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Bangladesh Violence: भारत के लिए चुनौती बना बांग्लादेश, सामने आ सकते हैं ये 5 गंभीर संकट

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Bangladesh Violence 5
निशा शुक्ला 

नई दिल्ली। Bangladesh Violence: उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई है। यहां हिन्दुओं को बराबर निशाना बनाया जा रहा है। लगभग एक साल से बांग्लादेश में फैली इस अस्थिरता का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। ये भारत के सामने 1971 के बाद का सबसे बड़ा राजनयिक और रणनीतिक संघर्ष है। इस बात का जिक्र विदेश मामलों पर संसद की एक समिति ने जिक्र किया है।

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1971 से भी अधिक बुरे हुए हालात

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कई मामलों पर गौर करें, तो बांग्लादेश में इस समय जिस तरह के हालात बने हैं, ऐसे बुरे हालात का सामना तो भारत को 1971 में हुए बांग्लादेश मुक्ति आन्दोलन के दौरान भी नहीं करना पड़ा था। हाल ही में आई काग्रेस सांसद शशि थरूर की अगुवाई वाली समिति की रिपोर्ट में जिन बातों का जिक्र किया गया है, उस पर गौर करें, तो बांग्लादेश में जारी हिंसा के चलते भारत को पांच गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है, जो भारत के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वे संकट और इसका भारत पर क्या असर पड़ रहा है।

बांग्लादेश में हुए ये तीन बड़े बदलाव

बांग्लादेश में जब से तख्तापलट हुआ है, तब वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। हालांकि, भारत ने शुरू से ही प्रगतिशील और सकारात्मक  तरीके से हालात को संभालने की कोशिश जारी रखी, जिसका लाभ दोनों देशों को मिल सके। भारत सरकार ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ हर मोर्चे पर चलने का प्रयास किया, लेकिन जिस तरह से वहां राजनीतिक परिवर्तन हुए, उससे हालात और बिगड़ते गये।

समिति ने रिपोर्ट में नेशनल सिटीजन पार्टी नाम से गठित किए गए छात्रों के एक नए सियासी संगठन, जमात-ए-इस्लामी का री रजिस्ट्रेशन होने और शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबंधित कर देने का जिक्र करते हुए गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, बांग्लादेश में हुए ये तीनों ही फैसले भारत के हित में नहीं हैं। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संकट आ सकता है।

अल्पसंख्यकों पर हमले

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संसदीय समिति की रिपोर्ट में इस बात का भी स्पष्ट जिक्र किया गया है कि ‘देश में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का दबदबा खत्म होने, युवाओं के नेतृत्व वाले राष्ट्रवाद के बढ़ने, देश में चरमपंथियों के प्रवेश करने व चीनी और पाकिस्तानी ताकतों का प्रभाव बढ़ने का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘बांग्लादेश में बिगड़े हालात के बीच भारत अगर इस समय खुद को दोबारा से स्थापित करने में असफल होता है, तो ढाका में अपनी रणनीतिक जगह खो सकता है। बांग्लादेश में इस बीते एक साल से जो हालात बने हुए हैं उसका शिकार वहां के अल्पसंख्यक खास तौर पर हिंदू हो रहे हैं।

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रिपोर्ट में एक घटना का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि, हाल ही में वहां एक हिन्दू स्वतन्त्रता सेनानी (75) और उनकी पत्नी (60) की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। ये तो महज एक उदाहरण है। यहां हिंदुओं पर न सिर्फ हमले हो रहे हैं, बल्कि उनके घर और धार्मिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिस पर लगाम लगाना भारत के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

पैनल की रिपोर्ट में भी अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले, उनके धर्म स्थलों और सांस्कृतिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 मई 2025 तक यानी मात्र आठ महीने में बांग्लादेश में 2,446 अल्पसंख्यकों पर हमले हुए, जिसका आधिकारिक डेटा मौजूद है। आज भी अल्पसंख्यकों पर बराबर हमले हो रहे हैं। हालांकि, भारत ने बार-बार इस पर चिंता जताई और वहां की अंतरिम सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग  की, लेकिन वहां कि मोहम्मद यूनुस सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

चीन की एंट्री 

आशंका जताई जा रही है कि, आने वाले समय में बांग्लादेश चीन के रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) में शामिल हो सकता है। इसे लेकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने विशेष चिंता जताई है। दरअसल, ड्रैगन ने मोंगला बंदरगाह का विस्तार करने में 370 मिलियन डॉलर खर्च किया है। चीन के इस कदम के बाद भारत ने भी अपनी सुरक्षा को मजबूती देने के मकसद से खुलना-मोंगला रेलवे लाइन में निवेश किया है।

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भारत ने चटोग्राम और मोंगला पोर्ट के इस्तेमाल के लिए समझौते भी किए हैं। बांग्लादेश में हो रही हिंसा और इन निवेश बीच ये भी खबर आई कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की कट्टरपंथी ताकतों के कहने पर चीन ने अपने यहां छिपा रखे उल्फा चीफ परेश बरुआ को ढाका में पनाह दिलवाने में सहायता कर सकता है।

शेख हसीना का भारत में होना

बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद जिस तरह से रातों रात शेख हसीना ने भारत में शरण ली और तब से यही पर रह रही हैं, ये भी भारत के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बता दें कि, बांग्लादेश बार-बार इस पर आपत्ति जता रहा है। वहीं, भारत का कहना है कि, शेख हसीना यहां सिर्फ रह रही हैं। वे यहां से बांग्लादेश की धरती पर किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि को अंजाम नहीं दे सकती हैं।

दरअसल, शेख हसीना को बांग्लादेश में हाल ही में मौत की सजा सुनाई गई है, ऐसे में वहां की मौजूदा सरकार शेख हसीना के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को भड़का रही है और भारत के खिलाफ माहौल बना रही है। यूनुस सरकार का आरोप है कि, शेख हसीना भारत में रहकर बांग्लादेश के खिलाफ राजनीतिक गतिविधि को अंजाम दे रही हैं, जिससे देश का माहौल बिगड़ रहा है। हालांकि, भारत स्पष्ट कर चुका है कि, शेख हसीना को यहां ऐसी कोई भी सुविधा नहीं दी गई है, जिससे वे राजनीतिक गतिविधि को अंजाम दे सकें।

आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा

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बांग्लादेश में इस समय जो कुछ भी हो रहा है, उसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। इससे दोनों देशों पर कूटनीतिक संकट तो आ ही रहा है, साथ ही भारत की आंतरिक सुरक्षा भी खतरे में हैं।  बांग्लादेश की यूनुस सरकार भारत विरोधी ताकतों को खुला समर्थन दे रही है। नतीजतन पाकिस्तानी सेना के माध्यम से बांग्लादेश की धरती से आईएसआई की गतिविधियां बढ़ गई हैं।

बांग्लादेश में आईएसआई की एंट्री होने का मतलब साफ़ है कि भारत-विरोधी आतंकी और उग्रवादी संगठनों को सुरक्षित पनाह मिलना। अगर ऐसा हुआ, तो आने वाला समय भारत के लिए काफी मुश्किल भरा साबित होगा।

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