
नई दिल्ली। Delhi Government: देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीजेपी की सरकार बन गई है। बतौर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कामकाज संभाल लिया है, लेकिन सत्ता संभालने के महज 48 घंटे के भीतर ही उन्होंने कुछ ऐसा बयान दे दिया, जिससे दिल्ली की लाखों महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं को बड़ा झटका लगा है। इस बयान के बाद बीजेपी द्वारा दिल्ली की जनता से किये गये वादे खटाई में पड़ते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल, भाजपा की नव निर्वाचित सीएम रेखा गुप्ता ने दिल्ली की पूर्व आम आदमी पार्टी की सरकार पर दिल्ली का सरकारी खजाना खाली कर देने का आरोप लगाया है।
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चरमराई है स्वास्थ्य व्यवस्था

रेखा गुप्ता के अलावा, दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का पिछला कार्यकाल भी दिल्ली विधानसभा में उनके अभिभाषण की घोषणाओं पर ठोस अमल की कोई उम्मीद जगाता हुआ नहीं नजर आ रहा है। हालंकि, उन्होंने बीजेपी के 10 चुनावी संकल्प पूरे करने की बात कही है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में सब्सिडी की रक़म 2024-25 में ही 10,995 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुकी है। अपने अभिभाषण में एलजी ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार एवं आयुष्मान योजना के तहत 10 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा देने का वायदा भी जनता से किया है, जबकि सच ये है कि मौजूदा समय में दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई है।
अपराधियों पर नकेल कसने की हिदायत

यहां के अस्पतालों में प्रति एक हजार नागरिक पर औसतन तीन बेड ही उपलब्ध है। दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में भी लोगों को इलाज के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। गंभीर से गंभीर बीमारी में ऑपरेशन के लिए लोगों को कम से कम छह से आठ महीने इंतजार करना पड़ता है। मोदी के विश्वस्त लोगों में शामिल एलजी ने दिल्ली को देश का सबसे साफ़ सुथरा मेट्रो शहर बनाने का दावा किया है, लेकिन यहां सवाल ये है कि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते दिल्ली का नगर निगम भी बीते 11 वर्षों से बीजेपी के ही कब्जे है, तो अभी तक एलजी दिल्ली को स्वच्छ क्यों नहीं करा पाए?

और अब वे ओखला, गाजीपुर, भलस्वा और दिल्ली के अन्य इलाकों में लगे कचरे के पहाड़ हटाने के लिए ठोस कचरा उपचार क्षमता बढ़ाने की घोषणा कर रहे हैं, जबकि इन कचरे के पहाड़ों के जिम्मेदार वहीं हैं। वहीं, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब दिल्ली की पुलिस को आपराधिक गिरोहों पर नकेल कसने की हिदायत दे रहे हैं, लेकिन ये अपराधिक गिरोह भी बीजेपी की छत्रछाया में ही पले बढ़े हैं क्योंकि दिल्ली पुलिस भी केंद्र सरकार के अंडर में ही आती है।
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महीनों करना पड़ता है सर्जरी के लिए इंतजार
राष्ट्रीय राजधानी में वर्तमान समय में 109 सरकारी एवं 67 निजी अस्पताल हैं, जिनमें लगभग 49,455 बेड हैं, जो दिल्ली की जनता के हिसाब से नाकाफी है। यहां के सरकारी अस्पतालों में लोगों को सामान्य सर्जरी के लिए दो से तीन महीने और जले हुए घावों के ऑपरेशन व प्लास्टिक सर्जरी के लिए कम से कम आठ महीने इंतज़ार करना पड़ता है। नतीजतन कई मरीजों की जान चली जाती है या फिर समस्या हद से ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि जले हुए घावों में त्वचा की ग्राफ्टिंग अगर तत्काल नहीं की जाती है, तो घाव सड़ने लगता है, जिससे मरीज की मौत होने का खतरा बढ़ जाता है।
जीवनरक्षक दवाओं का टोटा
गौरतलब है कि साल 2016-17 के बजट में एलजी की निगरानी में आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में और 10,000 बेड़ों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बीते छह साल में मात्र 1357 बेड ही बढ़ा पाई। बेड के अलावा दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में सामान्य दवाओं के साथ ही जीवनरक्षक दवाओं की भी भारी किल्लत रहती है। और तो और दिल्ली में पूर्व की आतिशी सरकार द्वारा साल 2025-26 में 8,000 करोड़ रुपए के बजट घाटे के अनुमान के बावजूद एलजी विनय सक्सेना ने राजधानी की प्रत्येक गर्भवती महिला को 21,000 रुपए नकद और छह पोषण किट देने, गरीब महिलाओं को 500 रुपये में नियमित रसोई गैस सिलेंडर देने और होली-दीवाली पर एक-एक सिलेंडर मुफ्त देने का ऐलान किया है।
एलजी ने बढ़ाई मासिक पेंशन

साथ ही उन्होंने पूर्व की केजरीवाल सरकार द्वारा चलाई जा रही है कल्याणकारी योजनाओं को भी जारी रखने और प्रधानमंत्री के ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’, पीएम-उदय, आयुष्मान भारत तथा पीएम-सूर्य घर योजनाओं को लागू करने की बात कही है। एलजी ने वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली मासिक पेंशन को 2,000 रुपए से बढ़ाकर 2,500 रुपए करने का ऐलान किया है। वहीं 70 वर्ष से अधिक के नागरिकों, विधवाओं, बेसहारा एवं परित्यक्त महिलाओं की पेंशन 2,500 रुपए से बढ़ाकर 3,000 रुपए करने का वायदा किया है। इन सबके अलावा और भी बहुत से वादे हैं, जो बीजेपी ने दिल्ली की जनता से किये हैं। ऐसे में उन्हें कैसे पूरा करेंगी, ये बड़ा सवाल है क्योंकि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मानें तो पूर्व की दिल्ली सरकार ने खजाना खाली कर दिया है। ऐसे में वह वादों को पूरा करने के लिए पैसे कहां से लायेंगी।
सालाना 25,000 करोड़ का होगा नुकसान
बता दें कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है। ऐसे में दिल्ली सरकार बाजार से सीधे कर्ज भी नहीं ले सकती है। वहीं, राजस्व घाटा बढ़ते ही प्रशासक के वित्तीय अधिकार छिन जाने की तलवार भी लटकी हुई है। पिछली सरकार यानी कि आम आदमी की सरकार ने साल 2025-26 के बजट अनुमानों में 8159 करोड़ रुपए का घाटा आंका था, जो ‘मोदी की गारंटी’ से पहले की बात है। ऐसे में अब अगर नई वित्तीय सहायता योजना लागू होती हैं तो, दिल्ली सरकार का घाटा सालाना 25,000 करोड़ रुपए तक बढ़ जाने की आशंका है जिसकी भरपाई करना मुख्यमंत्री के लिए लगभग असंभव हो जाएगा।
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