
अमेरिका। US-China Tariff Dispute: बीते कुछ महीने से दुनिया में टैरिफ वार का जो संघर्ष चल रहा था, उस पर अब विराम लगता हुआ नजर आ रहा है। आज बुधवार 14 मई को दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों (चीन और अमेरिका) के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद आपसी टकराव पर ब्रेक लग गया है। दोनों ही देशों ने एक-दूसरे पर लगाये गये टैरिफ में 90 दिनों के लिए 115 प्रतिशत तक की भारी छूट का ऐलान किया है। हाई लेवल पर हुई बातचीत के बाद वाशिंगटन और बीजिंग दोनों ही उस ट्रेड वॉर को अस्थाई तौर पर रोकने के लिए तैयार हो गए, जिसकी वजह से दुनियाभर के बाजार हलचल मची हुई थी और वैश्विक स्तर पर आयात निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हो रहा था।
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आधी रात से लागू होंगी दरें

अमेरिका और चीन के बीच जेनेवा में दो दिनों तक चली गहन बातचीत के बाद चाइना से आने वाली वस्तुओं पर लगे 145 प्रतिशत के टैरिफ को घटाकर अमेरिका 30 प्रतिशत करने पर सहमत हो गया है। वहीं, चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं पर लगाये गये टैरिफ की दर को 125 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की घोषणा की है। टैरिफ में कटौती के बाद अब नई दरें वाशिंगटन में बुधवार की आधी रात से लागू हो जाएंगी। टैरिफ में की गई इस कटौती को दोनों देशों के बीच के तनाव को घटाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वाशिंगटन ने तैयार किया ब्लू प्रिंट

टैरिफ को लेकर जेनेवा में हुई चीन-अमेरिका की बातचीत से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा था कि, वाशिंगटन ने चीन के साथ एक बेहद मजबूत ट्रेड डील करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। यहां खास बात ये है कि, इसके बाद अमेरिकी व्यवसाय के लिए चीन की इकोनॉमी खुल जाएगी। ट्रंप ने ये भी कहा कि, इस डील के साथ ही, अमेरिका भी चीन के व्यवसाय के लिए अपने यहां की इकोनॉमी को खोलने की प्लानिंग करेगा। बता दें कि, डोनाल्ड ट्रंप ने जब से दूसरी बार व्हाइट हाउस में एंट्री ली है, तब से वह कई कड़े फैसले ले रहे हैं, जिससे दुनिया के कई देशों में कोहराम मचा हुआ है।
लड़खड़ा गई थी चीन की अर्थव्यवस्था
भारत भी इससे अछूता नहीं है, लेकिन ट्रंप के ट्रेड वार से सबसे प्रभावित चीन हुआ है। चीन की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है। हालांकि, बीजिंग ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए वाशिंगटन के खिलाफ लगे शुल्क को बढ़ाकर सौ फीसदी तक कर दिया था। ट्रंप के टैरिफ की वजह से वह कंपनियां बुरी तरह से प्रभावित हो रही थीं, जो अमेरिका में अपना प्रोडक्शन कर रही थीं। फ़िलहाल अब दोनों देशों ने ट्रेड वार को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिससे उन कंपनियों को भी राहत मिलेगी।
90 दिनों के लिए बनी सहमति

ट्रेड वार पर 90 दिनों की सहमति बनने के बाद अब सवाल ये उठ रहा है कि, जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी, वह खत्म हो चुकी है, तो इसका जवाब है नहीं, दोनों देशों के बीच जिस वजह से तनाव उत्पन्न हुए थे, वे मुद्दे अभी भी बरकरार हैं। बता दें कि, अमेरिका की तरफ से जो टैरिफ लगाये गये हैं, वे चीन से ज्यादा हैं। वाशिंगटन ने ड्रैगन पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज इसलिए लगाया है क्योंकि ट्रंप को शिकायत थी कि चीन से आयातित कैमिकल्स का इस्तेमाल दवा बनाने में किया जाता है।
बीजिंग ने दी चेतावनी

गौरतलब है कि, वाशिंगटन लंबे समय से बीजिंग पर फेंटाइल ट्रेड का आरोप लगा रहा है, जिससे बीजिंग इनकार करता रहा है। अमेरिका ने जहां एक तरफ इस मुद्दे पर आगे बातचीत जारी रखने का इशारा किया है। वहीं, दूसरी तरफ बीजिंग ने वाशिंगटन को चेतावनी दी है कि, वह उस पर आरोप लगाना बंद करें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, बीजिंग की इस चेतावनी के बाद जो 90 दिनों का टैरिफ पर ब्रेक लगा है, उस पर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो सकती है।
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