
नई दिल्ली। Masood Azhar: भारतीय सेना ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष की हत्या कर दी गई थी, का बदला ले लिया है। ऑपरेशन सिन्दूर के तहत सेना के लड़ाकू विमानों ने 6 मई की आधी रात को पाकिस्तान और पीओके में घुसकर नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इस हमले में 80 से 90 आतंकियों के भी मारे जाने की खबर है। इस हमले की सबसे खास बात ये रही कि, इस बार भारतीय सेना के फाइटर प्लेन पाकिस्तान में सौ किमी अंदर तक घुसे और आतंक पर जोरदार प्रहार किया। साथ ही इस हमले में कुख्यात आतंकवादी मसूद अजहर का लगभग पूरा परिवार भी खत्म हो गया। आइये जानते हैं, जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की क्राइम कुंडली और भारत में हुए किन-किन आतंकी हमलों का वह मास्टर माइंड रहा है।
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कम उम्र में शामिल हुआ आतंकी संगठन में

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत में स्थित बहावलपुर में अल्लाह बख्श शब्बीर नाम के सरकारी स्कूल के हेड मास्टर के घर में जन्मे मसूद अजहर की शुरूआती शिक्षा दीक्षा मदरसे में हुई। इसके परिवार के लोग मुर्गी पालन का भी काम करते थे, जिससे घर की आर्थिक स्थिति ठीकठाक थी, लेकिन मसूद ने कम उम्र में ही खतरनाक मंसूबे पाल लिए थे। जब वह महज 20 साल का था, तभी हरकत-उल-मुजाहिदीन नाम के एक आतंकी संगठन से जुड़ गया था। हालांकि, मसूद शारीरिक रूप से कमजोर था, जिससे उसे तत्काल जिहादी ट्रेनिंग नहीं दी गई। उसने हरकत-उल-मुजाहिदीन की पत्रिका ‘सदाई-ए-मुजाहिद’ के लिए लिखने का कम शुरू किया।
नफरती भाषण के किया कद ऊंचा
उसके लिखे लेख और नफरती भाषणों ने आतंकी संगठन में उसका कद तेजी से बढ़ाया, जिससे उसे संगठन ने बहुत जल्द एक बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई। आतंकी संगठन ने सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों की मस्जिदों और मदरसों में उसके भाषण करवाए। मसूद अपने भाषणों के कश्मीर को आजाद कराने पर बराबर जोर देता था। वह मुसलमानों को भारत के खिलाफ जिहाद करने के लिए उकसाता था। उसकी आतंकी सोच का फायदा संगठन ने अपने लिए रकम जमा करने में भी उठाया। दुनिया की नजरों से बचने के लिए वह पाकिस्तान में मौलवी बनकर रहा, लेकिन दिमाग में आतंकवाद जैसे खतरनाक मंसूबे को पालता रहा।
भागने के लिए खोदी सुरंग

कश्मीर को आजाद कराने के अपने नापाक इरादों को पूरा करने के मकसद से मसूद अजहर साल 1994 में श्रीनगर आया। यहां जब वह हरकत-उल-अंसार के कमांडर सज्जाद अफगानी के साथ एक खुफिया मीटिंग कर रहा था, तभी इसकी भनक भारतीय सुरक्षाबलों को लग गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद दोनों आतंकियों को जम्मू की एक जेल में भेज दिया गया। अजहर ने यहां बंद दूसरे कैदियों को भी भारत के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। जून 1999 में सज्जाद अफगानी और कुछ दूसरे कैदियों ने अजहर के साथ मिलकर भागने का प्लान बनाया और जेल में ही एक सुरंग खोदी, लेकिन सुरक्षाबलों की सतर्कता के चलते ये अपने मंसूबे में कामयाब नहीं ही पाया और भागने की कोशिश के दौरान एक अफगानी मारा गया। हालांकि, मसूद अजहर जेल से भागने में तो नाकाम रहा, लेकिन कुछ ही दिनों बाद भारत को इसे छोड़ना पड़ गया।
प्लेन हाइजैक कर ले गए कंधार

दरअसल, 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से दिल्ली आ रही इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट IC 814 को पांच नकाबपोश आतंकियों ने कब्जे में ले लिया और कंधार लेकर चले गये। इससे पहले आतंकियों ने विमान को पाकिस्तान में उतारने की इजाजत मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। हालांकि, विमान में ईंधन कम होने के कारण उसे अमृतसर में लैंड कराया गया, लेकिन यहां ईंधन भरने में देरी होने पर आतंकियों को शक हुआ और उन्होंने यात्रियों को मारने की धमकी देकर पायलट पर बिना ईधन भराए ही विमान उड़ाने का दवाब बना दिया। इसके बाद विमान को कई जगहों पर ले जाया गया लेकिन कहीं भी इसे उतारने की इजाजत नहीं मिली।
रिहा होते ही उगला भारत के खिलाफ जहर
आखिर में विमान को तालिबान शासित अफगानिस्तान के कंधार में उतारा गया। यही से आतंकियों ने भारत की जेल में बंद अपने तीन साथियों- अहमद उमर सईद शेख, मुश्ताक जरगर और मसूद अजहर को बिना शर्त रिहा करने की मांग की। साथ ही ये भी धमकी दी कि, मांगे न मानी गईं तो विमान में सवार सभी यात्रियों को मार दिया जायेगा। यात्रियों की जान बचाने के लिए भारत को मजबूरन इन आतंकियों को रिहा करना पड़ा। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया था कि, विमान का अपहरण करने वाले आतंकियों में एक मसूद अजहर का भाई इब्राहिम भी था, जिसका असली मकसद मसूद अजहर को ही रिहा कराना था। भारत की जेल से बाहर आते ही अजहर ने फिर से भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया और मुसलमानों को भारत के खिलाफ जिहाद करने के लिए उकसाने लगा।
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2000 में जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना

बता दें कि, मार्च 2000 में उसने जैश-ए-मोहम्मद नाम के आतंक संगठन की स्थापना की। इस संगठन ने भारत में पठनकोट हमला, उरी हमला और संसद पर हमला जैसे कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया। जैश के ही एक आतंकी ने अक्टूबर 2001 में विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को जम्मू-कश्मीर विधान सभा के गेट पर उड़ा दिया। इसके बाद दो आतंकी विधानसभा में घुस गए और अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में 38 लोग मारे गए। इस घटना को अभी दो महीने भी नहीं बीता था कि, मसूद ने भारत की संसद की सुरक्षा में सेंध लगाते हुए एक और बड़ा हमला किया। उसके पांच आतंकियों ने सदन में घुसने की कोशिश की।
भारत की संसद पर हुए हमले का मास्टरमाइंड

इस हमले में सात लोगों की मौत हुई। जांच में पता चला कि, इस हमले का मास्टर माइंड मसूद अजहर है। उसने एक दूसरे पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिज सईद के लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर इसकी साजिश रची थी। भारत की संसद पर हुए इस हमले से दुनिया भौचक्क रह गई और सबने कड़े शब्दों में इसकी निंदा की। तमाम देशों के गुस्से का ही नतीजा रहा कि, पाकिस्तान को मजबूरी में अजहर के संगठन पर बैन लगाना पड़ा। साथ ही उसे घर में नजरबंद करना पड़ा। हालांकि, एक साल बाद ही उसे रिहा कर दिया गया। इसके बाद साल 2006 में श्रीनगर में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसे कराने का शक भी मसूद अजहर के संगठन पर गया।
पठानकोट हमले का भी है साजिशकर्ता

साल 2016 में पंजाब के पठानकोट में भारतीय वायुसेना के अड्डे पर हुए हमले में भी जैश के आतंकी ही शामिल रहे। इस हमले में छह सुरक्षाकर्मी शहीद हो गये थे। उसी वर्ष पुलिस की वर्दी पहने भारतीय सेना के आतंकवादियों ने नगरोटा क्षेत्र में भारतीय सेना के जवानों पर हमला किया। हमले में चार सैनिक मारे गये। अकेले 2016 में ही, वास्तविक नियंत्रण रेखा पार करके आए चार भारतीय आतंकवादियों ने उरी में भारतीय सेना ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला किया और 17 ग्रेनेड फेंके। इस हमले में सेना के 17 जवान शहीद हुए।
पुलवामा को दिया अंजाम

भारत द्वारा इतने हमलों के बाद भी मसूद का मन नहीं भरा और उसने 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला कर दिया। इस हमले में आतंकी ने आरडीएक्स से भरी गाड़ी को पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ के काफिले की एक बस से भिड़ा दिया। इस आतंकी हमले में भारत को अपने 40 जवान खोने पड़े, लेकिन अब भारत में सत्ता परिवर्तन हो गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस हमले का बदला लेने की ठान ली। पीएम के आदेश पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा इलाके के बालाकोट में जैश के एक आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर जबर्दस्त गोलाबारी की और उसे तहस नहस कर दिया।
भारत का मोस्ट वांटेड है अजहर
इसके बाद मई 2019 में मसूद अज़र को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया। इसी समय, पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति मुशर्रफ ने पहली बार स्वीकार किया कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने भारत में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए “भारतीय सेना” का इस्तेमाल किया था। 56 वर्षीय मसूद अजहर पाकिस्तान में कड़ी सुरक्षा के बीच रहता है और वर्तमान में भारत का सर्वाधिक वांछित आतंकवादी है।
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