
वेनेजुएला। Nobel Laureate Maria Machado: हाल ही में नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर चर्चा में आईं वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो ने भारत की तारीफ़ की। उन्होंने भारत के लोकतंत्र को दुनिया के लिए आदर्श बताया। वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए 20 साल से संघर्ष कर रहीं मचाडो ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट कहा कि, वेनेजुएला भारत का महत्वपूर्ण साथी बन सकता है और देश में लोकतंत्र बहाल होने के बाद कई क्षेत्रों में साथ काम कर सकता है।
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महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आन्दोलन से प्रेरणा

इंटरव्यू में मचाडो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने की इच्छा जताई और कहा मैं उन्हें जल्द ही स्वतंत्र वेनेजुएला में आमंत्रित करना चाहती हूं। मारिया ने भारत के लोकतंत्र की खूब तारीफ की और कहा लोकतंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आन्दोलन से प्रेरणा लेने की भी सलाह दी।
निकोलस मादुरो सरकार पर लगाए आरोप
उन्होंने कहा, शांति का मतलब कमजोरी नहीं होता, ये महात्मा गांधी ने दुनिया को दिखाया। वेनेजुएला में हुए 2024 के राष्ट्रपति चुनाव का जिक्र करते हुए मारिया ने कहा, विपक्ष ने भारी बहुमत से वो चुनाव जीता था, लेकिन निकोलस मादुरो की सरकार ने उस चुनाव को रद्द कर दिया। मचाडो ने बताया, उस वक्त उन्होंने निकोलस को शांति पूर्ण तरीके से सत्ता छोड़ने का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया और देशवासियों का सख्त दमन करने लगे।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिल रहा समर्थन

मचाडो ने इंटरव्यू में कहा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाली में उनके अहम सहयोगी हैं। साथ ही इंटर नेशनल स्तर पर भी उन्हें काफी समर्थन मिल रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि, निकोलस जल्द ही समझ जाएंगे कि देश में उनकी मनमानी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती और अब उन्हें शांति से सत्ता छोड़ देनी चाहिए। मचाडो में इंटरव्यू में भारत के सामने कुछ अहम प्रस्ताव भी रखे, जैसे कि, लोकतंत्र की बहाली के बाद भारत की कंपनियां वेनेजुएला में ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार में निवेश कर सकती हैं।
भारत से की ये अपील
इसके साथ ही उन्होंने वेनेजुएला में लोकतंत्र की स्थापना और मानवाधिकार के लिए भारत से आवाज उठाने और सहयोगी देशों में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा, भारत के लोकतांत्रिक अनुभव और ताकत से वेनेजुएला में भी लोकतंत्र की बहाली हो सकती है और उसे मार्गदर्शन मिल सकता है। आखिर में मचाडो ने एक संदेश देते हुए कहा, लोकतंत्र को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, भारत जैसे बड़े देश में लोकतंत्र बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और इससे दुनिया को सीख लेनी चाहिए।
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