
बृजेश तिवारी सेवादार ने छेड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन
लालगंज,प्रतापगढ़। UGC Regulations 2026: प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन–2026 के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए प्रावधानों को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं।
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इस मुद्दे पर सबसे पहला संगठित विरोध लालगंज क्षेत्र से सामने आया है, जिसकी अगुवाई समाजसेवी एवं जननेता बृजेश तिवारी सेवादार ने की है। उनके इस विरोध की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई देने लगी है। बृजेश तिवारी सेवादार ने यूजीसी के नए रेगुलेशन को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा में समानता के नाम पर किसी विशेष वर्ग के साथ अन्याय करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
उन्होंने इसे सवर्ण समाज के अधिकारों पर आघात करार देते हुए “काला कानून” की संज्ञा दी। इस मुद्दे को लेकर बृजेश तिवारी सेवादार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यूजीसी के इस नए रेगुलेशन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। उन्होंने देशभर के सवर्ण समाज से अपील की कि वे जाति, क्षेत्र और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होकर विरोध दर्ज कराएं।
उनके इस आह्वान के बाद सोशल मीडिया, शैक्षणिक संगठनों और विभिन्न सामाजिक मंचों पर बहस तेज हो गई है। कई राज्यों में लोग खुलकर यूजीसी के इस रेगुलेशन पर सवाल उठा रहे हैं और इसे लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। बृजेश तिवारी सेवादार ने कहा कि यह लड़ाई किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि शिक्षा में न्याय और समान अवसरों की रक्षा के लिए है। यदि आज हमने इस भेदभाव के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
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