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Income Tax Slabs: बड़ी राहत, अब 12 लाख की इनकम पर नहीं देना होगा कोई टैक्स

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Finance Minister Nirmala Sitharaman

Income Tax Slabs: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। अब 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। भारत में इनकम टैक्स की दरें समय-समय पर बदलती रही हैं, जो देश के आर्थिक विकास और जनसंख्या की जरूरतों पर निर्भर करती हैं। इन दरों में बदलाव का सभी पर असर पड़ता है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि टैक्स प्रणाली सभी के लिए निष्पक्ष हो।

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अगले हफ्ते पेश होगा नया इनकम टैक्स बिल

नए नियमों के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर अब कोई टैक्स नहीं देना होगा। पहले यह सीमा 7 लाख रुपये थी। इस नए ढांचे में मानक कटौती 75,000 रुपये रखी गई है। इसके साथ ही, वित्त मंत्री ने नए इनकम टैक्स बिल की भी जानकारी दी और बताया कि यह बिल अगले हफ्ते पेश किया जाएगा।

अब कितना टैक्स देना होगा

नए आयकर स्लैब के अनुसार, 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यह मध्यम वर्ग के करदाताओं के लिए एक बड़ा लाभ है। नए स्लैब में टैक्स दरें इस प्रकार होंगी।

4 लाख रुपये तक: 0 फीसदी  टैक्स
4 लाख से 8 लाख रुपये तक: 5 फीसदी  टैक्स
8 लाख से 12 लाख रुपये तक: 10 फीसदी टैक्स
12 लाख से 16 लाख रुपये तक: 15 फीसदी  टैक्स
16 लाख से 20 लाख रुपये तक: 20फीसदी  टैक्स
20 लाख से 24 लाख रुपये तक: 25 फीसदी  टैक्स
24 लाख रुपये से ऊपर: 30 फीसदी टैक्स

टैक्स दरों में बदलाव का इतिहास
1997-98: पहली बड़ी वृद्धि
1997 में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आयकर में बड़ा परिवर्तन किया था। इस साल, 5 लाख रुपये से अधिक की आय पर 40% कर लगाया गया था, जो तब का सबसे अधिक टैक्स था।
2009-10: अधिभार का अंत

वित्त वर्ष 2009-10 में सरकार ने व्यक्तिगत आयकर पर अधिभार को खत्म कर दिया। हालांकि, 2010-11 में 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 10% अधिभार लागू किया गया।

2014-15: नई कर प्रणाली

साल 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार ने नई कर प्रणाली शुरुआत की। इस साल आयकर स्लैब में कुछ बदलाव हुए। 2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं था। 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक पर 10% और 5 लाख से 10 लाख रुपये तक पर 20% कर लगाया गया था।

2018-19: स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर

2018 में सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर को बढ़ाकर 4% कर दिया था। इससे उच्च आय वर्ग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा। इसके साथ ही इसी साल, नए टैक्स स्लैब को भी लागू किया गया।

 

2020-21: कोविड-19 का प्रभाव

कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने राहत के लिए कुछ करों को स्थगित कर दिया था। फिर भी, उच्च आय वर्ग के लिए टैक्स दरें पहले की तरह बरकरार रहीं।

2021-22: स्थिरता का प्रयास

इस वर्ष भी सरकार ने टैक्स दरें वही रखीं, लेकिन कुछ विशेष मामलों में उच्च आय वर्ग के लिए टैक्स दरें बढ़ाई गईं।

अब तक (2024-25) तक क्या था

नया टैक्स सिस्टम कहता है कि 3 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। 3 से 7 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत टैक्स लगता है। 7 से 10 लाख रुपये तक पर 10 प्रतिशत टैक्स देना होता है। 10 से 12 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत टैक्स लगता है।

 

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