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Aurangzeb Remarks Row: अबू आजमी के बयान पर महाराष्ट्र से यूपी-बिहार तक मचा हंगामा, माफ़ी भी नहीं आ रही काम

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Aurangzeb Remarks Row

महाराष्ट्र। Aurangzeb Remarks Row: औरंगजेब पर बयान देकर समाजवादी पार्टी के विधायक ने अपने लिए आफत मोल ले ली है। हालांकि, उन्होंने अपने इस बयान के लिए माफ़ी मांग ली है, लेकिन इसकी आंच अब देश के कई राज्यों तक पहुंच गई है। आजमी के बयान को बीजेपी अब पूरे अंजाम तक पहुंचाने का मूड बना चुकी है। वहीं, बिहार के जेडीयू नेता ने भी अबू आजमी का समर्थन करते हुए औरंगजेब की तारीफ कर दी है और उसे एक अच्छा शासक बताया है। फिलहाल अबू आजमी पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है। वहीं उन्हें सदन से निलंबित कर दिया गया है।

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अबू आजमी ने की औरंगजेब की तारीफ़ 

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बता दें कि, मुंबई के मानखुर्द शिवाजी नगर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक अबू आजमी ने मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ करते हुए कहा था कि, उसके शासनकाल में भारत की सीमा अफगानिस्तान और बर्मा तक पहुंच गयी थी, उस वक्त “हमारा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विश्व सकल घरेलू उत्पाद का 24 प्रतिशत था, भारत को (औरंगजेब के समय) सोने की चिड़िया कहा जाता था और मैं 17वीं सदी के मुगल बादशाह औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानता। फिल्मों के माध्यम से मुगल बादशाह की छवि खराब की जा रही है। आजमी के इस बयान पर अब महाराष्ट्र से लेकर  यूपी-बिहार तक हंगामा मच गया है और उन पर छत्रपति संभाजी महराज के अपना का आरोप लग रहा है।

मचा हंगामा, बिना शर्त मांगी माफ़ी

शिवसेना के विधायक नीलेश राणे का कहना है कि, आजमी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। उन्हें महाराष्ट्र का इतिहास नहीं पता है। हालांकि, अबू आजमी ने अपने बयान को लेकर माफ़ी मांग ली है और कहा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। मैंने वहीं कहा है, जो इतिहासकारों और लेखकों ने कहा है, मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज या अन्य किसी भी महापुरुष के बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने कहा, मैं इतना बड़ा नहीं हूं, मैंने जो कुछ कहा था, वह असल में इतिहासकारों का व्यक्तव्य है। बावजूद इसके अगर मेरे इस बयान से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं बिना किसी शर्त के माफी मांगता हूं और अपना बयान वापस लेता हूं।’

आजमी पर आक्रामक हुए सीएम

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इस बयान के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आजमी पर आक्रामक हो गये हैं। शिंदे ने तो इशारों-इशारों में ये भी बता दिया है कि निलंबन तो एक शुरुआत है, आजमी के साथ आगे और भी बहुत कुछ होगा। उधर, अबू आजमी का आरोप है कि अब उन्हें धमकियां मिल रही हैं। वहीं उन्होंने लोकतंत्र की दुहाई देते हुए निलंबन की कार्रवाई का भी विरोध किया है।

जेडीयू एमएलसी ने भी औरंगजेब की तारीफ़

महाराष्ट्र से उपजे इस बवाल के बीच बिहार में जेडीयू एमएलसी खालिद अनवर ने भी मुगल बादशाह औरंगजेब को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है, इतिहासकार कहते हैं कि वह अच्छे शासक थे तो, कुछ इतिहासकार लिखते हैं कि वह खराब शासक थे, ये तो एकेडमिक डिस्कशन का विषय है, मैं भी इतिहास का स्टूडेंट रहा हूं और इतिहासकारों ने लिखा है कि, औरंगजेब जालिम नहीं था, उसने मंदिरों को नहीं तोड़ा, लेकिन मेरा मानना है कि वह एक राजा थे और उन्होंने वही किया जो राजा करता है, राजा को राज चलाने के लिए जो करना पड़ता है, वह वो करता है। अनवर ने कहा, मेरी भी राय है कि औरंगजेब एक अच्छे राजा थे।

इस विवाद को लेकर दिवंगत कवि मुनव्वर राणा के बटे तबरेज राणा की भी प्रतिक्रिया आई है। तबरेज का कहना है कि, औरंगज़ेब ने भारत पर 48 साल तक शासन किया, अगर उसने 48 साल तक हिंदुओं का कत्लेआम किया होता, तो क्या एक भी हिन्दू जिन्दा होता? अगर उसने मंदिर तोड़े होते तो क्या 48 साल तक मन्दिर बचे रहते? पिछले 10 साल की सरकार में काफी जगहों पर बुलडोजर चलाए गए, जबकि औरंगजेब के पास तो  48 साल थे, तब न हम थे, न सोशल मीडिया।

 

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