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Keshav Prasad Maurya बनेंगे यूपी के प्रदेश अध्यक्ष!, इस ख़ास मकसद को पूरा करने की मिलेगी जिम्मेदारी

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Keshav Prasad Maurya

लखनऊ। Keshav Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। बीजेपी के बड़े नेता प्रदेश के कई इलाकों में रैली और जनसभा तो कर ही रहे हैं। साथ ही पार्टी के अंदर भी बड़े बदलाव की योजना भी बना रही है। इन दिनों पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। चर्चा ये भी है कि, प्रदेश में बीजेपी अध्यक्ष के लिए अभी कुछ समय लग सकता है।

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साफ़ होगा मुख्यमंत्री का चेहरा
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सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद ही पार्टी  प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान करेगी। बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा की मानें तो पार्टी के लिए दोनों रास्ते खुले हैं। वहीं एक कयास ये भी है कि प्रदेश के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष और वर्तमान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, पार्टी क्या फैसला लेगी ये आने वाला समय बतायेगा। वहीं, बीजेपी केशव मौर्य को संगठन में भेजकर मुख्यमंत्री चेहरे के लिए योगी आदित्यनाथ का रास्ता साफ कर देगी। कयास लगाया जा रहा है कि, केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी एक तीर से दो निशाने साधने की जुगत में है।

शाह और राजनाथ सिंह ने हो चुकी है मुलाकात

आपको बता दें कि, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की हाल में ही में अमित शाह और राजनाथ सिंह से हुई मुलाकात ने प्रदेश की राजनीति में गर्मी ला दी है। इस मुलाकात के दौरान यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर इन नेताओं के बीच अहम चर्चा हुई है। गृहमंत्री से हुई मीटिंग के बाद मौर्य ने खुद स्वीकार किया है कि, साल 2027 में 2017 को दोहराने और आगामी विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने पर चर्चा हुई। मालूम हो कि, 2017 में केशव प्रसाद मौर्य पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे और उन्हीं की अगुवाई में बीजेपी ने ऐतिहासक जीत दर्ज की थी। केशव प्रसाद के इस बयान के बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि, जल्द ही उन्हें अगला प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

 केन्द्रीय नेतृत्व लेगा निर्णय

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इधर, प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने बीजेपी अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर बड़ा बयान दिया है, जिससे कयासों को और अधिक हवा मिलने लगी है। मीडिया से हुई एक बातचीत में पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि, बीजेपी की एक चयन प्रक्रिया है। इसमें पार्टी से जुड़ा हर निर्णय केंद्रीय नेतृत्व लेता है। बीजेपी किसी भी योग्य कार्यकर्ता को यूपी के अध्यक्ष की कमान सौंप सकती है।

बीजेपी में संविधान के अनुसार पूरी प्रक्रिया होती है, जो पूरी हो चुकी हैं। केंद्रीय नेतृत्व कभी भी अध्यक्ष की नियुक्ति पर निर्णय ले सकता है। उन्होंने बताया, बीजेपी अध्यक्ष के लिए जिन-जिन प्रदेशों में चुनाव होने थे, हो गये हैं। अब बस फैसला लेना बाकी है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान अब कभी भी हो सकता है और इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का भी ऐलान किया जा सकता है। इसका फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व को लेना है, उनके लिए दोनों रास्ते खुले हैं।

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विपक्ष का पीडीए बना चुनौती

बता दें कि, पार्टी के दिग्गज नेता और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी समुदाय का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। प्रदेश में पिछड़े वर्ग की एक बड़ी आबादी है जिसका पूरा समर्थन साल 2017 और 2019 में पार्टी को मिला था। ऐसे में जब समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) का फार्मूला अपना कर बीजेपी के ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रही है, तब बीजेपी केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पिछड़े वर्ग को साधने की रणनीति पर काम करने की योजना  बना सकती है।

2017 को दोहराने की कोशिश

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साल 2027 में जब बीजेपी पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई थी, तब भी प्रदेश की कमान केशव प्रसाद मौर्य के हाथ में थी। उस वक्त पार्टी ने 403 में से 312 सीटें जीतकर इतिहास रचा था। मौर्य जमीन से जुड़े नेता माने जाते हैं, वे गली-गली जाकर संगठन को खड़ा करने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि, पार्टी एक बार फिर से उन्हें 2027 में वैसी ही जीत दोहराने के लिए उनके अनुभव और पकड़ का फायदा उठाना चाहेगी। भाजपा में जहां अमित शाह को आक्रामक रणनीतिकार माना जाता है। वहीं, राजनाथ सिंह को संतुलनकारी नेता माना जाता है, जो पार्टी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। केशव मौर्य दोनों के बीच संवाद बनाए रखने में सक्षम हैं।

संघ की नर्सरी ने निकले हैं केशव

हाल ही में उनकी अमित शाह और राजनाथ सिंह से बैक-टू-बैक कई मीटिंग हुईं, जो इस बात की तरफ इशारा कर रही है कि, मौर्य संगठन और सरकार दोनों के बीच संतुलन साधने में माहिर हैं। केशव प्रसाद मौर्य की सबसे बड़ी ताकत यह है कि, वे संघ और संगठन की नर्सरी से निकले नेता हैं और पिछड़ा वर्ग में मजबूत पकड़ रखते हैं। उनकी छवि एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर उपमुख्यमंत्री तक की यात्रा करने वाले नेता की है। वे एक ऐसे जमीनी नेता हैं, जो कार्यकर्ताओं में उर्जा भरने की क्षमता रखते हैं।

एक्टिव हुई बीजेपी

2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी अब फ्रंट फुट पर आ चुकी है। वहीं विपक्ष खासकर अखिलेश यादव का पीडीए फार्मूला बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के सामने मुश्किल खड़ी कर रहा है। ऐसे में अगर बीजेपी केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश का अध्यक्ष बनाती है, तो ये देखना दिलचस्प होगा कि, जिस मकसद के लिए उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी गई है क्या वे उसमें कामयाब होते हैं या नहीं।

 

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