
लखनऊ। Exam Cancelled: पिछले साल 16-17 अप्रैल को हुई असिस्टेंट भर्ती परीक्षा में बड़ी अनियमितता मिलने के बाद अब सरकार ने इसे रद्द कर दिया है। दरअसल, परीक्षा में सेंधमारी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है।
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10-12 लाख रुपए लिए एडवांस में

गिरोह ने इस परीक्षा के कई अभ्यर्थियों से 35-35 लाख की डील की थी और एडवांस के तौर पर 10-12 लाख रुपए ले भी लिए थे। बाकी की रकम परीक्षा के कुछ दिन बाद लेने की योजना थी, लेकिन इससे पहले ही एसटीएफ ने गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में कई बड़े जिम्मेदारों की भूमिका भी सामने आने की आशंका है।
पुलिस ने फ़ाइल की चार्जशीट
धांधली की शिकायत सामने आने बाद एसटीएफ ने विभूति खंड थाने में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल, उनका भाई विनय कुमार और महबूब अली को अरेस्ट कर लिया गया। बताया जा रहा है कि, महबूब अली आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ चार्जशीट फ़ाइल कर दी थी।
अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये वसूले

मामले की जानकारी देते हुए डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि बाद में मामले की दोबारा विवेचना के आदेश दिए गए, इसके बाद जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। जब एसटीएफ जांच शुरू की तो भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई धांधली की परतें उजागर होने लगी। जांच में ये भी पता चला कि गिरफ्तार सदस्यों के साथ ही अन्य लोगों ने अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये वसूले थे।
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मैच हो रहा डाटा
एसटीएफ ने पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल खंगाले, तो उसमें कई अभ्यर्थियों के डाटा बरामद हुए, जिसमें एक दो नहीं बल्कि दजनों मोबाइल नबंर भी थे, जिसे आयोग द्वारा भेजे गये अभ्यर्थियों के डाटा से मिलान किया गया तो वह पूरी तरह से मैच हो गया। इससे स्पष्ट हो गया कि आरोपियों ने पूरी प्लानिंग करके परीक्षा में सेंधमारी की थी।
कई और गिरफ्तारियां होने की आशंका
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी… वैसे-वैसे कई और कड़ियां सामने आती गईं। नतीजतन, असिस्टेंट भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया गया। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है। सूत्रों की मानें तो, जांच के दायरे में कई अधिकारी और कर्मचारी भी आ सकते हैं। फ़िलहाल, अभी उन्हीं की गहन जांच की जा रही है, जिनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। माना जा रहा है कि, आने वाले समय में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
अभ्यर्थियों ने उठाए थे सवाल

गौरतलब है कि, असिस्टेंट भर्ती परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने कई मुद्दों पर सवाल उठाए थे और धांधली का आरोप लगाया था। यहां सबसे बड़ा सवाल उठा था परीक्षा में रेंडमाइजेशन न होना। आपको बता दें कि, परीक्षा भर्तियों में नकल माफियाओं की सेंधमारी के बराबर आरोप लगते रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि, नकल माफिया एक साथ फॉर्म भरकर रोल नंबर आवंटित करा लेते हैं और पैसे लेकर उस पर अलग-अलग सॉल्वर बैठाकर परीक्षा दिला देते हैं और अपने अभ्यर्थी को पास करा देते हैं।
नियमों का पालन नहीं होने का आरोप
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि, परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे भी पर्याप्त संख्या में नहीं लगाये गये थे, जिससे नकल विहीन परीक्षा के दावे बेकार साबित हो गये। अभ्यर्थियों का कहना है कि, आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर 45 मिनट पहले पहुंचने का नियम लागू किया था, लेकिन कई केंद्रों पर इस नियम का पालन नहीं किया गया और निर्धारित समय के बाद आने वालों को भी परीक्षा में बैठने का मौका दिया गया। बताया जा रहा है कि, एसटीएफ ने आयोग के एक आउटसोर्स कर्मचारी को पकड़ा है, जिस पर आरोप है कि वह परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रहा था।
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