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Indus Waters Treaty: क्या चीन भी रोक सकता है सिन्धु नदी का पानी?, यहां जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

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Indus Waters Treaty
नई दिल्ली। Indus Waters Treaty: पहलगाम हमले के बाद भारत ने तत्काल प्रभाव से सिन्धु जल्द समझौता रद्द कर दिया था, तब से ये संधि आम जनता और मीडिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। हर कोई इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाह रहा है। संधि के रद्द होने से पाकिस्तान में जल संकट आने का खतरा गहरा गया है। इससे पड़ोसी मुल्क को कभी बाढ़ तो कभी अकाल का सामना पड़ सकता है। इन्हीं आशंकाओं के चलते पाकिस्तान ने इस महीने कि शुरुआत में संकेत दिया कि वह सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर भारत से बात करने को तैयार है। हालांकि, भारत ने इस पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन आतंकी हमले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने साफ़ कहा था कि, खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।
तिब्बत में है सिन्धु का उद्गम स्थल

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रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इससे पहले जनवरी 2025 में भी पाकिस्तान को अपनी शर्तों पर फिर से बातचीत करने के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन अब भारत इस संधि को पूरी तरह से खत्म करने की बात कर रहा है। वहीं, पाकिस्तान के नेता बराबर धमकी दे रहे हैं कि, अगर पानी रोका गया, तो ये युद्ध की शुरुआत माना जायेगा। फ़िलहाल भारत ने सिन्धु जल समझौते को रद्द किया हुआ है और कभी झेलम का तो कभी का पानी अचानक से छोड़कर पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दे रहा है।
संधि के रद्द होने बाद लोगों के मन में कई सवाल भी उठ रहे हैं। जैसे कि भारत पानी को कैसे रोक पायेगा, जबकि उसके पास पानी एक लिए पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं है। इसके अलावा सिन्धु नदी का उद्गम स्थल तिब्बत है, जिस पर चीन का कब्जा है। ऐसे में चिंता की बात ये है कि, जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर में चीन ने पाकिस्तान के साथ दोस्ती निभाई। भारत के खिलाफ उसे हथियार और मिसाइलें उपलब्ध कराई वैसे ही क्या वह सिन्धु के पानी को भी रोक सकता है? और अगर ऐसा हुआ तो भारत क्या करेगा।?
पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश

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 एक मीडिया रिपोर्ट में एक विशेषज्ञ से हुई बातचीत के आधार पर इन सभी पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। एक्सपर्ट का कहना है कि, सिंधु जल संधि को रद्द करने का मतलब पाकिस्तान के पानी रोकना नहीं है बल्कि भारत का मकसद अब पश्चिमी नदियों के नियमों पर ध्यान केंद्रित करना और इसे सुधारना है, क्योंकि भारत के पास अभी पाकिस्तान का पानी रोकने  के लिए जरूरी संसाधन नहीं है। जैसे कि उसके पास पर्याप्त डैम नहीं है और न ही उसने अभी इतनी परियोजनाओं पर काम शुरू किया है के वह पाकिस्तान के ज्यादा से ज्यादा पानी को रोक सके। हालांकि, भारत पानी के अधिक से अधिक जल  भंडारण के लिए मौजूदा बांधों से गाद निकालने का काम कर सकता है। बस इतना है कि, इस संधि को निलंबित कर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है कि अब सब कुछ पहले जैसा नहीं है।
क्या होंगी भारत की नई शर्तें?
अब भारत की हर हरकत का कड़े से कड़ा जवाब देगा। अभी तक भारत ने एक जिम्मेदार ऊपरी तटवर्ती देश की भूमिका निभाई थी, उसने पाकिस्तान के नियन्त्रण वाली नदियों पर जो भी जलविद्युत परियोजनाएं शुरू की हैं, वे संधि में बताए गए नियमों के अनुकूल है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब भारत ने साफ कर दिया है कि, अगर संधि को आगे बढ़ाना है तो नई शर्तों के साथ बढ़ाया जायेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि, जब भी संधि की शर्तों पर दोबारा से बातचीत शुरू होगी तो भारत की नई शर्तें क्या होंगी। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, इनमें सबसे पहला है संधि में शिकायत निवारण तंत्र। संधि के अनुच्छेद 9 में त्रिस्तरीय तंत्र की व्यवस्था है।
अनुच्छेद 9 को रद्द करना होगा मसकद

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इस अनुच्छेद के तहत सबसे पहले दोनों देशों के सिंधु आयुक्तों के स्तर पर विवाद उठाए जाते हैं। इसके बाद इसे विश्व बैंक द्वारा नियुक्त एक तटस्थ विशेषज्ञ के विचारार्थ दिया जाता है और आखिर में इसे हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन सीओए) के समक्ष पेश किया जाता है। आपको बता दें कि, भारत के बांधों और जलविद्युत परियोजनाओं में बाधा डालने के लिए पाकिस्तान लंबे समय से इस त्रिस्तरीय तंत्र का इस्तेमाल करता रहा है। भारत की परियोजनाओं को रोकने के लिए पाकिस्तान ने संधि के अनुच्छेद 9 का एक बार नहीं हजारों पर दुरुपयोग किया है। ऐसे में अब भारत बिलकुल भी नहीं चाहेगा कि ये तंत्र संधि का हिस्सा हो और उसकी परियोजनाओं का फैसला पाकिस्तान करे।
सिन्धु पर बांध नहीं बना रहा चीन
अब आते हैं सिन्धु नदी से जुड़ी सबसे अहम बात पर। दरअसल, सिंधु नदी तिब्बत से निकल कर भारत और पाकिस्तान को जाती है। ऐसे में सवाल ये है कि, क्या चीन इस नदी के पानी को रोक सकता है। जानकार कहते हैं ‘सैटेलाइट इमेज और अन्य जानकारियों पर गौर करें तो चीन अभी सिंधु नदी पर बांध नहीं बना रहा है। ऐसे में भारत को चिंतित होने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है। हालांकि वह बांध बनाने में बहुत माहिर है और उसके पास इससे जुड़े सारे संसाधन मौजूद है, लेकिन सिन्धु पर बांध बनाना उसकी योजना में शामिल नहीं है क्योंकि इसका उसे कोई घरेलू लाभ नहीं मिलने वाला। वहीं, पाकिस्तान दुनिया के सबसे खराब जल प्रबंधकों में से एक है।

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