
नई दिल्ली। National Herald Case: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड केस से जुड़ी चार्जशीट अदालत में पेश कर दी गई है। इसमें कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और रायबरेली सासंद व विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आरोपी बनाया गया है। ईडी का आरोप है कि इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। हालांकि ईडी ने अदालत के सामने में जो तथ्य पेश किए हैं, वह कई सवाल खड़े कर रहे हैं, जैसे कि क्या किसी संस्था को बिना छिपाए दिया गया दान मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आएगा, क्योंकि सारा पैसा भारतीय बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके दिया गया, जिसे सरकार नियंत्रित करती है।
इसे भी पढ़ें- National Herald Case: ईडी ने शुरू की AJL की संपत्तियों को कब्जे में लेने की प्रक्रिया, रजिस्टर को भेजे नोटिस
लाखों रूपये दिए गये दान

ईडी का आरोप है कि, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने कांग्रेस के सीनियर नेताओं को निर्देश दिया था कि वे नियंत्रित कंपनी यंग इंडियन लिमिटेड को बड़ी रकम दान में दें।यह कंपनी नेशनल हेराल्ड केस से जुड़ी है। ईडी का ये भी दावा है कि, इस कंपनी को कई राज्यों के वरिष्ठ नेताओं ने लाखों रुपये दान में दिए हैं, लेकिन ईडी के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि क्या यह दान काला धन है। यदि यह काला धन है, तो ईडी के पास इसका सबूत क्यों नहीं है, क्योंकि सारा दान बैंक के माध्यम से दिया गया है।
तेलंगाना के 4 नेताओं ने दिया 80 लाख का दान
ईडी के मुताबिक, कंपनी को जो भी दान दिया गया उसका एक बड़ा हिस्सा तेलंगाना से है। यहां के तत्कालीन विधायक और मौजूदा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के कहने पर साल 2022 में चार कांग्रेस नेताओं ने यंग इंडियन को 80 लाख रुपये से ज्यादा का डोनेशन दिया था। इन चार नेताओं में 2019 का आम चुनाव लड़ने वाले गली अनिल कुमार भी शामिल हैं। इन्होंने जून 2022 में कंपनी को 20 लाख रुपये का दान दिया था।
बैंक के माध्यम से दिया गया दान
पूर्व विधायक अली शब्बीर ने भी 20 लाख रुपये का दान दिया। तत्कालीन तेलंगाना कांग्रेस के कोषाध्यक्ष पी. सुदर्शन ने 15 लाख रुपये का दान दिया। सबसे बड़ी रकम 25 लाख रुपये तेलंगाना कांग्रेस के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने दिया था। ईडी का कहना है कि, ये सभी दान एक महीने के अंदर कंपनी के खाते में ट्रांसफर किये गये थे। यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या ये दान कालाधन है जबकि इसका पूरा रिकॉर्ड बैंक में दर्जा है। सारा दान बैंक के जरिये दिया गया था।
अमित विज ने दिया 3.30 करोड़ रुपये का दान

ईडी की जांच में कर्नाटक और पंजाब में भी दान के इसी तरह के पैटर्न का पता चला है। कहा जा रहा है कि, चंडीगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन बंसल ने कथित तौर पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार और उनके भाई, सांसद डीके सुरेश को अप्रैल 2022 में कंपनी को 25-25 लाख रुपये डोनेशन देने को कहा था। अप्रैल में ही शिवकुमार से जुड़े राष्ट्रीय शिक्षा ट्रस्ट ने भी यंग इंडियन को 2 करोड़ रुपये बतौर डोनेशन दिया था। पंजाब में, विधानसभा चुनाव लड़ने वाले अमित विज ने भी साल 2015 में तीन अलग-अलग किश्तों में 3.30 करोड़ रुपये का दान दिया था।
दवाब बना कर लिया गया डाल- ईडी का आरोप
ईडी का मानना है कि ये दान स्वैच्छिक था, बल्कि यंग इंडियन में पैसा डालने के लिए पार्टी के नेताओं पर दवाब बने गया था। हालांकि, ईडी कोर्ट में इसे कैसे साबित करेगी य ये बड़ा सवाल है। दान देने वाले नेताओं में कोई भी जब तक लिखित बयान न दे या ईडी उसे गवाह के तौर पर पेश करके बयान न दिलवा दे, वह ये नहीं साबित कर सकती कि उन्होंने ये रकम किसी दबाव में आकर दी है।
इसे भी पढ़ें- Supreme Court: SC ने ईडी की जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल, कहा- सबूत दिखाओ, इस केस की हो रही थी सुनवाई
ईडी कर रही जांच
हालांकि, एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि, क्या ये लेन-देन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMAL) का उल्लंघन करते हैं। अहम बात यह है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ी इस खबर को मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग के तौर पर प्रचारित कर रही है जबकि ईडी सूत्रों के हवाले से कह रही है कि, वह इस बात पर विचार कर रही है कि ये दान धन शोधन कानून का उल्लंघन करते हैं या नहीं। वहीं, ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि “इन दानों का पैटर्न, समय और समन्वय इस बात की ओर साफ इशारा करते हैं कि, पार्टी के वफादारों और राज्य स्तर के नेताओं का इस्तेमाल करके यंग इंडियन में पैसा डालने का एक व्यवस्थित प्रयास किया गया था।”
कांग्रेस ने बताया राजनीति से प्रेरित

अब सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, ईडी जल्द ही मामले से जुड़े कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी कर रही है। साथ ही अदालत में पूरक साक्ष्य दाखिल करने का प्लान बना रही है। इधर कांग्रेस ईडी की इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित करार दे रही है। उसका कहना है कि सभी वित्तीय लेन-देन वैध तरीके से किये गये हैं। अब एक बार फिर से नेशनल हेराल्ड मामला बड़ा राजनीतिक विवाद बनता हुआ नजर आ रहा है। बता दें कि, यह मामला एक दशक से चल रहा है, लेकिन ईडी अदालत में अभी तक कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी है। हालांकि उसने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी पूछताछ की, लेकिन उसके हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगा।
पांच अन्य को भी बनाया आरोपी
ईडी ने पीएमएलए के तहत सोनिया गांधी को आरोपी नंबर 1 और राहुल गांधी को आरोपी नंबर 2 बनाया है। इसके अलावा पांच अन्य को भी आरोपी बनाया है। ईडी की चार्जशीट में यंग इंडियन को डोनेशन के नाम पर मिले पैसों का लाभ सोनिया और राहुल ने उठाया है। एजेंसी का कहना है कि यंग इंडियन लिमिटेड ने नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति महज 50 लाख रुपये में खरीदी थी। इस लेन-देन ने गबन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को जन्म दिया है।
इसे भी पढ़ें- National Herald Case: ईडी ने शुरू की AJL की संपत्तियों को कब्जे में लेने की प्रक्रिया, रजिस्टर को भेजे नोटिस









Users Today : 3

