
नई दिल्ली। Justice Yashwant Verma: घर में लगी आग को बुझाने के दौरान स्टोर रूम में मिली भारी मात्रा में नगदी के बाद चर्चा में आये जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कवायद तेज हो गई है। कई पार्टियों के दो सौ से अधिक सांसदों ने उन्हें पद से हटाने का नोटिस दिया है। कहा जा रहा है कि 21 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में दोनों सदनों में उनके खिलाफ महाभियोग का नोटिस पीठासीन अधिकारियों को सौंप दिया गया है, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर सकते हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक जज, हाईकोर्ट के एक चीफ जस्टिस और एक प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल होंगे। ये कमेटी जस्टिस यशवंत वर्मा के केस की जांच करेगी। आइए जानते हैं जस्टिस वर्मा से पहले किन-किन जजों के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया था और उन पर क्या कार्रवाई हुई थी। क्या भारत में अभी तक किसी जज को महाभियोग के जरिये उनके पद से हटाया गया है।

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जस्टिस वी. रामास्वामी
आज से करीब 32 साल पहले यानी 1993 में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के जज वी. रामास्वामी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसके चलते उनके खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन लोकसभा में ये प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। माना जाता है कि, जस्टिस रामास्वामी महाभियोग का सामना करने वाले पहले जज थे।
जस्टिस सौमित्र सेन
कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सौमित्र सेन के खिलाफ भी 2011 में राज्यसभा में महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया था। उन पर धन के दुरुपयोग का आरोप लगा था। हालांकि, लोकसभा में मामले पर विचार किए जाने से पहले ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जस्टिस एस.के. गंगेले
यौन उत्पीड़न के आरोप से घिरे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस.के गंगेले के खिलाफ 2015 में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था और एक जांच कमेटी गठित की गई थी। हालांकि, कमेटी ने जांच के बाद उन्हें दोषमुक्त करार दिया था।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला
साल 2015 में गुजरात हाईकोर्ट के जज जस्टिस जे.बी पारदीवाला को भी महाभियोग प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था। इन पर आरक्षण पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। इसके लिए इन्हें महाभियोग नोटिस दिया गया था, लेकिन बाद में जज ने विवादित टिप्पणी हटा ली थी, जिससे महाभियोग की प्रक्रिया रुक गई।
जस्टिस सी.वी नागार्जुन रेड्डी
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस सी.वी नागार्जन रेड्डी के खिलाफ साल 2017 में राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन कुछ सांसदों ने अपने हस्ताक्षर वापस ले लिए जिसे कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
जस्टिस दीपक मिश्रा
2018 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव संसद में पास नहीं हो सका। दरअसल, राज्यसभा के सभापति ने इस प्रस्ताव को पहले ही चरण में खारिज कर दिया।
ये है मामला
दरअसल, इसी साल 14 मार्च की रात को जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लग गई थी, जिसे बुझाने पहुंचे फायर ब्रिगेड के कर्मियों और पुलिस को उनके घर से भारी मात्रा में जले हुए कैश बरामद हुए थे। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें घर के स्टोर रूम में 500-500 रुपये के जले नोटों के बंडल दिखाई दे रहे थे। इस घटना के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस रहे यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। साथ ही मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई, जिसने जस्टिस वर्मा को दोषी करार दिया।
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