
नई दिल्ली। Crude Oil: दुनिया के चुनिन्दा कारोबारियों में शामिल भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इन दिनों वेनेजुएला से तेल खरीदने को लेकर सुर्ख़ियों में है। ये तेल वह अमेरिका के जरिये खरीदेगी। माना जा रहा है कि ये तेल रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए महंगा पड़ेगा, बावूजद इसके वह इसे खरीदने की तैयारी में है।
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एक्सपर्ट ने शेयर की पोस्ट

इस बारे में नॉन-प्रॉफिट थिंक टैंक, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) के एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि, मिडिल ईस्ट देशों के मुकाबले वेनेजुएला से ऑयल खरीदना ऑयल रिफाइनिंग कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को महंगा पड़ेगा, लेकिन फिर भी वह अमेरिका से वेनेजुएला का तेल खरीदने का इंतजार कर रही है।
ट्रंप प्रशासन को राजनीतिक संकेत देना है मकसद
चेलानी ने कहा, अंबानी की कंपनी, वेनेजुएला से उस अमेरिका के माध्यम से क्रूड आयल खरीदेगी, जिसने वहां हाल ही में बड़े पैमाने हमला किया और रातों रात वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अपने देश लेकर आ गया। ब्रह्म चेलानी ने कहा, वेनेजुएला का कच्चा तेल असल में शिपिंग कॉस्ट के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज को मिडिल ईस्ट की सप्लाई से महंगा पड़ेगा, लेकिन वह इस महंगाई को उठाने को तैयार है। दूसरे शब्दों में कहे, तो भारतीय कंपनी द्वारा की जाने वाली तेल की यह खरीद मुख्य रूप से ट्रंप प्रशासन को एक राजनीतिक इशारा देना है।
पैसों पर रहेगा ट्रंप का कंट्रोल
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो वेनेजुएला का लाखों बैरल तेल वहां के समुद्री टैंकरों और जहाजों में अटका हुआ है, जिनमें से 30-50 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल को अमेरिका मार्केट प्राइस पर दूसरे देशों को बेचने की योजना बना रहा है। ये भी कहा जा रहा है कि, इस ऑयल से मिलने वाले पैसे पर ट्रंप का कंट्रोल में रहेगा और इसका इस्तेमाल वे वेनेजुएला और अमेरिका के विकास में करेंगे।
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रूस से ऑयल खरीदने से बच रहे देश

गौरतलब है कि, बीते कुछ महीने से रूस से क्रूड ऑयल की खरीद में कमी आई है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी प्रतिबन्ध है। ऐसे में तेल की सप्लाई बनी रहे और दूसरे देशों से भी कच्चा तेल खरीदने के रास्ते खुले रहें, साथ ही पश्चिमी दवाब से भी बचा जा सके, इसीलिए रिलायंस महंगा पड़ने के बावजूद वेनेजुएला का तेल खरीदने की तैयारी कर रहा है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल से सस्ता है वेनेजुएला का ऑयल
रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी एक और वजह मानी जा रही है, वह ये है कि, वेनेजुएला का क्रूड ऑयल, ब्रेंट क्रूड ऑयल से 5-8 डॉलर प्रति बैरल सस्ता होता है, क्योंकि वेनेजुएला के क्रूड ऑयल में सल्फर मिला होता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जाम नगर में उसकी खुद की रिफाइनरी है, जिसमें इसे प्रोसेस करने की कैपसिटी भी है। ऐसे में सप्लाई और सोर्सेज बढ़ाने के लिए वेनेजुएला का क्रूड ऑयल उसके लिए बेस्ट ऑप्शन है।
पहले भी खरीदता था वेनेजुएला से कच्चा तेल

बता दें कि, रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले भी वेनेजुएला से क्रूड ऑयल खरीदता रहा है। यहां तक कि जब पिछले साल अमेरिका ने प्रतिबन्ध लगाया था तब भी उसने वेनेजुएला से क्रूड ऑयल खरीदने के लिए लाइसेंस हासिल कर लिया था। बाद में वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने PDVSA (वेनेजुएला की तेल कंपनी) के ज्यादातर बिजनेस पार्टनर्स के लाइसेंस रद्द कर दिए थे, जिसमें अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी थी। इसके चलते रिलायंस ने वहां से तेल की सप्लाई रोक दी थी।
चेलानी ने ये भी बताया कि तेल खरीद के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका को कैसे पेमेंट करेगा। उन्होंने कहा, रिलायंस कंपनी यूएस बांड खरीद कर कच्चे तेल का पेमेंट नहीं करेगी, बल्कि वह बिक्री से मिली रकम को ग्लोबल बैंकों में US-कंट्रोल्ड अकाउंट्स में जमा करेगी, जिस पर ट्रंप प्रशासन का पूरा कंट्रोल होगा।
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