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Parveen Bobby Life: सिनेमाई पर्दे पर आत्मविश्वासी महिला का किरदार निभाने वाली परवीन बॉबी को जीवन भर मिला अकेलेपन का दर्द

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Parveen Bobby Life

Parveen Bobby Life: आज के समय भी जिस आजादी, आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के लिए महिलाएं दिन रात संघर्ष कर रही हैं, वह किरदार 70 के दशक की खूबसूरत एक्ट्रेस परवीन बाबी परदे पर कई बार उकेर चुकी हैं। जी हां, परवीन बॉबी उस समय की एक ऐसी एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर एक अकेली कामकाजी और बेहद आत्मविश्वासी महिला का किरदार बखूबी निभाया है। यकीन न हो तो फिल्म ‘दीवार’ का वह सीन याद कर लीजये, जिसमें एक बीयर बार में अकेले बैठे अमिताभ बच्चन के पास वह पहुंच जाती हैं और उनसे बातचीत करने लगती हैं,जबकि फिल्म में उनकी उनसे पहले कोई जान पहचान नहीं थी। ‘दीवार’ ही नहीं बल्कि परवीन बॉबी का पूरा करियर ऐसे सीन से भरा पड़ा है, जिसमें वह एक आत्मविश्वासी महिला के रूप में नजर आई हैं।

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दीवार के छोटे किरदार से मिली बड़ी पहचा

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एक ऐसी लड़की जो कामकाजी रोल निभाती है, आत्मनिर्भर है और जिसे शादी से पहले अपने पुरुष मित्रों के साथ शारीरिक संबंध बनाने में भी परहेज नहीं होता। यह सब करते हुए भी उसकी अपनी शान बनी रहती है। उस पर कहीं कोई दाग नहीं लगता और अगर लग भी जाये, तो उसे इसकी चिंता नहीं होती। परवीन बॉबी ने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘दीवार’ में भले ही छोटा सा किरदार निभाया था, लेकिन इससे उन्हें बड़ी पहचान मिली थी। यही वजह है, उनके फ़िल्मी करियर के तीन दशक बाद भी लोग  उनके किरदार को याद करते हैं और उनकी सराहना करते हैं। हालांकि, कई फिल्मों में बड़े एक्टर के सामने उनकी भूमिकाएं बेहद छोटी होती थीं, लेकिन उनकी खूबसूरत अदाएगी लोगों के दिलो दिमाग में उतर जाती थीं। लोग उनके किरदार को वर्षों तक नहीं भूल पाते थे। आपकी बता दें कि, परवीन बाबी के समय में आमतौर पर लड़कियां सूट या साड़ी पहनती थीं, जबकि परवीन का अंदाज वेस्टर्न था।

पश्चिमी अंदाज में हुआ था पालन पोषण

दरअसल, उनका पालन पोषण पश्चिमी अंदाज में किया गया था। परवीन बॉबी को फिल्म निर्देशक बीआर इशारा ने क्रिकेटर सलीम दुर्रानी के साथ साल 1973 में फिल्म ‘चरित्र’ में पहला मौका दिया था। हालांकि, ये फिल्म फ्लॉप हो गई थी, लेकिन दर्शकों के दिलों में परवीन बॉबी ने अपनी जगह बना ली। परवीन का जन्म 4 अप्रैल 1949 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ के एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। उन्होंने अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर में बीए किया था। साथ ही वह मॉडलिंग में करियर बनाने की जद्दोजहद कर रही थीं। इसी दौरान अपनी फिल्म के लिए एक नई एक्ट्रेस की तलाश में जुटे बीआर इशारा की नजर सिगरेट पीती हुई परवीन बॉबी पर पड़ गई, तभी उन्होंने परवीन को अपनी फिल्म में बतौर एक्ट्रेस लेने का फैसला ले लिया। हालांकि, इस फिल्म से परवीन को कोई खास पहचान नहीं मिली, लेकिन इसके बाद उन्हें फिल्मों में काम मिलना शुरू हो गया।

फिल्म ‘मजबूर’ से मिली पहली सफलता  

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परवीन को साल 1974 में आई अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘मजबूर’ से पहली सफलता मिली। इसके बाद उन्होंने बिग बी के साथ और भी कई फिल्में की, जो बाक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहीं, जिनमें ‘दीवार’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘शान’ और ‘कालिया’ जैसी फिल्में शामिल हैं। फ़िल्मी दुनिया के अलावा परवीन को एक और बड़ी सफलता साल 1976 में मिली, जब उन्हें प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम ने अपने कवर पर जगह दी। बता दें कि, परवीन बाबी टाइम के कवर पर जगह पाने वाली पहली बॉलीवुड एक्ट्रेस थीं।  हालांकि, अफ़सोस की बात ये है कि, एक्ट्रेस को अपनी निजी जिंदगी में उतनी सफलता नहीं मिली, जितनी उन्हें फ़िल्मी दुनिया में मिली।

कबीर बेदी के प्यार में डुबोया करियर 

परवीन की निजी जिन्दगी की बात करें, तो करियर के शुरूआती दिनों में उनका अफेयर डैनी से रहा, जो अधिक दिनों तक नहीं चल सका। डैनी ने फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में बताया था कि, वो और परवीन बाबी तीन-चार साल तक साथ रहे, इसके बाद दोनों अलग हो गए। डैनी से अलग होने के बाद परवीन बाबी कबीर बेदी के साथ रिलेशनशिप में आईं। दोनों ने 1976 में फिल्म ‘बुलेट’ में साथ काम किया था। इसी दौरान इनकी नजदीकियां बढ़ीं। परवीन के ऊपर कबीर बेदी के प्यार का ऐसा जूनून चढ़ा कि, उन्होंने अपने चमकते करियर को डुबो दिया।

प्रीतीश नंदी की सलाह पर लिखा संस्मरण

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दरअसल, उस दौरान कबीर बेदी को एक इटैलियन टीवी सीरियल में लीड रोल मिला था, जिसके लिए उन्हें यूरोप जाना था। ऐसे में परवीन भी अपने बॉलीवुड करियर को बीच में ही छोड़कर उनके साथ यूरोप शिफ्ट हो गईं। यूरोप में शुरुआत में, तो इनके बीच सबकुछ ठीक रहा लेकिन धीरे-धीरे मन मुटाव होने लगा। इससे परेशान होकर परवीन बॉबी बॉलीवुड में वापस लौट आईं। इस बार भी इंडस्ट्री ने उन्हें हाथों हाथ लिया। वापसी के दौरान एक्ट्रेस ने प्रीतीश नंदी की सलाह पर ‘द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ में संस्मरण लिखा।

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उन्होंने लिखा, ”मेरा करियर इससे बेहतर कभी नहीं रहा, मैं नंबर वन बनने की रेस में हूं, बंबई में कोई ऐसी फिल्म नहीं बन रही, जिसमें परवीन बॉबी का रोल न हो, मेरी सफल वापसी से लोग हैरान हैं, कई लोग इसे मेरी किस्मत कह रहे हैं, लेकिन मैं आपको बताना चाहती हूं कि, इसमें कोई किस्मत नहीं है, ये सब पसीने और आंसू हैं, जो टूटे दिल के साथ कड़ी मेहनत से निकले हैं, हालांकि, इस दौरान मुझे पता चल गया है कि, शो बिजनेस में रहने का अपना संघर्ष है, इसके अपने दबाव और चुनौतियां हैं, मैं इसमें इतनी खो गई हूं, कि मुझे अब इसे सहना ही होगा।”

महेश भट्ट में साथ भी थीं रिश्ते में

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बता दें कि, कबीर बेदी के साथ ब्रेकअप से पूरी तरह टूटी परवीन, इसे अपनी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट कहती हैं। इसके बाद वह महेश भट्ट के साथ रोमांस में पड़ गईं, जबकि महेश भट्ट भी कबीर बेदी की ही तरह पहले से ही शादीशुदा था। महेश भट्ट के साथ उनका रोमांस 1977 के आखिर में शुरू हुआ था और कुछ ही समय में वे अपनी पत्नी और बेटी पूजा भट्ट को छोड़ कर परवीन बॉबी के साथ रहने लगे थे। ये वो दौर था जब परवीन एक टॉप स्टार थीं और महेश भट्ट एक फ्लॉप फिल्ममेकर। महेश भट्ट ने परवीन बॉबी के साथ अपने रिश्ते पर आधारित फिल्म ‘अर्थ’ बनाई। इस फिल्म से जहां महेश भट्ट का करियर उड़ान भरने लगा, वहीं परवीन बॉबी ऐसी स्थिति में पहुंच गईं जहां उनका मानसिक संतुलन  बिगड़ने लगा। परवीन की मानसिक बीमारी को लेकर महेश भट्ट ने अपने कई इंटरव्यू में बताया कि, उन्हें पैरानॉयड सिजोफ्रेनिया हो गया था। हालांकि, परवीन बाबी ने कभी नहीं एक्सेप्ट किया कि, वे इस बीमारी से पीड़ित हैं। उन्होंने ये जरूर माना कि, वो एक जेनेटिक मानसिक बीमारी से ग्रसित थीं।

जब बॉलीवुड की चकाचौंध से बनाई दूरी

महेश भट्ट की वजह से ही परवीन बाबी आध्यात्मिक गुरु यूजी कृष्णमूर्ति के संपर्क में आईं और उनकी सलाह पर उन्होंने साल 1983 में बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। इसके बाद कुछ समय तक वह बेंगलुरु में रहीं और फिर अमेरिका चली गईं। आपको बता दें कि, ये वह वक्त था जब परवीन बाबी अपने करियर को काफी गंभीरता से ले रही थीं और अमिताभ बच्चन की छत्रछाया से बाहर निकलकर कुछ अलग करने का प्रयास कर रही थीं। उनकी मेहनत की एक झलक एक्टर जीतेंद्र के साथ उनकी फिल्म ‘अर्पण’ में भी देखने को मिली। इस फिल्म में परवीन वेस्टर्न स्टाइल से अलग नजर आई थीं। उन्होंने खुद को साड़ी में लपेटा हुआ था, लेकिन यह सब अचानक रुक गया।  उन्होंने अपनी मानसिक बीमारी का अमेरिका में भी इलाज कराया, लेकिन कुछ ख़ास फायदा नहीं है।  अपनी बीमारी के दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन समेत दुनिया के मशहूर लोगों से कहा था कि, उनकी जान को खतरा है। इसके बाद परवीन बॉबी साल 1989 में फिर से भारत आ गईं और 2005 तक बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर मुंबई में रहीं।

2005 में दुनिया को कहा अलविदा

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इस दौरान उन्होंने अपने अच्छे दोस्त डैनी से भी बात नहीं की क्योंकि परवीन को शक था कि वह अमिताभ के दोस्त हैं। इसके जिक्र करते हुए खुद डैनी ने  फिल्म फेयर में बताया था कि, एक इंटरव्यू में अमित जी ने कह दिया था कि मैं उनका अच्छा दोस्त हूं, जिसे परवीन ने पढ़ लिया था। डैनी बताते हैं कि, एक दिन जब मैं परवीन के घर पहुंचा तो उन्होंने मेरे लिए दरवाजा तक नहीं खोला। अमिताभ बच्चन को लेकर उनका संशय आख़िरी समय तक बना रहा था। बहरहाल, मानसिक बीमारी और पागलपन की हद तक अपनी मर्जी से जीने के शक भरे स्वभाव के बावजूद परवीन बाबी अपने जीवन के आखिरी दिनों तक आत्मनिर्भर रहीं, वो किसी पर निर्भर नहीं रहीं, लेकिन ये भी सच है कि जिस परवीन बाबी के घर के सामने प्रोड्यूसरों की लाइन लगी रहती थी, उन्हें उनके आखिरी दिनों में सब भूल गए थे, करीब एक दशक का स्टारडम और करीब 50 फिल्में उनकी जिंदगी के अकेलेपन को भर नहीं पाई, ये अकेलापन उन्हें आखिर तक परेशान करता रहा। अपने अकेलपन से जूझते हुए परवीन बाबी ने साल 2005 में दुनिया को अलविदा कह दिया।

 

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