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Maduro Arrested: अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला, रूस-चीन को कड़ा संदेश, जानिए- कैसे प्रभावित होगा भारत

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Maduro Arrested

नई दिल्ली। Maduro Arrested: देश के इतिहास  में 3 जनवरी 2026 की रात एक किस्से के रूप में दर्ज हो गई क्योंकि इस रात अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ न सिर्फ सैन्य कार्रवाई की बल्कि वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को  हिरासत में भी ले लिया। इस हमले में अमेरिकी आर्मी ने पहले टारगेट मिलिट्री ऑपरेशन चलाया, जिसके तहत वेनेजुएला के बन्दरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हवाई हमले कर उन्हें तबाह कर दिया ताकि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न न हो।

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वेनेजुएला को अमेरिका चलाएगा

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वेनेजुएला पर हुए इस सैन्य ऑपरेशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति में घोषणा कर दी कि, वेनेजुएला को अब अमेरिका चलाएगा। इसके साथ ही उसने ये भी संकेत दिया कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर अब उसका कंट्रोल रहेगा। ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने और उसे अपने देश ले जाने की बात भी कही।

ट्रंप के साथ ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भी बयान आया है, जिसमें अमेरिका की मंशा साफ़ झलक रही है। मार्कों ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि, उत्तरी गोलार्ध  हमारा है, रूस और चीन को यहां से निकलना होगा। इसके साथ ही उन्होंने तेल नाकेबंदी का भी ऐलान कर दिया।

नई सुरक्षा नीति को दी मान्यता

गौरतलब है कि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर 2025 में अपनी नई सुरक्षा नीति (ट्रंप कोरोलरी) को औपचारिक रूप से मान्यता दे दी है। अमेरिका की यह नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पिछले सौ साल में पहली बार पश्चिमी गोलार्ध में उसकी ताकत दिखाने का सबसे आक्रामक प्रयास माना जा रहा है। ऐसा पिछले सौ सालों में पहली बार हुआ है, जब अमेरिका ने पश्चिमी गोलार्ध में अपनी ताकत दिखाई है।

पश्चिमी गोलार्ध से प्रतिद्वन्दियों को बाहर करना है मकसद

Maduro Arrested:

माना जा रहा है कि अमेरिका यही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर लैटिन अमेरिका से लेकर चीन और रूप के साथ ही पूरी दुनिया में नजर आयेगा। वेनेजुएला पर अमेरिका का कब्जा इसी सुरक्षा नीति का प्रत्यक्ष नतीजा माना जा रहा है। ऐसे में वेनेजुएला पर हुई इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

अपनी नई सुरक्षा नीति के जरिये अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपना प्रभुत्व फिर से स्थापित करना चाहती है। उसका मकसद है कि, चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंदी अब पश्चिमी गोलार्ध से बाहर रहे, और वहां के अहम संसाधनों की सप्लाई चेन सुरक्षित रहे।

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कमजोर पड़ा रूस

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दरअसल, मादुरो के शासन में वेनेजुएला के साथ चीन, रूस और ईरान के संबध काफी प्रगाढ़ हो गये थे। चीन ने 2007 से लेकर अब तक वेनेजुएला को 60 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज दिया।  वहीं, रूस ने सैन्य सहयोग किया। ईरान से भी उसके रिश्ते मजबूत हुए। बीते साल यानी 2025 में ही रूस और वेनेजुएला के बीच एक रणनीतिक समझौता हुआ था, जिसके तहत रूस ने भरोसा दिलाया था कि संकट के समय में वह वेनेजुएला की मदद करेगा, लेकिन रूस का ये वादा अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान कमजोर पड़ गया।

ईरान पर भी सैन्य कार्रवाई कर चुका है अमेरिका

वेनेजुएला पर हुई इस कार्रवाई से पहले 2025 में अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर भी सैन्य कार्रवाई की थी और काफी तबाही मचाई थी। इन दोनों ऑपरेशन की सफलता से ट्रंप दुनिया को ये संदेश देना चाहते हैं कि अब वे निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनकी ये सोच पनामा नहर या ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर भी लागू होगी।

साल 2020 में अमेरिकी न्याय विभाग ने मादुरो पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए थे। ऐसे में अब ट्रंप प्रशासन ने मादुरो के खिलाफ की गई इस कार्रवाई को ड्रग कार्टेल से जुड़े एक शासन के खिलाफ निर्णायक कदम बताया है।

क्या है ट्रप कोरोलरी 

ट्रप कोरोलरी करीब दो सौ साल पहले यानी 1823 की मूल मुनरो डॉक्ट्रिन और बाद में आई रूजवेल्ट कोरोलरी पर आधारित है। इसके तहत अमेरिका को ‘इंटरनेशनल पुलिस पावर’ की भूमिका मिल जाती है और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी सर्वोच्चता को राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य शर्त बताया जाता है।

ट्रंप की कोरोलरी नीति ऐसे प्रतिस्पर्धियों को रणनीतिक संपत्तियों से दूर रखने की बात करती है। निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अब अमेरिका इन गठबंधनों को तोड़ना और वेनेजुएला को अपने हितों के हिसाब से चलाने की योजना पर काम कर रहा है।

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भारत पर असर 

बता दें कि, भारत और वेनेजुएला के संबंध मुख्य रूप से तेल पर आधारित हैं। ऐसे में उस पर हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और मादुरो की गिरफ्तारी पर भारत ने तटस्थता बरती है और दोनों देशों से शांति स्थापित करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही है।

हालांकि, ट्रंप की ये सुरक्षा नीति भारत की गुट निरपेक्ष नीति को चुनौती देने वाली है क्योंकि भारत अगर अमेरिका साथ जाता है तो रूस और चीन के साथ उसके संबंध प्रभावित हो सकते हैं और अगर वह रूस व चीन के साथ आता है तो अमेरिका से तनाव बढ़ सकते हैं। इधर, ट्रंप अभी भी भारत के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं और रूस से तेल खरीदने पर नया टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं।

चीन पर असर

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वेनेजुएला पर हुई इस सैन्य कार्रवाई और मादुरो की गिरफ्तारी से चीन का समीकरण बिगड़ सकता है क्योंकि उसने वेनेजुएला को सबसे ज्यादा कर्ज दिया है। साथ ही वह उसका तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी है। वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का नियंत्रण होने से उसने निर्यात की दिशा बदल सकती है जिससे ड्रैगन की उर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

ट्रंप कोरोलरी का उद्देश्य चीनी स्वामित्व को कमजोर करना भी है। भू-राजनीतिक रूप से यह लैटिन अमेरिका में चीन की रणनीति को सीमित करने में सहायक होगा। एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है कि, अमेरिका की यह कार्रवाई चीन को ताइवान या दक्षिण चीन सागर पर उसके आक्रामक कदमों के लिए एक खाका प्रदान कर सकती है।

 

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