
लखनऊ। Caste Census: जनवरी 2025 में प्रयागराज में हुए मह्कुंभ में जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से एक मीडिया चैनल से सवाल किया था कि, ‘क्या आप जाति जनगणना के पक्ष में हैं या इसे एक खतरे के रूप में देखते हैं?” तब सीएम योगी से साफ़ कहा था कि, वे इसे एक विभाजनकारी विचार के तौर पर देखते हैं। उस बातचीत में सीएम योगी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए जातीय जनगणना को हिंदुत्व को बांटने वाली मांग बताई थी। उन्होंने ये भी कहा था कि, जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दे देश की सत्ता संभाली है, तब से सबका साथ, सबका विकास के साथ कल्याणकारी योजनाएं आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कुछ लोग देश को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं।
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क्या पीएम के फैसले को चुनौती देंगे योगी

इसी बातचीत में योगी ने ये भी कहा था कि, भारत को, खासकर सनातन धर्म के अनुयायियों को ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो जाति के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। सीएम ने यह भी कहा था कि, राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को जाति, क्षेत्र या भाषा के नाम पर बांटना “देशद्रोह से कम नहीं है।” ऐसे में अब जब केंद्र में बैठी बीजेपी की ही सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला ले लिया है, तो अब इस पर योगी जी क्या कहेंगे, ये बड़ा सवाल लोगों के जेहन में उमड़ रहा है। क्या उनमें पीएम मोदी के इस फैसले को चुनौती देने की हिम्मत है, अब वे जातीय जनगणना को किस नजरिये से देखेंगे। ये सवाल सपा मुखिया ने एक प्रेस कांफ्रेस में उठाया।
अखिलेश यादव में प्रेस कांफ्रेस में चलाई क्लिप
दरअसल, हाल ही में पीएम मोदी ने जातीय जनगणना कराने पर अपनी सहमति जताई थी। इसके बाद बीते दिन यानी दो मई को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव में लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेस में सीएम योगी के उस इंटरव्यू की एक क्लिप चलाई गई। इस प्रेस कांफ्रेस में कहा गया कि, जातीय जनगणना कराने की नरेंद्र मोदी की घोषणा ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री को असहज स्थिति में डाल दिया है। बता दें कि, जहां एक तरफ केंद्र सरकार के इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता स्वागत कर रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ इस पर काफी संयमित प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी की प्रेस वार्ता – 02/05/2025 https://t.co/xPJG25CAkZ
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) May 2, 2025
हिन्दू नेता की छवि है योगी की

पीएम, नरेंद्र मोदी को बधाई देने वाले एक ट्वीट के अलावा उन्होंने इस मुद्दे पर अभी तक कोई और टिप्पणी नहीं की है जबकि उनके डिप्टी सीएम और मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी और दलितों को लुभाने में जुट गये हैं और जाति जनगणना को ‘गेम चेंजर’ के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं। साथ ही वे कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष पर इस मांग को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगा रहे हैं। अपनी कट्टर सांप्रदायिक राजनीति और ‘बटेंगे तो कटेंगे’ जैसे नारे देकर आदित्यनाथ पिछले साल के आम चुनावों में भाजपा की हिंदू एकता की राजनीति का प्रमुख चेहरा बन गए थे। इसके साथ ही वे, जाति जनगणना की मांग कर रहे विपक्षी दलों के सीधे विरोध में आ गए थे। सीएम योगी कई मौकों पर, खासकर लोकसभा चुनाव और उसके बाद के विधानसभा चुनावों के दौरान भी जातीय जनगणना अपनी असहमति जता चुके हैं।
हिन्दुओं को लूटने की साजिश है जातीय जनगणना
उनका मानना है कि, जाति जनगणना हिंदुओं को बांटने का काम करेगी और हिन्दू जातियों के बीच दरार पैदा करेगी, जिसका फायदा उठाकर विपक्षी दल मुसलमानों के लिए धर्म आधारित आरक्षण लागू कर सकेंगे। सीएम योगी ने एक रैली में साफ़-साफ़ कहा था कि, जाति जनगणना “हिंदुओं को लूटने की साजिश है, ताकि मुसलमानों को फायदा पहुंचाया जा सके।” उन्होंने यहां तक कह दिया था कि, जो लोग हिंदुओं को जाति के आधार पर बांटना चाहते हैं, उनका डीएनए रावण और दुर्योधन का है।
ट्वीट कर शांत हुए सीएम योगी
केंद्र सरकार द्वारा जाति जनगणना को मुख्य जनगणना में शामिल करने के ऐलान के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट करके मोदी को बधाई दी और इसे “अभूतपूर्व और स्वागत योग्य” फैसला बताया। उन्होंने, लिखा- “140 करोड़ देशवासियों के व्यापक हित में”। आदित्यनाथ ने कहा, “यह वंचित, पिछड़े और उपेक्षित वर्गों को उनका उचित सम्मान और सरकारी योजनाओं में समान भागीदारी दिलाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार, जिनके नेतृत्व में भाजपा सरकार ने सामाजिक न्याय और डेटा आधारित सुशासन को हकीकत में बदलने का यह ऐतिहासिक फैसला लिया है।”
केशव प्रसाद ने किया केंद्र के फैसले का स्वागत
इसके बाद से इस मुद्दे पर न तो उनका कोई बयान आया और न ही कोई पोस्ट। जबकि, पार्टी के किसी भी बड़े फैसलों पर वे तुरंत वीडियो जारी करते थे और उसे प्रचारित करते थे। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में भाजपा का ओबीसी चेहरा और अक्सर आदित्यनाथ से अलग रहने वाले डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने मीडिया बाइट्स, पोस्ट और वीडियो में जाति जनगणना के फैसले को “ऐतिहासिक” बताते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने बहुजन राजनीति के प्रतीक कांशीराम की प्रसिद्ध पंक्ति उद्धृत करते हुए कहा, “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी… इसका सही इंतजाम पीएम मोदी ने कर दिया है।”
जातीय जनगणना पर विपक्ष ने जो ढोंग रचा, वह सिर्फ जनता को भ्रमित और गुमराह करने का प्रयास था। उनका उद्देश्य केवल दिखावा करना और झूठ की दुकानें खोलने का था।
-मा. उपमुख्यमंत्री श्री @kpmaurya1 जी pic.twitter.com/duN8TDWooB
— Office of Keshav Prasad Maurya (@OfficeOfKPM) May 3, 2025
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अखिलेश ने कसा तंज

मौर्य ने कहा, जाति जनगणना का पूरे दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग समाज ने स्वागत किया है। “इसका दशकों से इंतजार था। यह उन नेताओं के लिए भी सबक है, जो जाति जनगणना का राग तभी तक अलापते हैं, जब तक वे विपक्ष में रहते हैं, लेकिन जैसे ही वे सत्ता में आते हैं, इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। जाति भारतीय राजनीति की सच्चाई है और जाति जनगणना इसका आधार है।” सपा मुखिया अखिलेश यादव ने 2 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाति जनगणना पर एक इंटरव्यू में दी गई योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया की क्लिप को कई बार चलाया और तंज कसते हुए सवाल किया- “क्या माननीय अब भी अपने उसी बयान पर टिके हैं या फिर इसे बदलना चाहेंगे?”
जातीय जनगणना के आलोचक रहे हैं योगी
बता दें कि, योगी आदित्यनाथ की राजनीति हिंदू एकता पर आधारित रही है, जो जातिगत पहचान को गौण मानती है। वह जाति जनगणना को हिंदू समाज को बांटने की साजिश मानते रहे हैं। वे कहते हैं कि, जातीय जनगणना के जरिये विपक्ष मुसलमानों को फायदा पहुंचाने की कोशिश करेगा। यही वजह है कि, जब केंद्र की मोदी सरकार ने जाति जनगणना कराने का ऐलान किया, तो योगी के पूर्ववर्ती बयानों में टकराव में आ गया। नतीजतन उन्होंने खुद को सिर्फ औपचारिक ट्वीट तक सीमित रखा, जो उनकी राजनीतिक बेचैनी को दर्शाता है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने जाति जनगणना कराकर सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश की है। वहीं दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ जैसे नेता इसके प्रति उदासीन या आलोचनात्मक रहे हैं, जो भाजपा के भीतर जाति आधारित और धर्म आधारित राजनीति के बीच द्वंद्व को स्पष्ट रूप से दर्शा रहा है।
सीएम पद के दावेदार हैं केशव प्रसाद मौर्य

वहीं, इस घटनाक्रम ने केशव मौर्य जो कि ओबीसी का प्रतिनिधित्व करते हैं को मौका दे दिया है। ओबीसी मुद्दे पर योगी और केशव में पहले से ही मतभेद रहा है। ऐसे में केशव के रुख से साफ संकेत मिलता है कि, भाजपा के भीतर ओबीसी नेतृत्व अब खुलकर सामाजिक न्याय की मांगों का समर्थन कर रहा है। उनका कांशीराम को उद्धृत करना भाजपा की रणनीति में बहुजन एंगल जोड़ने की कोशिश है। वैसे भी योगी और मोदी के बीच मतभेद की खबरों के बीच केशव प्रसाद मौर्य अगले सीएम के नाम के तौर पर उभरे थे। मौर्य ने काफी समय तक दिल्ली में डेरा डाला था, लेकिन योगी के सिर पर आरएसएस का हाथ होने की वजह से उनकी सीएम की कुर्सी पर आंच नहीं आने पाई।
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