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Teachers’ Organizations: शिक्षक संगठनों ने किया स्कूलों को मर्ज करने के फैसले का विरोध

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School Teachers Association
  • आरटीई के प्रावधानों के विपरीत बाल अधिकारों को चोट पहुंचाना चाहती है सरकार -अब्दुल रसीद
  • एस सी/एस टी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने दिया सरकार के आदेश के खिलाफ ज्ञापन देने का निर्णय

अमेठी। Teachers’ Organizations: उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ,एस सी/एस टी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन और प्राथमिक शिक्षक संघ ने कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों को दूसरे विद्यालयों के साथ मर्ज करने के सरकार के फैसले का विरोध किया है। तीनों शिक्षक संगठनों ने सरकार के फैसले को आरटीई के प्रावधानों शिक्षक हित और जनहित के विपरीत बताया है।

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ज्ञापन सौंपा जाएगा

एससी/एसटी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश विद्रोही ने कहा है कि सरकार की ओर से स्कूलों को मर्ज करने से प्रधानाध्यापकों के साथ रसोइयों के पद भी खत्म होंगे। उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में रसोइये बेरोजगार हो जाएंगे। यह फैसला छात्र छात्राओं के हित के विपरीत है। एससी/एसटी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन सरकार के इस फैसले के विरुद्ध ज्ञापन देगा।

समाप्त हो रहा RTI का मकसद 

बामसेफ के जिला संयोजक और जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव भारती ने कहा कि आरटीई के प्रावधानों के अनुसार स्कूल खुद बच्चों तक पहुंचेगा इस थीम के साथ एक किमी दूरी पर खोले गए थे, ताकि प्राथमिक शिक्षा का लोकव्यापी करण हो और गरीब और वंचित परिवारों के बच्चे अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा से वंचित न हों। सरकार के फैसले से आरटीई का मकसद ही समाप्त हो रहा है। निजीकरण की पैरोकार सरकार एक तरफ प्राइवेट स्कूलों को मान्यता दे रही है, दूसरी तरफ कम छात्र संख्या की बात करके शिक्षक और छात्र हितों के साथ खिलवाड़ करते हुए परिषदीय विद्यालयों को मर्ज करना चाहती है।

स्कूलों के घट रही छात्र संख्या

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अब्दुल रसीद ने कहा कि आरटीई एक्ट -2009 से स्पष्ट है कि एक किलोमीटर दूरी पर प्राइमरी स्कूल और तीन किलोमीटर दूरी पर जूनियर हाईस्कूल होंगे। स्कूलों की स्थापना बच्चों की सुविधा हेतु दूरी के आधार पर की गई है न कि छात्र संख्या के आधार पर। विभागीय नीतियां भी परिषदीय विद्यालयों में निरंतर घटती छात्र संघ संख्या के लिए जिम्मेदार हैं। अब सरकार मर्ज को खत्म न करके मरीज को खत्म कर रही है।

बाल अधिकारों को पहुंचेंगी चोट 

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों के पास न तो कोई शासनादेश है और न ही मर्जर के सम्बन्ध में स्पष्ट क्राइट एरिया, कोई 50, कोई 30और कोई 10से कम छात्र संख्या पर स्कूलों के मर्जर का आदेश निकाल रहा है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों को मर्जर करके सरकार प्राइवेट स्कूलों को मजबूत करना चाहती है। यद्यपि सरकार ने अभी तक कोई भी शासनादेश निर्गत नहीं किया है, फिर स्कूलों को मर्जर करने का सरकार का विचार शिक्षक और छात्र छात्राओं के हितों के विपरीत है, इससे बाल अधिकारों को भी चोट पहुंचेगी।

शिक्षा मित्र एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कनौजिया ने भी स्कूलों को मर्जर करने की प्रक्रिया का विरोध किया है और कहा है कि इससे गरीबों के बच्चे अनिवार्य और नि:शुल्क शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।

 

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