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Martial Law: क्या है मार्शल लॉ, जिसे साउथ कोरिया ने लगाया और फिर हटा दिया

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Martial Law: बीते दिन यानी तीन दिसंबर को दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ लगाये जाने का ऐलान किया गया था, लेकिन अब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सेओक-योल ने बुधवार सुबह ही इसे हटाने का ऐलान का दिया। राष्ट्रपति यून सियोक-योल का कहना है कि देश का विपक्ष अब उत्तर कोरिया के साथ मिल गया है। उसने उत्तर कोरिया के प्रति सहानुभूति दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे में इस समय बहुत से युवाओं के मन में सवाल उभरने लगा है कि क्या है मार्शल लॉ जिसे दक्षिण कोरिया में लगाया गया, लेकिन बाद में इस हटा लिया गया। बता दें कि ऐसे सवाल प्रतियोगी परीक्षाओं और इंटरव्यू में भी पूछे जाते हैं।

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‘सैनिक कानून’ भी कहते हैं इसे

Martial Law

मार्शल लॉ एक विशेष स्थिति है जिसमें एक सरकार किसी क्षेत्र में सशस्त्र बलों पर प्रशासनिक और कानूनी नियंत्रण रखती है। इस प्रणाली का उपयोग किसी बड़े आंतरिक संकट, व्यापक नागरिक अशांति, प्राकृतिक आपदा या विदेशी हमले की स्थिति में किया जाता है। मार्शल लॉ पूरे देश में या विशिष्ट क्षेत्रों में लगाया जा सकता है। इसे ‘सैनिक कानून’ भी कहा जाता है।

इन सब पर लग जाती है रोक 

संसदीय और राजनीतिक गतिविधियों को रद्द करना: संसदीय गतिविधियों को निलंबित कर दिया जाता है और सभी राजनीतिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी जाती है।
मीडिया और प्रशासन सैन्य नियंत्रण में: सभी प्रकार के मीडिया और प्रशासन सैन्य नियंत्रण में हो जाते हैं।
सार्वजनिक सभाएं और प्रदर्शन निषिद्ध: सभी विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाएं निषिद्ध कर दी जाती हैं।
यात्रा और आवाजाही पर प्रतिबंध: आंतरिक आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर सैन्य चौकियां स्थापित कर दी जाती हैं।
सामाजिक और औद्योगिक गतिविधियां: हड़ताल और काम बंद करना निषिद्ध कर दिया जाता है।

कड़े विरोध की वजह से वापस लिया गया निर्णय 

हाल ही में, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक-योओल ने देश में मार्शल लॉ लगाने का ऐलान कर दिया था, जिससे देश और विदेश स्तर पर तनाव बढ़ गया है। ये निर्णय  विपक्षी दलों के कड़े विरोध और उनकी सरकार पर महाभियोग लगाने के बीच लिया गया था, लेकिन सांसदों और जनता के कड़े विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया।मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि देश में मार्शल लॉ की घोषणा राष्ट्रपति यूं की घटती लोकप्रियता और विपक्षी ताकतों में वृद्धि की वजह से किया गया था। ये स्थिति उस वक्त बेहद गंभीर हो गई, जब राष्ट्रपति और उनकी पत्नी पर भ्रष्टाचार और स्टॉक मूल्य में हेरफेर के आरोप लगने लगे।

1980 में लगा था मार्शल लॉ

दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ आखिरी बार 1980 में लगाया गया था, जब सरकार को ग्वांगजू विद्रोह के दौरान बड़े पैमाने पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। मार्शल लॉ तब लगाया जाता है जब अन्य सभी प्रबंधन विकल्प विफल हो जाते हैं।

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