
नई दिल्ली। Gold-Silver Crash: इस समय सोने-चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। ये दोनों ही धातुएं आज के समय में एक लाख से अधिक की कीमत पर मिल रही हैं। इस महंगाई की मुख्य वजह है इस समय कई देशों के बीच चल रहा संघर्ष और ट्रंप की टैरिफ नीति। ऐसे में अगर दुनिया में शांति का माहौल बनता है, जिसकी कोशिश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता संभालने के बाद से ही कर रहे हैं, तो सोने के दामों में भारी गिरावट आ सकती हैं। दरअसल, इस समय कई ऐसे संकेत मिल रहे हैं, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि अब वह दिन बहुत दूर नहीं है, जब सोने और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।
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शेयर बाजार पर बढ़ेगा निवेशकों का भरोसा

आपको बता दें कि, सोने और चांदी को हमेशा से ही सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। जब भी दुनिया में युद्ध का माहौल बनता है, तो निवेशक सोने में अधिक इन्वेस्ट करने लगते हैं, क्योंकि अनिश्चितता के माहौल में हर चीज में दामों के गिरावट आने की आशंका होती है, लेकिन सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन जब सब कुछ शांत होने लगता है, तो सोने और चांदी के दाम भी गिरने लगते हैं।
आइये जानते हैं चार बड़े कारण जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि, आने वाले दिनों में सोना एक लाख रूपये प्रति 10 ग्राम से नीचे लुढ़क सकता है और चांदी भी एक लाख रूपये प्रति किलो से नीचे आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, ट्रंप की कोशिशें रंग लाती हुई नजर आ रही हैं, कई देशों के बीच रिश्ते सुधरने लगे हैं, युद्धरत देश भी जल्द ही शांति समझौते की और बढ़ सकते हैं, जिससे निवेशक शेयर बाजार की तरफ बढ़ सकते हैं। नतीजतन, सोने-चांदी के दाम कम हो सकते हैं।
पहला कारण- अमेरिका और चीन में ट्रेड डील

बता दें कि, चीन और अमेरिका दुनिया के दो बड़े शक्तिशाली देश हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इनके बीच ट्रेड वार, और सप्लाई चेन की वजह से तनाव की स्थित उत्पन्न हो गई थी, लेकिन अब खबर आ रही है कि, दोनों देशों के बीच ट्रेड डील होने वाली है। इसके लिए दोनों देशों के बीच कुछ समय से लगातार सकारात्मक बातचीत चल रही है। अगर दोनों देशों के बीच ट्रेड डील फ़ाइनल हो जाती है, तो निवेशकों का भरोसा शेयर बाजारों पर फिर से बढ़ने लगेगा, जिसका सोने की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इसके दाम गिरने लगेंगे। जानकार बताते हैं कि, चीन और अमेरिका दोनों ही सोने का भंडार तेजी से बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में जबर्दस्त उछाल देखने को मिल रहा है।
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दूसरा कारण- इजरायल-हमास संघर्षविराम

दुनिया की अर्थव्यवस्था पर मिडिल ईस्ट की धरती भी खूब असर डालती है। इस धरती पर अगर कुछ भी होता है, तो उसका सोने-चांदी की कीमतों पर भी असर पड़ता है। यहां हमास-इजराइल युद्ध लंबे समय से चल रहा है, जिससे न सिर्फ मानवता पर संकट छाया हुआ है, बल्कि ग्लोबल बाजार में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसकी वजह से भी निवेशक सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे हैं और सोने में निवेश कर रहे हैं। अगर दोनों देशों में बीच संघर्ष विराम की स्थिति बनती है, तो इसका सीधा असर सोने के दामों पर पड़ेगा और सोने की चमक फीकी पड़ने लगेगी।
तीसरा कारण- भारत-अमेरिका ट्रेड समझौता

चीन और अमेरिका के अलावा भारत भी दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है और इन दिनों भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में अगर दोनों देशों के ट्रेड रिश्तों में मजबूती आती है, तो इसका सीधा असर सोने के दामों पर पड़ेगा। खबर है कि, एक नए ट्रेड पैक्ट से भारत को विदेशी निवेश मिलेगा, रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। रूपये में मजबूती आने पर भारत में सोना खरीदना सस्ता हो जायेगा। ऐसे में जो निवेशक सोने में पैसा लगाने की प्लानिंग कर रहे हैं, उनके लिए आने वाला समय काफी राहत देने वाला होगा।
चौथा कारण- पाकिस्तान-अफगानिस्तान में सीजफायर

मध्य पूर्व के अलावा बीते कुछ समय से दक्षिण एशिया में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय निवेशक संभल का इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं। ऐसे में अगर पाकिस्तान और तालिबान के बीच संघर्षविराम होता है, तो यहां आर्थिक स्थिरता और विश्वास बढ़ेगा, जो निवेशकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करेगा। हालांकि, इन दोनों देशों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कोई बड़ा योगदान नहीं है, लेकिन जब शांति का माहौल बनता है, तो निवेश के रास्ते खुलते हैं और विकास शुरू होता है। शांति के माहौल में ही निवेशक शेयर बाजारों की तरफ लौटते हैं, तो सोने की मांग घटने लगती है और दाम भी गिरने लगते हैं।
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