
Kharmas 2025: हिन्दू धर्म में खरमास का विशेष महत्व है। खरमास के दिनों में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। हालांकि, पूजा-पाठ, दान पुण्य और सामान्य खरीदारी की जा सकती है। कुछ खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त होते हैं। खरमास में अपनी श्रद्धा के हिसाब से दान पुण्य करना भी शुभ फलदायी होता है। इस साल खरमास 15 दिसंबर को रात 10:19 मिनट से लग रहा है। इस दिन, इस समय पर सूर्य वृश्चिक राशि से निकल कर गुरु की राशि धनु में प्रवेश करेगा। खरमास 15 दिन तक रहेगा और 14 जनवरी 2026 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खत्म हो जाएगा।
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मंदिरों में लगता है भक्तों का तांता

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि, खरमास शुरू होने के बाद शुभ कार्य नहीं किये जाते, लेकिन पूजा-पाठ और दान पुण्य करना चाहिए, इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है। खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं। इस पूरे महीने में मंत्र जप, दान, नदी स्नान और तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है। यही कारण है कि, खरमास के दिनों में अधिक से अधिक लोग पवित्र नदियों में स्नान के लिए जाते हैं। साथ ही पौराणिक महत्व वाले मंदिरों में भक्तों का तांता लगता है।
साल में दो बार लगता है खरमास
ज्योतिषियों की मानें, तो खरमास साल में दो बार आता है, क्योंकि एक साल में सूर्य एक-एक बार गुरु ग्रह की धनु और मीन राशि में प्रवेश करता है। इस तरह साल में दो बार खरमास रहता है। सूर्य साल में दो बार बृहस्पति की राशियों में एक-एक महीने के लिए गोचर करता है। इनमें 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक धनु और 15 मार्च से 15 अप्रैल तक मीन राशि में रहता है, इसलिए इन 2 महीनों में जब सूर्य और बृहस्पति की युति बनती है, तो इन दो महीनों में किसी भी तरह के मांगलिक काम नहीं होते हैं।
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मौसम में आता है अचानक बदलाव
सूर्य के राशि परिवर्तन करने के साथ ही ऋतुओं में भी बदलाव आता है। खरमास के दौरान हेमंत ऋतु रहती है। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगती हैं और मौसम भी बदलने लगता है। गुरु की राशि में सूर्य के आने से मौसम में अचानक बदलाव आने लगते हैं, जैसे, आसमान में बादल छाना, धुंध, बारिश और बर्फबारी होने के आसार बन जाते हैं। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि, धनु और मीन राशि का स्वामी बृहस्पति होता है और जब सूर्य इन राशियों में प्रवेश करता है तो खरमास दोष लगता है।
शुभ कार्यों की होती है मनाही
सूर्य की राशि में गुरु हो और गुरु की राशि में सूर्य रहता हो, तो उस काल को गुर्वादित्य कहा जाता है, इस काल में भी शुभ कार्यों की मनाही होती है। हालांकि, खरमास में श्रीराम कथा, भागवत कथा, शिव पुराण कर सकते हैं। साथ ही ग्रंथ पाठ भी कर सकते हैं। कोशिश करें कि इस महीने में कम से कम एक ग्रंथ का पाठ पूरा हो जाए। ऐसे करने से धर्म लाभ के साथ ही सुखी जीवन जीने से सूत्र भी मिलते हैं।
शुभ फलदायी होता है दान-पुण्य

ग्रथों में दिए गये सूत्रों को जीवन में उतारने से कई दिक्कतें दूर होती हैं। खरमास में दान करने से तीर्थ स्नान जितना पुण्य प्राप्त होता है। इस महीने में निष्काम भाव से ईश्वर के नजदीक आने के लिए जो व्रत किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है और व्रत करने वाले के सभी पाप खत्म हो जाते हैं। खरमास के दिनों में जरूरतमन्द लोगों की मदद करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और कष्टों से मुक्ति देते हैं। इस महीने में श्राद्ध के साथ ही दान का भी विधान है। इस महीने में अगर आप किसी तीर्थस्थल पर नहीं जा सकते हैं, तो घर के आस पास बने मन्दिर में पूजा अर्चना करें और मंत्र जाप करे। साथ ही पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, घी, तेल, अबीर, गुलाल, हार-फूल, दीपक, धूपबत्ती आदि दान करें।
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सूर्य और गुरु ग्रह होते हैं कमजोर
ज्योतिष बताते हैं कि, सूर्य एक मात्र प्रत्यक्ष देवता और पंचदेवों में से एक है। जब भी किसी शुभ काम की शुरुआत की जाती है, तो गणेश जी, शिव जी, विष्णु जी, देवी दुर्गा और सूर्यदेव की पूजा करने का विधान है। जब सूर्य अपने गुरु की सेवा में रहते हैं तो इनकी शक्ति कम हो जाती है। साथ ही सूर्य की वजह से गुरु ग्रह का बल भी कम रहता है। इन दोनों ग्रहों के कमजोर होने की वजह से इस खरमास में मांगलिक कार्यों की मनाही होती है।
इस डेट हो खत्म होगा खरमास

मान्यता है कि विवाह के समय सूर्य की स्थिति अच्छी होने से विवाह सफल होने की संभावना अधिक रहती है। ज्योतिष बताते हैं कि, खरमास में सूर्य की पूजा करना से शुभ फल मिलता है। इसलिए रोजाना सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें। सूर्य के अर्पित करने वाले जल में कुमकुम, फूल और चावल भी डाल लेना चाहिए और अर्ध्य देते समय सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जाप करते रहना चाहिए। पंचांग के मुताबिक, सूर्य के धनु राशि से निकलने और मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति होगी। इसके साथ ही खरमास खत्म हो जायेगा।
ये है पौराणिक कथा
कहा जाता है कि, भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। इस दौरान उन्हें कहीं भी रुकने की इजाजत नहीं होती, लेकिन एक बार रथ में जुड़े घोड़े लगातार चलते-चलते थक गये थे, इसे कर सूर्यदेव ने रथ रोक दिया और एक जलाशय में ले जाकर पिलाया और आराम करने के लिए छोड़ दिया। इस दौरान उन्हें एहसास हुआ कि उनका रथ नहीं रुकना चाहिए, तो उन्होंने जलाशय के पास ही मौजूद दो गधों को अपने रथ में जोड़ दिया और परिक्रमा के लिए निकल पड़े।
गधों को सूर्य का रथ खींचने के काफी मेहनत लग रही थी, जिससे रथ की गति काफी धीमी हो गई थी, जैसे-तैसे सूर्य देव ने एक मास पूरा किया, तब तक उनके घोड़े विश्राम करके वापस आ गये और फिर रथ पुनः अपनी गति से चलने लगा। इस तरह से ये क्रम हर साल चलता है और इस एक महीने को खरमास के नाम से जाना जाता है।
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