधारित एनिमेशन इस गहराई से कोसों दूर है।

 

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