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धारा 370 हटने से पूरा हुआ एक विधान, एक प्रधान, एक निशान का संकल्प
अम्बिकापुर। Dr. Shyama Prasad Mukherjee Jayanti: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रवाद के प्रणेता थे। उन्होंने जिस भारत और भारतीयता की तस्वीर देखी थी, आज वही चरितार्थ हो रही है। यह बातें श्री साईं बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जंयती के अवसर पर प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही। उन्होंने कहा, 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय का कुलपति बनना गर्व की बात है। डॉ. मुखर्जी दो बार कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे और नयी परम्परा को लागू करते हुए बांग्ला में दीक्षांत समारोह आयोजित कराया तथा गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगौर जिसके मुख्य अतिथि थे।
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अतिथियों को पुष्प गुच्छ प्रदान किया

इससे पहले अतिथियोंं ने मां सरस्वती, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया गया।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संस्मरण सुनाए

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संस्मरण सुनाते हुए कला एवं समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. आर.एन. शर्मा ने कहा, उन्होंने जनसंघ की स्थापना की जो बाद में भारतीय जनता पार्टी बन गयी। हिन्दू महासभा के साथ समाज सेवा के लिए तत्पर रहते हुए उन्होंने चुनाव में भागीदारी की। अंतरिम सरकार के उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने भिलाई, खादी ग्रामोद्योग, दामोदर घाटी परियोजना, हीराकुंड बांध जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये।
भारत-पाकिस्तान के समझौते का किया था विरोध

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार तिवारी ने कहा, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत विभाजन के दौरान आबादी के अनुसार बंगाल का विभाजन कराया जिससे कोलकाता जैसा शहर और आसपास के जिले भारत के अंग बन सके। डॉ. मुखर्जी ने भारत-पाकिस्तान के समझौते का विरोध करते हुए इस्तीफा भी दे दिया था।
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उन्होंने एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान जैसी व्यवस्था का विरोध किया। कश्मीर में परमिट व्यवस्था का विरोध करते हुए रावी नदी पुल पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनकी शहादत भारत के लिए एक निशान, एक विधान, एक प्रधान का पर्याय बन गयी जो धारा 370 के हटने से पूरी हुई। उन्होंने महाबोधि सोसायटी के लिये निरंतर काम किया। श्रीलंका में तथागत बुद्ध के दो शिष्य सारिपुत्ता और महामुद्गलयान के अवशेष को सांची में स्थापित कराया।
आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान

कार्यक्रम का संचालन करते हुए सहायक प्राध्यापक देवेन्द्र दास सोनवानी ने सभी को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान वाणिज्य एवं प्रबंध विभाग के अध्यक्ष राकेश कुमार सेन, कम्प्यूटर एंड आईटी के अध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार शाक्य, फिजीकल साईंस विभाग के अध्यक्ष डॉ. शैलेष देवांगन तथा समस्त प्राध्यापक और बी.एससी बी.एड के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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